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सियासत के बाजार में फिर दलित और दीन

  • बाबा साहेब की जयंती के बहाने दलितों पर डाले डोरे
  • प्रमोशन में आरक्षण का मुद्दा भी गरमाया
  • राम मंदिर मुद्दे को भाजपा फिर दे रही हवा
  • एससी-एसटी एक्ट में संशोधन पर विपक्ष  के निशाने पर भाजपा

संजय शर्मा

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सियासी दलों ने अपने-अपने दांव अभी से आजमाने शुरू कर दिए हैं। एक बार फिर दलित और दीन यानी धर्म का ट्रंप कार्ड खेलने की पूरी तैयारी हो रही है। उत्तर प्रदेश में बाबा साहेब की जयंती के बहाने भाजपा समेत सभी सियासी दलों ने दलितों को रिझाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। इसके अलावा भाजपा राममंदिर मुद्दे को भी हवा दे रही है। अपने इस दांव से भाजपा वोटों के धु्रवीकरण की कोशिश में जुटी है ताकि मोदी के विजय रथ को विपक्षी रोक न सकें। दूसरी ओर सपा, बसपा और कांग्रेस दलित उत्पीडऩ और एससी-एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल में किए गए संशोधन को लेकर भाजपा पर चौतरफा हमला कर रही है। प्रमोशन में आरक्षण का मुद्दा भी तेजी से गरमा रहा है। विपक्ष ने मंदिर निर्माण के मुद्दे पर भाजपा पर निशाना साधा है। विपक्ष का कहना है कि इसके जरिए भाजपा देश में सांप्रदायिकता का जहर फैला रही है और धर्म के नाम पर लोगों को बांटने का काम रही है। कुल मिलाकर केंद्र की कुर्सी तक पहुंचने के लिए भाजपा और विपक्ष दोनों ही पैंतरे बदल रहे हैं। सभी की निगाहें वोट बैंक की राजनीति पर लगी हैं।

यूपी का सियासी माहौल तेजी से बदल रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के खिलाफ दलित संगठनों के भारत बंद आंदोलन के बाद सभी दल चौकन्ने हो गए हैं। इस हिंसक आंदोलन ने कई राज्यों को अपनी चपेट में ले लिया था। इस आंदोलन में दस लोगों की मौत हुई और कई दर्जन घायल हो गए थे। उपद्रवियों के खिलाफ सरकार ने जैसे ही कार्रवाई शुरू की, विपक्ष ने दलित उत्पीडऩ के नाम पर भाजपा सरकार को घेरना शुरू कर दिया। बहराइच की भाजपा सांसद सावित्री बाई फूले ने संविधान बचाओ-आरक्षण बचाओ रैली कर भाजपा की सांस फूला दी। रही सही कसर राबर्ट्सगंज के सांसद छोटेलाल खरवार, इटावा के सांसद अशोक दोहरे और नगीना से सांसद यशवंत सिंह ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर दलित उत्पीडऩ पर अपनी चिंता जाहिर कर निकाल दी। सपा और बसपा इस मामले को जमकर उछाल रहे हैं। बसपा प्रमुख ने सुप्रीम कोर्ट के संशोधन को अध्यादेश के जरिए रोकने की मांग तक सरकार से की। साथ ही भाजपा पर दलितों के प्रति दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। दूसरी ओर कांग्रेस ने भी इस मामले पर भाजपा सरकार को घेरा और भाजपा को दलित विरोधी करार दिया। बताते चलें कि अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एससी-एसटी एक्ट में आरोप लगा देने मात्र से सीधी गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। एफआईआर लिखने के बाद संबंधित आरोपों की जांच डीएसपी रैंक का अधिकारी करेगा और इसकी रिपोर्ट तीन दिन में पेश करेगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी या नहीं होगी, इस पर फैसला लिया जाएगा। इस फैसले के विरोध को देखते हुए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की। कुल मिलाकर दलितों को लेकर विपक्षी हमले से भाजपा परेशान हो गई है। उसे यह डर सताने लगा है कि यदि दलित नाराज हो गए तो वह उत्तर प्रदेश में 2014 के लोकसभा चुनाव के परिणामों को नहीं दोहरा पाएगी। सपा-बसपा की दोस्ती से भी भाजपा परेशान है। ऐसे में वह दलितों को किसी भी रूप में नाराज करने के मूड में नहीं दिख रही है। सरकार ने साफ तौर पर कह दिया है कि वह दलितों के हितों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचने देगी। दलितों को खुश करने के लिए भाजपा ने बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर की जयंती पर पूरे देश में कार्यक्रम किए। यही नहीं केंद्र सरकार अब आंबेडकर से जुड़े स्थलों की लोगों को फ्री में यात्रा कराने की तैयारी कर रही है। भाजपा इसके जरिए कांग्रेस को घेरना चाहती है। वह दलितों को बताना चाहती है कि उसने चार सालों में आंबेडकर को जो सम्मान दिया है और जो काम किया है, वह कांग्रेस की पिछली सरकारों ने नहीं किया है। भाजपा की तैयारियों को देखते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती के माथे पर भी बल पड़ गए हैं। वह किसी कीमत पर अपने वोट बैंक में भाजपा द्वारा लगाए जा रहे सेंध को रोकना चाहती हैं। यही वजह है कि बसपा सुप्रीमो दलित उत्पीडऩ, एससी-एसटी एक्ट में संशोधन, प्रमोशन में आरक्षण और आंबेडकर की प्रतिमाओं के तोड़े जाने की घटनाओं को लेकर भाजपा पर लगातार हमला कर रही है। बसपा के दलित वोट बैंक में सेंध लगाकर ही भाजपा केंद्र की सत्ता तक पहुंची है। सपा भी बसपा से दोस्ती का हाथ बढ़ा चुकी है। वह भी दलितों के मामले में बसपा के सुर में सुर मिला रही है। सपा के राष्टï्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जानते हैं कि यदि पिछड़ा और दलित वोट एक साथ मिल गया तो उत्तर प्रदेश में भाजपा का रथ रोका जा सकता है। मुलायम सिंह यादव और कांशीराम ने मिलकर रामलहर के दौरान भाजपा का रथ रोक दिया था। भाजपा केवल दलित कार्ड पर ही काम नहीं कर रही है। वह अति पिछड़ा कार्ड भी खेलने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक यूपी में कुछ अति पिछड़़ी जातियों को एससी का दर्जा दिया जा सकता है। ऐसा कर भाजपा दलित-पिछड़ा गठबंधन को फंसाने की तैयारी कर रही है।
इसके अलावा भाजपा राम मंदिर मुद्दे को भी भुनाने की तैयारी कर रही है। इसके जरिए वह हिंदू वोटों के धु्रवीकरण की तैयारी कर रही है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में इस पर सुनवाई चल रही है। बावजूद इसके कोर्ट के बाहर बातचीत से हल निकालने का प्रयास किया जा रहा है। कई मुस्लिम संगठन भी भाजपा की इस मुहिम में साथ दे रहे हैं। दूसरी ओर सपा-बसपा, दलित-पिछड़ा और मुस्लिम गठबंधन मजबूत करने में जुटे हैं ताकि भाजपा को टक्कर दी जा सके। जाहिर है लोकसभा चुनाव में सभी दल दलित और दीन के ट्रंप कार्ड को चलकर अपनी नैया पार लगाने की जुगत में लगे हैं।

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