You Are Here: Home » Front Page » अविश्वास प्रस्ताव यानी 2018 का लांचिंग पैड

अविश्वास प्रस्ताव यानी 2018 का लांचिंग पैड

  • भाजपा ने मोदी बनाव विपक्षी गठवंधन को बनाया मुद्दा
  • विपक्ष ठंडी प्रतिक्रिया से कांग्रेस के बैनर तले एकजुटता पर संशय
  • कांग्रेस ने बतौर पीएम उम्मीदवार राहुल गांधी को उतारा मैदान में

संजय शर्मा @ WeekandTimes

केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव भले ही भारी अंतर से गिर गया हो लेकिन कांग्रेस और भाजपा ने इसका इस्तेमाल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए लॉन्चिंग पैड की तरह किया। कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी को बतौर पीएम उम्मीदवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने उतारा, वहीं भाजपा ने इसे मोदी बनाम विपक्षी गठबंधन का मुद्दा बनाकर जनता को संदेश देने की कोशिश की। चर्चा के दौरान कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर कई आरोप लगाए तो पीएम मोदी ने हर आरोपों का जवाब ही नहीं दिया बल्कि पलटवार भी किया। इस प्रस्ताव पर कुछ विपक्षी दलों ने ठंडी प्रतिक्रिया दी तो कुछ ने इसका बहिष्कार कर कांग्रेस के विपक्षी एकता के मंसूबे पर पानी फेरने का काम किया। भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने चर्चा में भाग नहीं लेकर भाजपा को नकारात्मक संदेश दिया। दूसरी ओर विपक्ष की गतिविधियों से यह संदेश गया कि भले ही कांग्रेस राहुल को पीएम पद का दावेदार मान रही हो लेकिन विपक्ष उनके नेतृत्व में एकजुट होने में दिलचस्पी नहीं ले रहा है।

…..लोकसभा चुनाव की आहट के साथ भाजपा और कांग्रेस समेत विपक्ष की खेमबंदी तेज हो गई है। नंबर गेम की हकीकत जानने के बावजूद विपक्ष द्वारा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना और सरकार द्वारा इसे तत्काल यूं ही नहीं स्वीकार किया गया था। दरअसल, दोनों ही चुनाव के पहले जनता से मुखातिब होने के लिए एक बड़े मंच की तलाश कर रहे थे। मोदी सरकार ने इस प्रस्ताव को इसलिए स्वीकार कर लिया था कि इसके जरिए वह अपनी उपलब्धियां गिना सकेगी जबकि कांग्रेस ने इस प्रस्ताव को इसलिए हवा दी ताकि पीएम मोदी के मुकाबले राहुल गांधी को लॉन्च किया जा सके। इसके अलावा वह इस मौके पर विपक्ष की एकजुटता की परीक्षा भी लेना चाहती थी। कांग्रेस का उत्साह अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान दिखा भी। हालांकि यह प्रस्ताव भाजपा की पूर्व सहयोगी रह चुकी पार्टी टीडीपी की ओर से लाया गया था। टीडीपी ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर राजग सरकार से अलग होने के बाद उसके खिलाफ यह प्रस्ताव पेश किया था। अविश्वास प्रस्ताव के दौरान राहुल आक्रामक मूड में दिखे और पहली बार उन्होंने सरकार पर सधे प्रहार किए। उन्होंने राफेल विमान डील को लेकर मोदी सरकार पर भ्रष्टïाचार के आरोप लगाए। इसके अलावा उन्होंने सरकार की विभिन्न मुद्दों पर नाकामियां गिनाईं। राहुल की आक्रामकता से कांग्रेसी गदगद हैं और इसे भविष्य के लिए शुभ शकुन मान रहे हैं। दूसरी ओर पीएम मोदी ने डेढ़ घंटे के अपने भाषण में कांग्रेस समेत विपक्ष दलों पर चुन-चुनकर हमला किया। उन्होंने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के तमाम आरोपों का आंकड़ों व तथ्यों से साथ जवाब दिया। पीएम मोदी ने मौके का पूरा फायदा उठाया और अपने चार साल की उपलब्धियां देशवासियों को बताईं। खुद पीएम ने इसे स्वीकार भी किया। मोदी ने कहा कि विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव लाकर मुझे सरकार की उपलब्धियों को बताने का अच्छा मौका दिया है। साथ ही देश को यह भी देखने को मिल रहा है कि कैसी नकारात्मकता है। कैसे विकास के प्रति विरोध का भाव है। कैसे नकारात्मक राजनीति ने कुछ लोगों को घेर कर रखा है। सबका चेहरा निखरकर कर बाहर आ गया है। उन्होंने सवाल किया, विपक्ष के पास बहुमत नहीं है फिर सदन में अविश्वास प्रस्ताव क्यों लाया गया और खुद जवाब देते हुए कहा कि यह प्रस्ताव इसलिए लाया गया ताकि विपक्ष अपने बिखरे कुनबे की परीक्षा ले सके। कांग्रेस ने देश में अस्थिरता फैलने के लिए अविश्वास प्रस्ताव का दुरुपयोग किया है। यही नहीं पीएम ने लोगों को यह भी संदेश दिया कि मोदी को येन-केन प्रकारेण हटाने के लिए विपक्ष बेमेल गठबंधन कर रहा है। एक दूसरे के धुर विरोधी दल अपने आदर्शों और विचारधारा को भूलकर उनके खिलाफ एकजुट हो गए हैं। साफ है पीएम मोदी ने एक चतुर राजनीतिज्ञ की तरह अविश्वास प्रस्ताव के मंच का बखूबी इस्तेमाल किया। हालांकि भाजपा को इस दौरान झटका भी लगा। इस चर्चा में भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने भाग नहीं लिया। इसने महाराष्टï्र में भाजपा के लिए खतरे की घंटी जरूर बजा दी है। दूसरी ओर उड़ीसा के बीजू जनता दल ने चर्चा के पहले सदन से वॉकऑउट कर दिया था जबकि तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी एआईएडीएमके ने सरकार के पक्ष में वोट किया। साफ है दोनों दलों के सकारात्मक सहयोग का लाभ भाजपा जरूर उठाएगी। लोकसभा चुनाव में भाजपा इन दोनों ही पार्टियों से गठबंधन कर सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली राजग सरकार के खिलाफ टीडीपी और कांग्रेस समेत विभिन्न विपक्षी दलों द्वारा लोकसभा में पेश किया गया अविश्वास प्रस्ताव 126 के मुकाबले 325 मतों से गिर गया। इस प्रस्ताव ने कांग्रेस के सामने विपक्षी एकजुटता की तस्वीर साफ कर दी है। कांग्रेस को यह बात समझ में आ चुकी कि क्षेत्रीय पार्टिंया कम से कम उसके बैनर तले एकजुट नहीं होने वाली है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी पहले ही राहुल गांधी के नेतृत्व को नकार चुकी है। उन्होंने राजनीति में राहुल को जूनियर बताया है। इसके अलावा सपा और बसपा भी राहुल के नेतृत्व पर कोई स्पष्टï रुख नहीं अपनाती दिख रही हंै। साफ है प्रस्ताव ने कांग्रेस को जहां जमीनी हकीकत दिखाई वहीं भाजपा को भी समझा दिया है कि वह विपक्ष को हल्के में लेने की कोशिश न करे। बावजूद दोनों पार्टियां अविश्वास प्रस्ताव को लॉन्चिंग पैड की तरह इस्तेमाल करने में बहुत हद तक सफल रही हैं।

All Rights Reserved to Weekand Times . Website Developed by Prabhat Media Creations.