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प्रदेश की जेलों में एड्स ने पसारे पांव

  • प्रारंभिक जांच में 459 कैदियों में मिला घातक वायरस
  • जेल प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे में मचा हडक़ंप 78,739 कैदियों की हुई थी जांच

वीक एंड टाइम्स न्यूज नेटवर्क
लखनऊ। प्रदेश की तमाम जेलों पर एड्स की काली छाया मंडराने लगी है। 78,739 कैैदियों के खून के नमूने की जांच में 459 बंदियों में एचआईवी की पुष्टिï हुई है। इसमें लखनऊ की जिला जेल में बंद बीस कैदी शामिल हैं। सभी कैदियों का इलाज केजीएमयू समेत प्रदेश के विभिन्न एआरटी सेंटर पर चल रहा है। वहीं इतनी अधिक संख्या में कैदियों के रोग की चपेट में आने से जेल प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे में हडक़ंप मच गया है।
भारत सरकार की ओर से जारी मीडिया स्कैन एंड वैरिफिकेशन सेल की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश की विभिन्न जेलों में 78,739 कैैदियों के ब्लड सैंपल लिये गये थे। जांच में पाया गया कि 559 कैदियों में एचआईवी का वायरल रि-एक्टिव पाया गया। हालांकि थ्री किट जांच में 459 कैदियों में ही एचआईवी पॉजिटिव की पुष्टिï हुई है। इन पीडि़तों में प्रदेश की राजधानी लखनऊ की मॉडल जेल और नारी सुधार गृह के 49 कैदी भी शामिल हैं। प्रदेश की अलीगढ़ जिला जेल में 24, मुरादाबाद में 33, इलाहाबाद के नैनी जेल में 21 और गाजियाबाद जिला जेल में 46 लोगों में एचआईवी की पुष्टि हुई है। इसके अलावा कानपुर और आगरा सहित अन्य जेलों के कैदियों में भी एचआईवी पॉजिटिव होने की पुष्टिï हुई है। उत्तर प्रदेश की जेलों में इतनी बड़ी संख्या मेें एचआईवी पीडि़तों के सामने आने से हरकत में आयी केन्द्र सरकार, प्रदेश की एड्स कंट्रोल सोसाइटी और स्वास्थ्य महकमे के उच्च पदस्थ अधिकारियों ने कमेटी गठित कर मामले की पड़ताल करने के आदेश दिये हैं। शासन के निर्देश पर राजधानी लखनऊ सहित विभिन्न जेलों में चिकित्सकों की टीमें भेजकर एड्स पीडि़त कैदियों की जांच व उनका विवरण एकत्रित करना शुरू कर दिया है। इस संबंध में जब यूपी स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी के एडिशनल प्रोजेक्ट निदेशक उमेश कुमार मिश्रा से संपर्क किया गया लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। विभागीय सूत्रों की मानें तो मीडिया स्कैन एंड वेरिफिकेसन सेल की रिपोर्ट के बाद सभी पीडि़तों की विशेष देखभाल व उपचार के लिये यूपी सैक की गाइड लाइन का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है।

गाइड लाइन से हो रहा इलाज

इस सबंध में लखनऊ जेल प्रशासन का कहना है कि सभी कैदियों का एचआईवी का इलाज सरकारी गाइडलाइन के अनुसार कराया जा रहा है, जिन मरीजों का इलाज जेल अस्पताल में संभव है उनका स्थानीय स्तर पर इलाज किया जा रहा है। वहीं जिन पीडि़तों का सीडी काउंट कम हो जाता है, उन्हें निर्धारित गाइड लाइन के अनुसार एआरटी सेंटर भेजा जाता है।

शासन ने शुरू की जांच

जेलों में इतनी बड़ी संख्या में एड्स पीडि़तों की संख्या सामने आने के बाद शासन और यूपी स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी सकते में हैं। बीते 11 जून को शासन ने इस मामले की पड़ताल के निर्देश दिये। इसके अलावा अब विभागीय जिम्मेदार कैदियों के एड्स की चपेट में आने के कारणों की पड़ताल कर रहे हैं।

केजीएमयू में लखनऊ की जिला जेल से आए बीस मरीजों में एचआईवी की पुष्टिï हुई है, जिनका इलाज एआरटी सेंटर में चल रहा है।
-डॉ. डी. हिमांशु, विभागाध्यक्ष,मेडिसिन विभाग

 

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