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मायावती को रिटर्न गिफ्ट देने की तैयारी में अखिलेश बसपा से दोस्ती की डोर मजबूत करने में जुटी सपा

  • राज्यसभा चुनाव में पराजित बसपा प्रत्याशी भीमराव अंबेडकर का नाम आगे कर सकती है सपा
  • पांच मई को विधान परिषद के 13 एमएलसी का खत्म हो रहा है कार्यकाल
  • सत्ता पक्ष और विपक्ष में सीटों के लिए संघर्ष के कम दिख रहे आसार

वीकएंड टाइम्स न्यूज नेटवर्क

लखनऊ। अब सपा की नजरें आगामी लोकसभा चुनाव पर लगी हंै। बसपा से गठबंधन कर सपा अपने मिशन को कामयाब करना चाहती है। बसपा से दोस्ती मजबूत करने के लिए सपा के राष्टï्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव बसपा प्रमुख मायावती को विधान परिषद चुनाव में गोरखपुर-फूलपुर उपचुनाव में मिली जीत का रिटर्न गिफ्ट दे सकते हैं। राज्यसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी भीमराव अंबेडकर को नहीं जिता पाने के कारण सपा ने अपनी नई रणनीति बनाई है। राज्यसभा में मिली शिकस्त पर मायावती ने कहा था कि अखिलेश को अपने प्रत्याशी को जिताने के बजाय बसपा प्रत्याशी को जिताने पर फोकस करना चाहिए था। जाहिर है सपा विधान परिषद चुनाव में मायावती की इस शिकायत को दूर करने का मन बना रही है।
मिशन 2019 के लिए बढ़ रही सपा-बसपा की दोस्ती और मजबूत हो सकती है। इसके लिए दोनों पार्टी के नेता रणनीति तैयार करने में जुटे हैं। सूत्रों के मुताबिक आगामी विधान परिषद चुनाव में अखिलेश गोरखपुर और फूलपुर उपचुाव का रिटर्न गिफ्ट दे सकते हैं। पार्टी से जुड़़े सूत्रों की मानें तो सपा एमएलसी के तौर पर भीमराव अंबेडकर का नाम आगे कर सकती है। भीमराव अंबेडकर बीते दिनों राज्यसभा चुनाव में भाजपा के 9वें उम्मीदवार से हार गए थे। अखिलेश तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें चुनाव नहीं जिता पाए थे। राज्यसभा चुनाव में मिली हार के बाद भाजपा नेताओं ने आरोप लगाने शुरू कर दिए थे कि अखिलेश मदद ले तो सकते हैं लेकिन दे नहीं सकते। हालांकि इसका जवाब मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दिया था। उन्होंने साफ कर दिया था कि वे अखिलेश से ज्यादा तजुर्बे वाली हैं। सपा-बसपा की दोस्ती से भाजपा बौखला गई है। लेकिन भविष्य में भी यह दोस्ती कायम रहेगी। हम भाजपा से मिलकर लड़ेंगे। दूसरी ओर अखिलेश ने भी संकेत दिए थे कि वह जल्द ही बसपा को रिटर्न गिफ्ट देंगे। ऐसे में वह बसपा प्रत्याशी का नाम विधान परिषद चुनाव के लिए आगे कर सकते हैं। गौरतलब है कि 5 मई को परिषद की 13 सीटों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। हालांकि, वोटों का जो समीकरण है उससे, सत्ता पक्ष और विपक्ष में संघर्ष के आसार कम हैं। विधान परिषद की 12 सीटें 5 मई को खाली हो रही हैं। सपा से बसपा में गए अंबिका चौधरी के इस्तीफे के कारण एक सीट पहले से ही खाली चल रही है। इसमें 7 सीटें सपा, 3 बसपा, 2 भाजपा और एक आरएलडी की है। इन 13 सीटों पर चुनाव की अधिसूचना जारी हो चुकी है। 26 अप्रैल को चुनाव होंगे।

हो सकती है क्र ास वोटिंग

विधान परिषद चुनाव में विधायकों के लिए राज्यसभा की तरह अपना वोट दिखाने की बाध्यता नहीं होती इसलिए यहां अपेक्षाकृ त अधिक क्रॉस वोटिंग होती हैं। फिलहाल 12वीं सीट जिताने भर के वोट न भाजपा के पास दिख रहे हैं और न ही तीसरी सीट जीतने का माद्दा विपक्ष में दिख रहा है। इसलिए परिषद में घमासान के बजाय निर्विरोध निर्वाचन होने के आसार ज्यादा हैं। हालांकि एक बार फिर साथियों को सहेजना आसान नहीं होगा। दूसरी ओर विपक्ष संयुक्त दावेदारी में ही कम से कम दो सीट जीतने में सफल हो पाएगा। बसपा प्रमुख मायावती ने जिस तरह राज्यसभा चुनाव में धन्यवाद के साथ ही अखिलेश को नसीहत दी है, उसे देखते हुए परिषद में सहयोग का वादा भी कसौटी पर होगा।

इनका खत्म हो रहा कार्यकाल

बसपा विजय प्रताप, सुनील कुमार चित्तौड़
पहले से खाली अंबिका चौधरी (सपा से बसपा में जाने के बाद इस्तीफा दे दिया था।)
रालोद चौधरी मुश्ताक
भाजपा महेंद्र कुमार सिंह, मोहसिन रजा।
सपा अखिलेश यादव , नरेश उत्तम, राजेंद्र चौधरी, मधु गुप्ता, रामसकल
गुर्जर, विजय यादव, उमर अली खान।

क्या है वोटों की गणित

विधानसभा की मौजूदा 402 सदस्य संख्या के अनुसार एमएलसी की एक सीट के लिए 29 वोटों की जरूरत होगी। इस हिसाब से भाजपा गठबंधन के खाते में 11 सीटें जानी तय हैं। इसके बाद उसके पास 5 वोट ही अतिरिक्त बचेंगे। बसपा के समर्थन से आसानी से सपा अपनी दो सीटें फिर वापस पा लेगी। अगर कांग्रेस का वोट भी जोड़ दिया जाए तो विपक्ष के पास कुल 71 वोट होंगे जो दो सीटों के लिए निर्धारित कोटे से 13 अधिक है।

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