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पाकिस्तान के चुनाव परिणाम और भारत

कश्मीर में मानवाधिकारों का हनन हो रहा है और भारतीय सेना कश्मीरियों को परेशान कर रही है। इमरान ने अपने भाषण में पाकिस्तान को आतंकी पनाहगाह बनने से रोकने की बात नहीं कही। साफ है सेना से संचालित इमरान खान से भारत को बहुत सोच-समझकर पींगे बढ़ानी होंगी वरना स्थितियां और भी ज्यादा भयावह हो सकती हैं। कुल मिलाकर पाकिस्तान से रिश्ते सुधरते नहीं दिख रहे हैं।

Sanjay Sharma

पाकिस्तान में चुनाव संपन्न हो चुके हैं। तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के प्रमुख और पूर्व क्रिकेटर इमरान खान का प्रधानमंत्री बनने जा रहे है। उनके शपथ ग्रहण की तैयारी की जा रही है। हालांकि इमरान की पार्टी को स्पष्टï बहुमत नहीं मिला है और वे अन्य दलों के सहयोग से ही सरकार बना पाएंगे। इमरान ने अपने पहले भाषण में भारत के प्रति अपना नजरिया काफी कुछ साफ कर दिया है और भविष्य में भी वे इससे इतर शायद ही जाएंगे। हालांकि उनके संबोधन में चुनाव के दौरान की तरह भारत और पीएम मोदी के प्रति तल्खी नहीं दिखी। उन्होंने कुशल राजनीतिज्ञ की तरह कूटनीतिक भाषा का प्रयोग किया। एक ओर इमरान ने चीन से अपनी दोस्ती का इजहार किया तो दूसरी ओर पूर्व पाक हुक्मरानों की तरह कश्मीर का राग भी अलापा। भारत से वार्ता और रिश्तों को सुधारने की बात की। इन सबके बीच अहम सवाल यह है कि पाकिस्तान में हुए इस सत्ता परिवर्तन का भारत पर क्या और कितना असर पड़ेगा? क्या दोनों देश एक बार फिर वार्ता की मेज पर आ सकेंगे? क्या आतंकवाद पर पाकिस्तान लगाम लगाएगा? क्या पाकिस्तानी सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई कश्मीर में आतंकियों को मदद नहीं पहुंचाएंगी? क्या इमरान खान के नेतृत्व में नए पाकिस्तान का जन्म होगा या वह भी सेना की कठपुतली साबित होंगे?
पाकिस्तान के भारत से रिश्ते कभी मधुर नहीं हो सके। दोनों देशों के बीच कई युद्ध हो चुके हैं। इन युद्धों में पाक को मुंह की खानी पड़ी। दोनों देशों के बीच कश्मीर सबसे बड़ा मुद्दा रहा है। पाकिस्तान कश्मीर पर कब्जा करना चाहता है। इसके लिए वह कश्मीर में अस्थिरता फैलाने की कोशिशें करता रहता है। वह कश्मीर में न केवल आतंकवादियों को भेजता है बल्कि यहां के अलगाववादियों को भी आर्थिक मदद मुहैया कराता है। हालिया चुनाव में इमरान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी ने भारत के खिलाफ खूब जहर उगला। पीएम मोदी के खिलाफ घटिया बयानबाजी की। कश्मीर का मुद्दा भी उछाला। अब जब इमरान प्रधानमंत्री बनने वाले हैं तो भारत को सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि इमरान को खुद पाकिस्तान में तालिबान इमरान के नाम से जाना जाता है। दुनिया में पाक में हुए चुनाव को सेना का सलेक्शन कहा जा रहा है। इमरान के कश्मीर पर दिए ताजा बयानों से साफ है कि वे सेना की स्क्रिप्ट पढ़ रहे थे। उन्होंने कहा कि कश्मीर में मानवाधिकारों का हनन हो रहा है और भारतीय सेना कश्मीरियों को परेशान कर रही है। इमरान ने अपने भाषण में पाकिस्तान को आतंकी पनाहगाह बनने से रोकने की बात नहीं कही। साफ है सेना से संचालित इमरान खान से भारत को बहुत सोच-समझकर पींगे बढ़ानी होंगी वरना स्थितियां और भी ज्यादा भयावह हो सकती हैं। कुल मिलाकर पाकिस्तान से रिश्ते सुधरते नहीं दिख रहे हैं।

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