You Are Here: Home » उत्तराखंड » ड्रग्स के खिलाफ सख्ती अपनाएगी सरकार

ड्रग्स के खिलाफ सख्ती अपनाएगी सरकार

  • ड्रग्स इंस्पेक्टरों की कमी होगी दूर
  • 80 की दरकार चार उपलब्ध
  • महिला पुलिस में होगा इजाफा

वीक एंड टाइम्स ब्यूरो

बैठक के दौरान सचिव (स्वास्थ्य) नितेश झा ने जानकारी दी कि राज्य की स्थापना के समय मात्र 1500 मेडिकल स्टोर थे। जिनकी वर्तमान में संख्या 15000 तक पहुंच गई है। राज्य में 80 ड्रग्स इंस्पेक्टरों की आवश्यकता है। वर्तमान में मात्र चार ड्रग्स इंस्पेक्टर कार्यरत हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की दुर्गम पहाड़ी स्थिति को ध्यान में रखते हुए फार्मा उद्योग के लिए मशीनरी, कच्चा माल एवं पैकिंग के कारण दवाइयों की लागत बढऩे की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए फार्मा इकाइयों को माल भाड़े में अनुदान के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा।

देहरादून। उत्तराखंड भी बहुत तेजी से ड्रग्स की जद में आता जा रहा है। इसके कई मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। इसको देखते हुए सरकार ने राज्य में नशे के बढ़ते प्रचलन पर कड़ाई से नियन्त्रण करने का फैसला किया है। इसके लिए सबसे पहले ड्रग्स इंस्पेक्टर की कमी दूर की जाएगी। साथ ही महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए देहरादून की सेलाकुई चौकी को थाने में तब्दील किया जाएगा। साथ ही वहां पर महिला पुलिस कर्मियों की संख्या बढ़ाई जाएगी। फार्मा उद्योग की समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए फार्मा उद्यमियों तथा बायो डायवर्सिटी बोर्ड की बैठक जल्द आयोजित की जाएगी। राज्य में फार्मा उद्योग को उत्तर पूर्वी राज्यों के समान आयकर में छूट के लिए प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा जाएगा। फार्मा इकाईयों को परिवहन अनुदान (ट्रांसपोर्टेशन सब्सिडी) देने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री रावत ने युवाओं में नशे के बढ़ते प्रचलन पर गम्भीर चिन्ता व्यक्त करते हुए निर्देश दिए कि जल्द से जल्द दवाइयों की जांच व नशे के व्यापार करने वालों पर कड़े नियन्त्रण के लिए पर्याप्त संख्या में ड्रग्स इंस्पेक्टरों की व्यवस्था की जाए। बैठक के दौरान सचिव (स्वास्थ्य) नितेश झा ने जानकारी दी कि राज्य की स्थापना के समय मात्र 1500 मेडिकल स्टोर थे। जिनकी वर्तमान में संख्या 15000 तक पहुंच गई है। राज्य में 80 ड्रग्स इंस्पेक्टरों की आवश्यकता है। वर्तमान में मात्र चार ड्रग्स इन्सपेक्टर कार्यरत हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की दुर्गम पहाड़ी स्थिति को ध्यान में रखते हुए फार्मा उद्योग के लिए मशीनरी, कच्चा माल एवं पैकिंग के कारण दवाइयों की लागत बढऩे की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए फार्मा इकाईयों को माल भाड़े में अनुदान के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने सचिव (ऊर्जा) राधिका झा तथा ऊर्जा निगमों के अधिकारियों को फार्मा उद्योगों को अबाधित बिजली आपूर्ति पर विशेष ध्यान देने के भी निर्देश दिए। उन्होंने हरिद्वार में एक्सपोर्ट हब स्थापित करने की संभावनाओं पर प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी दिए।
त्रिवेन्द्र ने कहा कि निर्यात की जाने वाली दवाईयां अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरे इसके लिए अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की जाए। फार्मा उद्योग तथा बायो डायवर्सिटी बोर्ड के मध्य समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए बैठक आयोजित की जाए। देहरादून के सेलाकुई औद्योगिक क्षेत्र व फार्मासिटी होने के कारण यहां पर महिला श्रमिकों की संख्या बहुत अधिक हैं। सेलाकुई फार्मासिटी में महिला सुरक्षा के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ पुलिस अघीक्षक, देहरादून को निर्देश दिए कि सेलाकुई चौकी को थाने में तब्दील किया जाय.साथ ही थाने में पुलिस कर्मियों की संख्या बढ़ाई जाय।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दवा निर्यात बढ़ाने तथा अत्याधुनिक इकाईयों, प्रयोगशालाओं व अन्य सुविधाओं की स्थापना के लिए औद्योगिक भूमि की आवश्यकता देखते हुए अन्य ऐसे उद्योग या अस्पताल जिन्हें सरकार ने पूर्व में भूमि आवंटित की थी, परन्तु जिसका उपयोग पिछले 10 वर्ष से नहीं हुआ, उनकी सूचना एकत्र की जाए। बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, सचिव अमित सिंह नेगी, सिडकुल की एमडी सौजन्या, जिलाधिकारी एस मुरूगेशन,  वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक निवेदिता कुकरेती भी उपस्थित थे।

All Rights Reserved to Weekand Times . Website Developed by Prabhat Media Creations.