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फालतू खोल दिए आईटीआई!

  • केन्द्रीय मंत्री धर्मेन्द्र ने किया कटाक्ष
  • न स्तर न कोई रोजगार मिल रहा युवाओं को
  • राज्य में कौशल विकास को सुनियोजित किया जाएगा

वीक एंड टाइम्स ब्यूरो

देहरादून। उत्तराखण्ड में नेताओं और मंत्रियों के दबाव में आईटीआई इतने खोल दिए गए हैं कि उनका कोई स्तर ही नहीं रह गया है। इतना ही नहीं वहां से न तो योग्य युवा निकल रहे हैं न ही उनको तरीके का रोजगार ही मिल पा रहा है। केन्द्रीय कौशल विकास और पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने देहरादून दौरे के दौरान साफ कहा कि जितना क्षेत्रफल और आबादी उत्तराखंड की है, उसके हिसाब से आईटीआई बहुत ज्यादा हैं और उनको बेहतर इस्तेमाल के लिए उद्योगों को सौंप देना बेहतर विकल्प होगा। इसको सरकार की नाकामी माना जाएगा कि जो आईटीआई कभी बिना जुगाड़ के किसी निजी उद्यमी को नहीं मिल पाते थे और लोग लाइन लगाकर इनको हासिल करने की कोशिश में खड़े रहते थे, उनकी इस कदर दुर्दशा हो गई है।
दरअसल, राज्य में आईटीआई की बड़ी तादाद होने की दो वजहें मानी जाती हैं। एक तो सांसद और विधायकों से लेकर मंत्री और छुटभैय्ये नेता तक आईटीआई को अपने इलाके में खुलवा के वाहवाही लूटना चाहते थे। फिर जब ये खुल जाते थे तो अफसरों के साथ मिल के आईटीआई के लिए उपकरणों की खरीद में कमीशन की हिस्सेदारी करने लग जाते थे। सरकार ने कभी आईटीआई की मांग को जायज और नाजायज के नजरिये से देखने की कोशिश ही नहीं की। इसका नतीजा ये हुआ कि कई आईटीआई महज खानापूरी के तौर पर चल रहे हैं। उनमें न शिक्षक हैं न बच्चे और न ही तरीके के ट्रेड, अलबत्ता, सरकार का बजट गैर जरूरी तौर पर खर्च हो रहा है। सबसे ज्यादा आईटीआई कांग्रेस राज में खुले और कई घपले भी तभी सामने आए। आईटीआई जब कम तादाद में हुआ करते थे, तो उनका स्तर बेहतर होता था। कई निजी औद्योगिक घराने इनको पीपीपी मोड में लेने के लिए सरकार के चक्कर लगाया करते थे। आज हालात ये हो गई है कि सरकार के चाहने पर भी निजी घराने पीपीपी में इनको संचालित करने आगे नहीं आ रहे हैं।
अब ये आईटीआई सरकार के लिए न सिर्फ बोझ जैसे बन गए हैं, बल्कि सिर दर्द भी साबित हो रहे हैं। यही वजह है कि जब कौशल विकास के केंद्रीय मंत्री प्रधान देहरादून आए तो साफगोई के साथ कह दिया कि उत्तराखण्ड में 176 सरकारी आईटीआई होना बहुत बड़ी तादाद है। वह परोक्ष तौर पर ये कह रहे थे कि इतनी तादाद की जरूरत राज्य को नहीं है। अब जब ये हो ही गए हैं तो इन आईटीआई का सदुपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उन्होंने सुझाव भी दिए कि इन आईटीआई का उद्योगों से टाईअप किया जाए और उन्हें आईटीआई गोद लेने के लिए प्रेरित किया जाए। केंद्र सरकार की इच्छा है कि उद्योग न केवल इन्हें अपग्रेड करें बल्कि वहां पडऩे वाले छात्र-छात्राओं को प्लेसमेंट भी दें। इसमें केंद्र सरकार अपनी तरफ से राज्य सरकार का पूरा सहयोग करेगी प्रधान ने सुझाव दिया कि उत्तराखण्ड में पर्यटन से जुड़े लोगों के दक्षता विकास पर विशेष ध्यान देना चाहिए। होटल,रेस्टोरेंट, वाहन चालक, गाईड, आदि के स्किलिंग व रि-स्किलिंग करने की आवश्यकता है। एक