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डिजाइनर पॉलिसी की प्रणेता

मेडिकल फीस, चॉपर और शराब पॉलिसी पर अंगुली मॉल की शराब दुकानों को छोड़ क्यों दिया?

वीक एंड टाइम्स ब्यूरो

देहरादून। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत एक ऐलान बार-बार करते हैं इन दिनों। हमारी सरकार भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेगी। जीरो टॉलरेन्स पर यकीन करते हैं। यह सब तब सवालों के दायरे में आ जाता है, जब उनकी नीतियां ही बहुत बड़ा अंतर्विरोध साबित होने लगती है। शराब हो चाहे, मेडिकल कॉलेज के लिए बनाई गई फीस नीति या फिर पहाड़ों में वायु सेवा को लेकर बनाई गई नीति। सभी पर उंगली उठ रही है। ऐसा लग रहा है कि उनकी सरकार डिजाइन कर रही नीतियां..? खास लोगों और कंपनियों के लिए। बवाल हुआ तो उन्होंने मेडिकल यूनिवर्सिटी को फीस तय करने का अधिकार देने वाला फैसला वापिस लेने का ऐलान किया जो मुश्किल लग रहा।
जो झलक रहा है। दिख रहा है। साबित हो रहा है। उसके बिना पर कहा जा सकता है कि शराब की नीति जिसको सरकारी जुबान में आबकारी नीति बोला जाता है। माफियाओं को ही पसंद आएगी। खास कर बड़े सिंडिकेट को। पहाड़ के छुटकु माफिया एकदम पस्त। उनकी मजाल जो अब नए सत्र में हिम्मत कर जाए। सोचने की भी। शराब की दुकान लेने की। सिंडीकेट के अलावा अब किसी के हाथ नहीं आएंगी। एक भी दुकान। पॉलिसी ही ऐसी बनी है। दया में एकाध दुकान सिंडीकेट खुद सौंप दे स्थानीय लोगों को तो बात अलग है। सरकार ने दुकानों का ग्रुप बनाने का फैसला किया। इससे अब किसी को भी एक साथ कई दुकानें लेनी होंगी। एकाध दुकान नहीं ले सकते। इतनी दुकानें लेने के लिए सौदे में पैसा भी कम से कम 20 करोड़ चाहिए। स्थानीय शराब कारोबारी ही कह रहे. इतना पैसा जुटाना उनके बूते में नहीं।
मुख्यमंत्री, आबकारी मंत्री प्रकाश पन्त या अपर मुख्य सचिव (शराब वाले) डॉ. रणवीर सिंह बता सकते हैं? आखिर मॉल में परदेसी शराब की दुकान क्यों? रोड साइड शराब की दुकानों की बिक्री पर नेगेटिव असर नहीं डाल रही ये? फिर उसी मॉल के डिपार्टमेंटल स्टोर में बिक रही शराब कैसे नुक्सान कर सकती? सरकार की नजरों में कर रही। सो स्टोर वालों को बांध डाला। साल में पांच करोड़ का सामान बेचो। शराब से इतर। वरना रास्ता नापो। पहले यह शून्य था? जीरो से सीधा पांच करोड़ ये दुकानें बंद होनी तय है।
फायदा किसको? मॉल की दुकान वालों को। कोई है जिनकी जिनकी चार दुकानें हैं मॉल में। तीन देहरादून में.एक हरिद्वार में..अब विदेशी शराब की दुनिया में उनकी हुकूमत तय है। सूत्रों के मुताबिक उनके साथ एक संयुक्त आयुक्त (आबकारी) का शेयर है। शराब पॉलिसी उसके लिए ही स्पेशली डिजाइन की गई। डॉ.रणवीर ने कहा कि अगर स्टोर वालों को दिक्कत है तो सरकार उनसे बात कर के उनकी समस्याओं पर गौर करेगी। आबकारी मंत्री पन्त ने भी कहा कि इसमें संशोधन कर सकते हैं। मेडिकल फीस के मुद्दे पर बवाल के बाद उसको वापिस लेने का ऐलान मुख्यमंत्री ने किया है जो फीस पांच लाख पूरी नहीं थी। वह अब 20 लाख हो गई है। जो सात लाख थी। वह 30 लाख हो गई। सरकार ने सिर्फ मेडिकल यूनिवर्सिटी वालों के हितों को ध्यान में रख कर डिजायनर पॉलिसी बना दी। मुख्यमंत्री का तर्क था कि मेडिकल कॉलेज बनाने में मोटा पैसा लगता है। इतना निवेश लाना हंसी-खेल नहीं। उनको प्रोतसाहित करने के लिए फीस तय करने का अधिकार उनको देना होगा.इस फेर में सरकार ने बच्चों के भविष्य को अँधेरा कर दिया।
इससे न सिर्फ राज्य के युवाओं और कमजोर तबके से डॉक्टर्स निकलने बंद हो जाएंगे, बल्कि राज्य की चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं और हिल जायेंगीं। बद्री-केदार धाम के लिए नई हेलीकाप्टर सेवा के टेंडर लिए जा रहे हैं। शर्तें गजब की है। तीन या उससे ज्यादा चॉपर होने चाहिए। उस कंपनी के पास.जो यहाँ काम करना चाहती हैं। जिसके पास इससे एक भी चॉपर कम होगा। वह टेंडर में एंटरटेन नहीं किया जाएगा। एकदम डिजाइनर पॉलिसी। शक जताया जा रहा है।? खास लोगों के लिए डिजाइन की गई है नीति। उनको मदद का आश्वासन दिया जा चुका है। जो तीन या इससे ज्यादा चॉपर लिए हुए हैं। छोटे चॉपर एंटरप्रेन्योर को इस नीति से गहरा झटका लगा है।

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