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कुंभ है बहाना, हिंदुत्व पर निशाना

  • मिशन 2019 को हासिल करने के लिए भाजपा की जोर आजमाइश
  • राममंदिर निर्माण में देरी से नाराज संतों को भी मनाने की कोशिश
  • अमित शाह ने संभाली कमान, भव्य आयोजन से जनता को देंगे संदेश
  • गठबंधन की काट के लिए भाजपा बांटेगी विकास और हिदुत्व का मिक्चर

Sanjay Sharma @ WeekandTimes

लखनऊ। मिशन 2019 को हासिल करने के लिए भाजपा ने अभी से जोर आजमाइश शुरू कर दी है। यूपी में गठबंधन से मुकाबला करने के लिए भाजपा के दिग्गज विकास और हिंदुत्व का मिक्चर बांटने की तैयारी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां विकास कार्यों का डंका बजा रहे हैं वहीं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह हिंदुत्व का झंडा बुलंद करने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं दे रहे हैं। ऐसे में कुंभ जैसा आयोजन आम चुनाव से पहले हो तो फिर कहना ही क्या? शाह कुंभ की तैयारियों का जायजा लेने के बहाने संगम नगरी इलाहाबाद पहुंचे और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। भव्य तरीके से यमुना की आरती उतारी और साधु-संतों की संगत की। साधु-संतों को आश्वस्त किया कि कुंभ का आयोजन बेहद भव्य होगा और किसी भी प्रकार की मदद करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जाएगी। शाह ने राम मंदिर निर्माण में हो रही देरी से नाराज साधु-संतों को भी मनाने की कोशिश की। कुल मिलाकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और पीएम मोदी ने मिशन 2019 को हासिल करने के लिए विकास और हिंदुत्व की राह अभी से हमसार करनी शुरू कर दी है।

….. जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव करीब आता जा रहा है, भाजपा अपनी तैयारियों को धार देती जा रही है। भाजपा के लिए यूपी काफी लकी रहा है। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अपने सहयोगी अपना दल के साथ मिलकर यहां की 80 संसदीय सीटों में से 73 पर कब्जा किया था। इसमें अकेले 71 सीटें भाजपा की झोली में आयी थीं। इन्हीं सीटों के दम पर भाजपा ने केंद्र में अपने बूते सरकार बनायी थी। अब जब एक बार फिर लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने वाला है, भाजपा यहां मिशन 73 पर फोकस कर रही है। हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद यूपी की सियासत काफी बदल गई है। सपा-बसपा की दोस्ती हो चुकी है और कांग्रेस भी बसपा से अपनी पींगे बढ़ा रही है। ऐसे में भाजपा को यूपी में एक बड़े गठबंधन का सामना करना पड़ सकता है। लोकसभा उपचुनावों में गोरखपुर और फूलपुर संसदीय सीटों पर भाजपा को पटखनी देने के बाद सपा और बसपा के हौसले बुलंद है। मायावती यहां अपनी खोयी जमीन फिर से पाने की जद्दोजहद में लगी हैं वहीं सपा मुखिया अखिलेश यादव एक बार फिर भाजपा से दो-दो हाथ करने को तैयार हैं। यह स्थितियां भाजपा के दिग्गजों को चिंतित कर रही है। यही वजह है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जोड़ी एक बार फिर प्राण-प्रण से लोकसभा चुनाव में भाजपा का रथ को रोकने वाले विपक्षियों से भिडऩे को तैयार है। गठबंधन से सतर्क भाजपा फूंक-फूंककर और सधी चालें चल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूपी में लगातार रैलियां कर रहे हैं। वे पूर्वांचल को कई सौगातें दे चुके हैं। वे दो दिवसीय लखनऊ दौरे पर पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार सबका साथ, सबका विकास की बात कर रहे हैं। पीएम मोदी का पूरा फोकस विकास कार्यों और केंद्र सरकार की चार साल की उपलब्धियों पर है। दूसरी ओर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह हिंदुत्व को धार देने में जुटे हैं। शाह यह बात अच्छी तरह जानते है कि हिंदुत्व के जरिए वे वोटों का ध्रुवीकरण कर सकते हैं और गठबंधन को कड़ी टक्कर दे सकते हैं। यही वजह है कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले शाह की नजर इलाहाबाद में होने वाले कुंभ पर लगी है। शाह संगम नगरी पहुंचे और लेटे हनुमान मंदिर में जाकर विधिवत पूजा-अर्चना की। वे जूना अखाड़ा मौजगिरी भी गए और योग सिद्धि ध्यान केंद्र का शिलान्यास किया। इसके अलावा उन्होंने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी से मुलाकात की। ये वही नरेंद्र गिरी है जिन्होंने इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने और राम मंदिर निर्माण को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ से चर्चा की है। इसके अलावा शाह चार सालों में केंद्र सरकार के अपने वायदों को पूरा न कर पाने से नाराज संत समाज को मनाने की कोशिश भी कर रहे हैं। गंगा सफाई अभियान और राममन्दिर निर्माण में देरी को लेकर संत समाज कई बार खुलकर भाजपा पर निशाना साध चुका है। ऐसे में प्रयाग के बहाने धार्मिक संतुलन साधने की कोशिश अमित शाह कर रहे हैं। कुंभ के भव्य आयोजन की पूरी व्यवस्था की जा रही है। योगी कैबिनेट ने कुंभ से पहले इलाहाबाद में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के बाघंबरी मठ के साथ तीन अन्य अखाड़ों के लिए 5.19 करोड़ दिए जाने को मंजूरी दे दी है। अखाड़ों को निर्माण के लिए दी जाने वाली धनराशि की यह पहली किस्त है। इस रकम से अखाड़े श्रद्धालुओं के लिए आश्रय स्थल, संत निवास, ध्यान केंद्र व भंडारण केंद्र का निर्माण करेंगे। इसके अलावा सीएम योगी आदित्यनाथ देश के सभी गांवों को कुंभ में शामिल होने का निमंत्रण भेज रहे हैं। गौरतलब है कि संगम तट पर कुंभ 2019 का आयोजन 14 जनवरी से चार मार्च तक होगा। इस अवधि में 14 जनवरी को मकर संक्रांति, 21 फरवरी को पौष पूर्णिमा, चार फरवरी को मौनी अमावस्या, 10 फरवरी को बसंत पंचमी, 19 फरवरी को माघी पूर्णिमा व चार मार्च को महाशिवरात्रि मुख्य स्नान पर्व होंगे। इसी अवधि में तीन शाही स्नान मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या व बसंत पंचमी पर होंगे। महाशिवरात्रि स्नान के साथ ही कुंभ का समापन होगा। फिलहाल भाजपा की ये कोशिशें कितना रंग लाएंगी यह तो वक्त बताएगा लेकिन एक बात तय है कि आने वाले आम चुनाव में विकास और हिंदुत्व का मिक्चर जरूर दिखेगा।

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