अध्ययन के अनुसार उत्तराखण्ड के लोग प्राईवेट नौकरी की अपेक्षा स्वरोजगार को पसंद करते हैं। केन्द्रीय मंत्री का मानना है कि सरकार को युवाओं की इस अपेक्षा को पूरा करने में सहायक की भूमिका निभानी चाहिए। अगले तीन वर्षों में युवाओं के स्किल डेवलपमेंट के लिए राज्य सरकार के एमएसएमई, विद्यालयी शिक्षा, उच्च शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट, पर्यटन विभाग मिलकर स्किल इको सिस्टम की कार्ययोजना बनाकर उस पर समयबद्ध तरीके से काम करें। केंद्र सरकार इसमें पूरा सहयोग करने के लिए तत्पर है। स्कूल स्तर से ही बच्चों को उनकी रूचि अनुसार कोई न कोई हुनर अवश्य सिखाया जाए। उन्होंने ये भी कहा कि राज्य में स्किल इको सिस्टम का फ्र ेम वर्क अगले दो माह में तैयार किया जाएगा। साथ ही राज्य में 15 से 59 आयु वर्ग के लगभग 40 लाख लोगों को रोजगार व स्वरोजगार के योग्य बनाने के लिए केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य सरकार कार्ययोजना बनाएगी। मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत और प्रधान ने उत्तराखण्ड में कौशल विकास की समीक्षा की। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में नेशनल हाईवे का काफी विस्तार हो रहा है। रोडसाइड गतिविधियों के रूप में अनेक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। युवाओं को रोजगार व स्वरोजगार के लायक बनाने के लिए उनके दक्षता विकास की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। स्किल्ड लोगों को मुद्रा लोन के माध्यम से पूंजी उपलब्ध करानी होगी।
मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि हमारा फोकस सेवा क्षेत्र पर है। उत्तराखण्ड में सेवा क्षेत्र में रोजगार व स्वरोजगार की बहुत सम्भावनाएं है। स्किल डेवलपमेंट की कार्ययोजना में सेवा क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2020 लक्ष्य निर्धारित किए हैं और उन लक्ष्यों की पूर्ति के लिए प्रतिबद्धता से काम कर रही है। प्रदेश में पलायन को थामने के लिए रोजगार पर सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसमें स्किल डेवलपमेंट बहुत महत्वपूर्ण है। हमने अनेक छोटी-छोटी पहलें की हैं। देवभोग प्रसाद योजना का सकारात्मक प्रतिफल मिल रहा है। महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से केदारनाथ व बद्रीनाथ में श्रद्धालुओं को लगभग 1.5 करोड़ रूपए के प्रसाद की बिक्री की गई है। यह प्रसाद चौलाई आदि स्थानीय उत्पादों से तैयार किया जाता है। इस वर्ष चार धाम यात्रा पर रिकार्ड संख्या में श्रद्धालु आए हैं। दूसरे क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में पर्यटक आए हैं। बैठक में उत्तराखण्ड के कैबिनेट मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत व उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ.धन सिंह रावत, केंद्र में एमएसडीई के सचिव डॉ. केपी कृष्णन, संयुक्त सचिव राजेश अग्रवाल, उत्तराखण्ड शासन में अपर मुख्य सचिव डा. रणवीर सिंह, प्रमुख सचिव मनीषा पंवार, सचिव डॉ.भूपिंदर कौर औलख, डा. पंकज कुमार पाण्डेय सहित अन्य अधिकारी
उपस्थित थे।

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