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इमरान खान ने मारी हैट्रिक

अपने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान का नाम कौन नहीं जानता होगा। क्रिकेट में इमरान खान जितने हिट रहे राजनीति के मैदान पर वह अपनी उतनी बेहतरीन पफॉरमेंस नहीं दिखा पाए हैं लेकिन इन दिनों उनका शादी की हैट्रिक पूरी करने के लिए एक बार फिर चर्चा में है। अपने जिंदगी के पैसठ बसंत देख चुके इमरान ने पांच बच्चों की मां के साथ अपनी तीसरी शादी रचाई है। शादी की हैट्रिक को लेकर सोशल मीडिया पर इमरान खान की खूब खिंचाई हो रही है। इससे पहले भी उनकी दो बीबियों से संबंध ज्यादा लंबे नहीं रहे हैं। इसके बाद उन्होंने शादी के तीसरे राउंड में एंट्री ली है देखना होगा कि इमरान खान शादी की हैट्रिक पर ही रुक जाते हैं या फिर चौका और छक्का भी लगाते हैं

साउथ अफ्रीका में धमाल

साउथ अफ्रीका की जमीन पर इस बार टीम इंडिया ने जैसा प्रदर्शन किया उसकी उम्मीद साउथ अफ्रीका के खिलाडिय़ों की तो छोडि़ए खुद भारत के खेल प्रेमियों को भी नहीं थी। शुरूआत में भारत की टीम भले ही लय हासिल करने में समय लगा उसके बाद कोहली की अगुवाई में टीम इंडिया ने विराट प्रदर्शन कर सबको सकते में डाल दिया है। सबसे खास बात यह भी रही कि टीम की बल्लेबाजी के साथ ही गेंदबाजों ने भी अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है। अब तक जो लोग कोहली और शास्त्री की जोड़ी की आलोचना करते नहीं थक रहे थे वो अब कोहली की तारीफों के पुल बांध रहे हैं। कुल मिलाकर टीम इंडिया ने एक बार फिर दुनिया भर में अपनी धाक जमा दी है।

उदार होते देश के बैंक और मेहनतकश पूंजीपति

बैंकों को लेकर अब हमारे देश में हम सबको अपनी राय बदलने की जरूरत है। वो जमाना और था जब बैंक का कर्ज चुकाने के लिए लोगों को एड़ीचोटी का जोर लगाना पड़ता था या फिर किसान बैंक का कर्ज न चुका पाने के बाद मौत को गले लगा लेते थे। हमारे देश के बैंक अब बहुत उदार हो गए हैं। वह सारे नियम कायदों को दरकिनार करते हुए मानवता और देश के विकास के लिए पूंजीपतियों को बड़ी धनराशि लोन के रूप में दे रहे हैं। इतना ही नहीं जब हमारे देश के ये भाग्यविधाता बैंक का कर्ज चुका पाने में नाकाम रहते हैं तो बैंक खुद एक अरसे तक इस बात पर चुप्पी साधे रहते हैं ताकि ये मेहनतकश और ईमानदार लोग अपने सही ठिकाने तक पहुंच सके। उसके बाद शुरू होता सांप निकल जाने के बाद लकीर पीटने का दौर…इसमें देश के नेता भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। अब तो ऐसे लोगों की लंबी लिस्ट हो गई है जो देश के बैंकों का पैसा लेकर विदेशों में मौज कर रहे हैं। सरकार और विपक्ष बैंकिंग व्यवस्था को और सुरक्षित बनाने के बजाए राजनीति करने में जुटे हैं।

बिना आग के धुआं नहीं होता
राजनीति की दशा और दिशा बदलने के नाम सत्ता हासिल करने वाले युगपुरूष की सरकार के विधायक अपने ही आईएएस अधिकारी को पीट रहे हैं। उस पर भी तुर्रा यह है कि इस पूरे मामले का कनेक्शन भाजपा से जोडऩे की कोशिश कर रहे हैं। हद हो गई है फोबिया की…सीएम की मौजूदगी में विधायक चीफ सीक्रेटरी को पीट देते हैं और सीएम साहब कुछ नहीं करते उलटा पार्टी अधिकारी पर केस करने की बात करती है। जुझारू सीएम साहब की पार्टी कहती है कि ढाई लाख परिवारों के राशन कार्ड आधार से लिंक होने थे लेकिन नहीं हुए इसलिए विधायकों पर काफी दबाव था और चीफ सेक्रेटरी ने विधायकों को जवाब देने से मना कर दिया। लेकिन एक बात समझ में नहीं आ रही है कि अगर कोई नौकरशाह जवाब देने से मना कर देगा तो क्या चुन हुए जनप्रतिनिधि उसकी पिटाई करेंगे। ये पहला मौका नहीं। युगपुरूष की सरकार का विवादों से चोली दामन का साथ रहा है। न तो विवादों से दूरी बनाना चाहते हैं और न ही विवाद उनको छोडऩा चाहते हैं। देखना है कि यह नया विवाद आगे क्या रुख अख्तियार करता है।

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