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यूपी में संगठन को मजबूत करने में जुटी कांग्रेस, आलाकमान की युवाओं पर नजर

  • पार्टी ने तेज की प्रदेश अध्यक्ष की तलाश, परंपरागत वोटों को लुभाने की करेगी कोशिश
  • बढ़ाया जा सकता है प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर का कद, लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटी पार्टी

 वीकएंड टाइम्स न्यूज नेटवर्क
लखनऊ। आगामी लोकसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में पार्टी संगठन को मजबूत करने की कोशिशें तेज कर दी हंै। इसके तहत यूपी के कांग्रेस कॉडर में काफी फेरबदल होंगे। पार्टी में युवाओं की भागीदारी पर विशेष फोकस किया जा रहा है। इसका संकेत पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस के पिछले दिनों दिल्ली में हुए महाधिवेशन में दिए भी थे। इसके अलावा कांग्रेस प्रदेश में अपना पुराना जनाधार पाने की कोशिश भी कर रही है। वह अपने परंपरागत वोट बैंक को लुभाने की कोशिश में जुट गई है। वहीं दूसरी ओर प्रदेश अध्यक्ष की तलाश तेज कर दी गई है। माना जा रहा है कि वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर का कद बढ़ाया जा सकता है।
लोकसभा उप चुनावों के नतीजों से मायूस कांग्रेस ने नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश तेज करते हुए संगठनात्मक बदलाव का मन बना लिया है। मिशन-2019 के मद्देनजर सामाजिक समीकरण साधने के लिए वह पिछड़े या ब्राह्मïण चेहरे पर दांव लगाने की तैयारी में है। वहीं प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर का ओहदा बढ़ाने के साथ उन्हें स्टार प्रचारक के तौर पर अन्य राज्यों में भी लगाया जा सकता है। दिल्ली अधिवेशन के बाद कांग्रेस के संगठन और कार्य प्रणाली में फेरबदल की यह कवायद शुरू की गई है। बुजुर्ग नेताओं के बदले युवाओं को बढ़ावा दिए जाने के साथ सामूहिक उत्तरदायित्व के आधार पर संगठन चलाने की तैयारी है। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस अपने पुराने वोटबैंक ब्राह्मïण और मुस्लिमों की पार्टी में वापसी पर ध्यान देगी। इसके अलावा कांग्रेस के दिग्गजों की नजर यहां के पिछड़े वर्ग के वोट बैंक पर भी लगी है। गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने ब्राह्मïण चेहरे पर दांव लगाने की रणनीति तैयार की थी लेकिन समाजवादी पार्टी से गठबंधन के बाद उसका यह चुनावी एक्शन प्लान पूरा नहीं हो सका था। उस समय कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पद के लिए शीला दीक्षित को उम्मीदवार के तौर पर प्रचारित किया गया था। चुनाव में भले ही ब्राह्मïण कार्ड का लाभ पार्टी को नहीं मिल पाया हो परंतु पार्टी का बड़ा धड़ा कांग्रेस की वापसी के लिए ब्राह्मïणों व मुस्लिमों को जोडऩा जरूरी मानता है।
पूर्व विधायक भूधर नारायण मिश्र का कहना है कि आम जनता यह मानती है कि कांग्रेस को मजबूत किए बगैर देश और प्रदेश में भाजपा को कमजोर नहीं किया जा सकता है। इसके लिए पार्टी के पुराने वोट बैंक की वापसी जरूरी है। इसके अलावा राहुल गांधी सॉफ्ट हिंदुत्व का भी कार्ड खेल रहे हैं। गुजरात में उनका यह दांव काफी सफल रहा है और यहां भाजपा को जीत के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी। यही दांव कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष चल रहे हैं। उन्होंने यहां मंदिरों की परिक्रमा की और लोगों से मिले भी। जाहिर है, आगामी लोकसभा चुनाव के दौरान राहुल उत्तर प्रदेश में भी यह कार्ड खेलेंगे।

प्रदेश अध्यक्ष के लिए कई नामों पर चर्चा

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद पर किसी युवा नेता को उतारने का मन बना चुकी है। पूर्व विधायक ललितेश पति त्रिपाठी व जितिन प्रसाद के नाम की चर्चा जोरों पर है। वहीं आरपीएन सिंह जैसे नेताओं की पैरवी हो रही है। बनारस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घेराबंदी करने के लिए ललितेश पति त्रिपाठी के साथ राजेश मिश्रा की दावेदारी भी मजबूत मानी जा रही है। दूसरी ओर पार्टी में अनुशासन बनाए रखने के लिए प्रदेश अध्यक्ष जैसे अहम पद पर अनुभवी व वरिष्ठ नेता को आसीन करने का दबाव भी है। कहा जा रहा है कि 2019 में गठबंधन की स्थिति आने पर किसी ऐसे नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए जो तालमेल बनाने में माहिर हो।

क्षेत्रों में बांटा जा सकता है संगठन

नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्तिके साथ ही संगठन को तीन अथवा चार क्षेत्रों में बांटने की तैयारी है। सूत्रों का कहना है कि चार प्रदेश उपाध्यक्षों को क्षेत्रीय प्रभारी बनाकर संगठन को सक्रिय किया जाएगा। युवा कांग्रेस व भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन को पहले चार क्षेत्रों में विभाजित किया जा चुका है। अब महिला कांग्रेस को भी इस फार्मूले पर सक्रिय करने की तैयारी है।

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