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पूर्वांचल को साधने

ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा का कहना है कि गोरखपुर, सीएम योगी आदित्यनाथ का गृह जनपद है। यहां के सांसद रहते हुए सीएम योगी गोरखनाथ मठ में जनता दरबार लगाते थे। यहां सुबह-शाम जनता की समस्यआों को सुनते और उसके निवारण का
उपाय करते थे। अब योगी यूपी के मुख्यमंत्री हैं। लिहाजा उनकी जिम्मेदारी पूरे सूबे की है।

वीकएंड टाइम्स न्यूज नेटवर्क

लखनऊ। मिशन 2019 के लिए भाजपा कोई कोर कसर नहीं छोडऩा चाहती है। लोकसभा उपचुनाव में भाजपा का गढ़ मानी जाने वाली गोरखपुर सीट पर मिली शिकस्त के बाद उत्तर प्रदेश में भाजपा सतर्क हो चुकी है। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहां पर फोकस कर रहे हैं। गोरखपुर को केंद्र बनाकर भाजपा पूरे पूर्वांचल को साधने में जुटी है। योगी सरकार ने यहां मिनी सीएमओ स्थापित करने को मंजूरी दे दी है। इसके जरिए प्रदेश सरकार न केवल गोरखपुर बल्कि पूर्वांचल की जनता से सीधे तौर पर जुड़ जाएगी। इसकी अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद मुख्यमंत्री इसकी गतिविधियों पर नजर रखेंगे।

यूपी की राजधानी लखनऊ से करीब 300 किलोमीटर दूर गोरखपुर में मुख्यमंत्री का दूसरा ऑफिस बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसे मिनी सीएमओ कहा जायेगा। लखनऊ में एनेक्सी के पंचम तल पर सीएम का दफ्तर है। इसी की तर्ज पर गोरखपुर में भी सीएम का एक दफ्तर बनेगा। इस दफ्तर में सीनियर अधिकारी बैठेंगे और सीधे लखनऊ के सीएम आफिस के सम्पर्क में रहेंगे। गोरखपुर में मिनी सीएमओ बनाने के पीछे सरकार का मकसद पूर्वांचल की जनता की समस्याओं की सुनवाई और उसका निस्तारण बेहतर तरीके से करना है। सीएम खुद मानते है कि कल तक जो जनता उन तक सीधे गोरखपुर में मिलकर अपनी समस्याएं रखती थी, अब उसका ऐसा करना मुमकिन नहीं है। यही नहीं गोरखपुर की जनता सीधे लखनऊ के सीएम दफ्तर भी नहीं पहुंच सकती है। गोरखपुर के मिनी सीएमओ में स्थानीय जनता अपनी समस्याओं को दर्ज करा सकती है और इन समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण भी हो सकता है।

मिनी सीएमओ सीधे लखनऊ में सीएम ऑफिस के तहत काम करेगा। ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा का कहना है कि गोरखपुर सीएम योगी आदित्यनाथ का गृह जनपद है। यहां के सांसद रहते हुए सीएम योगी गोरखनाथ मठ में जनता दरबार लगाते थे। यहां सुबह-शाम जनता की समस्यआों को सुनते और उसके निवारण का उपाय करते थे। अब योगी यूपी के मुख्यमंत्री हैं। लिहाजा उनकी जिम्मेदारी पूरे सूबे की है। बावजूद सीएम के लिए अभी भी गोरखपुर और पूर्वांचल की जनता और उनकी समस्याएं बड़ी हैं। लिहाजा यहां के लोगों की समस्याओं की सुनवाई और उसके निस्तारण के लिए मिनी सीएमओ बनाने का फैसला किया गया है। हालांकि इसके पीछे भाजपा पूर्वांचल में अपनी सियासी जमीन को और मजबूत करने की तैयारी कर रही है। गोरखपुर में मिली शिकस्त से भाजपा को बड़ा झटका लगा है। माना जा रहा है कि कार्यकर्ताओं के असंतोष और जनता की शिकायतों का निस्तारण नहीं होने के कारण गोरखपुर में भाजपा को शिकस्त झेलनी पड़ी। पूर्वांचल में यह स्थिति उत्पन्न न हो इसके लिए भाजपा ने अपनी सधी चालें चलनी शुरू कर दी है।

लोकसभा उपचुनाव में मिली हार के बाद सतर्क हुए पार्टी के दिग्गज

जनता की शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर प्रदेश सरकार दे रही है जोर

मिनी सीएमओ पर विपक्ष ने उठाया सवाल

गोरखपुर में मिनी सीएमओ बनाए जाने को लेकर सपा ने सवाल उठाए हैं। सपा एमएलसी सुनील साजन ने कहा कि वाराणसी में मिनी पीएमओ की तरह गोरखपुर में मिनी सीएमओ बनाकर सीएम योगी, प्रधानमंत्री की नकल कर रहे हैं। गोररखपुर को इतनी तरजीह क्यों दी जा रही है। क्या सिर्फ इसलिए कि वह सीएम का गृह जनपद है। यूपी में साढ़े सात मुख्यमंत्री है और वे अपना-अपना सीएमओ ऑफिस बनाएंगे।

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