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सुधरे नहीं… फिर करोड़ों का खेल

  • जिला आबकारी अधिकारी पर अंगुली
  • अधिकारियों के चहेतों को लाभ पहुँचाने की साजिश जारी
  • महज 5 घंटे में ऑनलाइन टेंडर खोल कर किया शराब की दुकानों का आवंटन
  • सामाजिक कार्यकर्ता विकेश नेगी ने किया पूरे मामले का खुलासा
  • 30 से 40 प्रतिशत कम रेट पर लूटा दी दुकानें

चेतन गुरुंग

देहरादून। आबकारी महकमे के कुछ उस्ताद किस्म के अफसरों का सुधरना मुमकिन नहीं लगता है। मुख्यमंत्री और आबकारी मंत्री की प्रतिष्ठा और सरकार की छवि जाए भाड़ में, उनकी बला से। ऐसा न होता तो वे लगातार सरकार को चूना लगाने और उसको गुमराह करते रहने तथा घपले करते रहने की साजिशें न रचते रहते। इस बार उन्होंने बची हुई दुकानों के आवंटन में जमकर घपला कर दिया। उन्होंने ऐसे साजिश रची कि दुकानें 45 फीसदी तक कम कीमत पर चढ़ानी पड़ीं। इतना ही नहीं अभी भी बची हुई दुकानों को वे 60 फीसदी से कम कीमत पर चढ़ाने की साजिश रचे हुए हैं। इससे बड़ा खेल और क्या हो सकता है कि दुकानों के आवंटन के लिए टेंडर सुबह निकाले और चंद घंटे बाद ही टेंडर खोल भी दिया जाए। ऐसा तो सिर्फ अपनों और चहेतों को दुकानें सौंपने के लिए ही किया जा सकता है।इसमें शक नहीं कि राज्य गठन के बाद से ही यह महकमा घोटालों का अड्डा बनकर रह गया है। इस महकमे के अधिकारी कब क्या कर दें किसी को कानों-कान खबर नहीं होती है। राज्य में सरकार किसी भी पार्टी की रही हो पर आबकारी महकमें में फैले भ्रष्टाचार पर कोई सरकार लगाम नहीं लगा पाई। इस साल तो एक के बाद एक कई घपले अफसरों ने किए, जिसके चलते सरकार की खूब किरकिरी हुई। कई रोल बैक करने पड़े। फर्जी बैंक गारंटी घोटाले से मामले खुलने लगे और अभी तक लगातार कुछ न कुछ मामले सामने आ रहे हैं। तीन जिला आबकारी अधिकारी (हरिद्वार-प्रशांत, देहरादून-मनोज उपाध्याय और चम्पावत-राजेन्द्र कुमार) मुअत्तल भी हुए और हाईकोर्ट से स्टे लेकर बहाल हुए।

इस बार भ्रष्टाचार का यह बड़ा खेल हुआ है आनलाइन टेंडर के नाम पर। गौरतलब है कि सरकार ने शराब माफियाओं और आबकारी अधिकारियों का गठजोड़ तोडऩे के लिए इस बार आनलाइन टेंडर की प्रक्रिया शुरू की है। सरकार की सोच भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की थी क्योंकि इससे पहले शराब माफियाओं और आबकारी अधिकारियों पर गठजोड़ कर सरकार को राजस्व के नुकसान पहुंचाने के आरोप लगते रहे हैं। इसीलिए सरकार ने इस बार पारदर्शी नीति अपनाने के लिए आनलाइन टेंडर प्रक्रिया शुरू की। आबकारी अधिकारियों ने इसका भी तोड़ तलाश लिया।

देहरादून की शराब की 09 दुकानों के लिए आबकारी विभाग ने विगत 15 मई को आनलाइन टेंडर आमंतित्र किए। इसमें 5 देशी शराब की दुकानें जिसमें रायवाला, सहसपुर, कुलडी, विकासनगर, हरबर्टपुर, शामिल थी। इसके अलावा विदेशी शराब की 04 दुकानें,, जिसमें रायवाला, चकराता, कोटी, पटेलनगर जीएमएस रोड शामिल थीं। विभाग ने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए 15 मई 2018 को राष्ट्रीय दैनिक अखबारों में इन दुकानों के लिए टेंडर निविदाएं आमंत्रित की। इसमें खास बात यह है कि निविदाओं को जमा करने की अंतिम तिथि भी उसी दिन यानि 15 मई को दोपहर 03 बजे और खोलने की तिथि भी इसी दिन यानि 15 मई को 04 बजे रखी गई और 04 बजे निविदायें खोल भी दी गई।

आज तक कोई भी टेंडर या निविदा महज पांच घंटे में नहीं खोली गईं। एक ही दिन में सारी प्रक्रिया पूरी कर दी गई। सामजिक कार्यकर्ता विकेश नेगी का आरोप है कि जिला आबकारी अधिकारी मनोज उपाध्याय ने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए यह सब खेल खेला। एक दैनिक अखबार में तो 15 मई 2018 को जो निविदा प्रक्रिया खत्म हो चुकी थी, वही टेंडर जस का तस 16 मई 2018 को प्रकाशित किया गया।

बकारी विभाग की इस हड़बड़ी और जल्दबाजी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस कदर अपनों को लाभ पहुंचाने के लिए काम किया जा रहा था। आरोप है कि जब 15 मई से लेकर 19 मई तक यह 09 दुकानें दैनिक आंवटन पर चल रही थी तो विभाग को एक ही दिन में पूरी टेंडर प्रक्रिया समाप्त करने की क्या जल्दी थी जबकि टेंडर प्रक्रिया के लिए कम 72 घंटे का समय तो दिया ही जा सकता था।

इन दुकानों के आवंटन में सरकार को करोड़ो के राजस्व का भी चूना लगाया गया। आबकारी विभाग के अधिकारियों की जल्दबाजी और चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए जो दुकानें 90 से 100 प्रतिशत दरों पर दी जा सकती थी विभाग ने महज 65 से 75 प्रतिशत पर उनका आंवटन कर दिया।

नेगी ने इसकी शिकायत आबकारी आयुक्त षणमुगम, आबकारी मंत्री प्रकाश पन्त और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को लिखित रूप से की है। मुख्यमंत्री के समाधान पोर्टल पर भी इसकी शिकायत की गई है। यह बात और है कि अभी तक इस पर कोई कार्रवाही नहीं की गई। नेगी के मुताबिक उन्होंने अधिकारियों से इस पर कार्रवाई का अनुरोध किया तो उन्होंने कहा जो तुम से हो सकता है वह कर लो, अब कुछ नहीं हो सकता है। उन्होंने आबकारी मंत्री और मुख्यमंत्री से मांग की है कि इन अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाही के साथ ही सभी 09 दुकानों का आंवटन निरस्त कर, नए सिरे से पूरी पारदर्शिता के साथ दुकानों का आंवटन किया जाये।

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