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फिर चटख होने लगा राम मंदिर निर्माण की सियासत का रंग

  • भाजपा दे रहे संवैधानिक दायरे की दुहाई, साधु-संत नाराज
  • प्रवीण तोगडिय़ा ने मंदिर निर्माण अभियान का किया ऐलान
  • लोकसभा चुनाव की आहट के साथ तेज होने लगी राजनीति

संजय शर्मा @WeekandTimes

लोकसभा चुनाव की आहट जैसे-जैसे करीब आती जा रही है राम मंदिर निर्माण को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। मंदिर निर्माण को अपने चुनावी एजेंडे में शामिल करने वाली भाजपा इसे दबे-ढके ढंग से हवा दे रही है। हालांकि खुले तौर पर वह संवैधानिक दायरे में मंदिर निर्माण की वकालत कर रही है। विहिप के पूर्व अंतरराष्टï्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तोगडिय़ा ने मंदिर निर्माण का संकल्प लिया है और भाजपा पर भगवान राम से विश्वासघात करने का आरोप लगाया है। वहीं अयोध्या के साधु-संत भाजपा के मंदिर राग से नाराज दिखने लगे हैं और अब किसी भी कीमत पर मंदिर निर्माण के लिए अडिग है। इस मामले पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साधु-संतों से धैर्य रखने और कोर्ट के फैसले का इंतजार करने को कहा है। कुल मिलाकर आने वाले दिनों में मंदिर निर्माण के सियासी रंग को चटख किया जाएगा।

… राम मंदिर निर्माण संघ और भाजपा का शुरू से एजेंडा रहा है। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में इस पर हर बार सियासत की जाती रही है। भाजपा चुनाव के दौरान कभी भी रामलला को नहीं भूलती है। मंदिर निर्माण का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। इन पर लगातार सुनवाई जारी है। ऐसे में भाजपा इस मामले पर बहुत सोच-समझकर बयानबाजी कर रही है। हालांकि उसके नेता गाहे-बगाहे मंदिर निर्माण का राग जरूर अलापते रहते हैं। इस नेताओं में उमा भारती का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। हालांकि कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई शुरू करने से पहले दोनों समुदायों-हिंदू और मुसलमानों से आपसी बातचीत से समाधान निकालने की अपील की थी। इस मामले पर शिया समुदाय के लोगों ने राममंदिर के पक्ष में विवादित जगह को छोडऩे का ऐलान भी कर दिया। यही नहीं श्री श्री रविशंकर ने भी इस मामले में दोनों पक्षों के बीच मध्यस्था करने की कोशिश की। लेकिन मामला हल नहीं हो सका और मजबूरन कोर्ट को सुनवाई करनी पड़ी।
इस लंबी और जटिल प्रक्रिया से अयोध्या के साधु और संत अब ऊबने लगे हैं और इसका हल जल्द से जल्द चाहते हैं। इस मामले पर अयोध्या के साधु-संतों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कई बार मुलाकात कर चुके हैं। लेकिन इस विवाद को तब और हवा मिल गई जब राम मंदिर न्यास के संत रामविलास वेदांती ने कहा कि अगर 2019 से पहले मंदिर निर्माण कार्य पर कोई फैसला नहीं किया जाता है तो उनके पास इसके लिए एक और विकल्प मौजूद है। जिस तरह से विवादित ढांचे को अचानक ध्वस्त कर दिया गया था, उसी तरह से मंदिर का निर्माण भी रातों-रात शुरू हो सकता है। मंदिर के निर्माण कार्य के बारे में बात करते हुए वेदांती ने बताया कि इस पूरी योजना तैयार की जा चुकी है। इस साथ ही इस योजना को उच्च स्तर पर हरी झंडी मिल गई है, लेकिन अब इस योजना को किस तरह से लागू किया जाएगा इस पर वेदांती ने कुछ भी खुलासा नहीं किया है। साधु-संत भी इस मामले पर सरकार द्वारा जल्द फैसला लेने का दबाव बना रहे हैं। साधु-संतों की नाराजगी दूर करने के लिए खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या गए। यहां उन्होंने साधु-संतों से मुलाकात की और कहा कि भगवान राम की कृपा से मंदिर जल्द बनेगा। हालांकि उन्होंने साधु-संतों को इस बाबत कोर्ट का फैसला आने तक धैर्य रखने की सलाह दी। इस मामले में विहिप के पूर्व अंतरराष्टï्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगडिय़ा भी कूद पड़े हैं। उन्होंने मंदिर निर्माण में देरी का ठीकरा भाजपा पर फोड़ा। उन्होंने कहा कि सरकार ने मंदिर बनाने का संकल्प लिया था। जनता से वादा किया था। मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने की बात की थी। यह बातें सरकार ने तब कहीं थी जब कोर्ट में मुकदमा चल रहा था। बावजूद आज तक मंदिर निर्माण नहीं किया जा सका है। भाजपा ने हिंदुओं और भगवान राम दोनों के साथ विश्वासघात किया है। यही नहीं उन्होंने कहा कि वे अयोध्या से राम मंदिर निर्माण का आंदोलन चलाएंगे। तोगडिय़ा के इस बयान ने राम मंदिर की सियासत को और गर्म कर दिया है। गौरतलब है कि 1991 में उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह के नेतृत्व में जब भाजपा की पहली बार सरकार बनी थी तब कल्याण सिंह अपने पूरे मंत्रिमंडल के साथ अयोध्या में ये शपथ लेकर आए थे कि वह उसी जगह राम मंदिर बनवाएंगे जहां राम पैदा हुए थे। बाबरी मस्जिद गिराए जाने के समय लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती, विनय कटियार समेत पार्टी के तमाम बड़े नेता थे जो बाबरी विध्वंस और राम मंदिर निर्माण के लिए उस वक्त अपील कर रहे थे। हालांकि बाबरी विध्वंस के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया लेकिन आए दिन भाजपा नेता इसे किसी न किसी तरह से उठाते रहते हैं। कुल मिलाकर भले ही भाजपा संवैधानिक दायरे पर मंदिर निर्माण की बात कह रही हो लेकिन वह साधु-संतों के कंधे पर राम मंदिर की सियासत करने की तैयारी अंदरखाने कर रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मंदिर निर्माण की यह सियासत क्या गुल खिलाती है।

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