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बाकियों के लिए प्रेरणास्रोत बनें टॉपर्स

वीक एंड टाइम्स ब्यूरो

देहरादून। देहरादून के राजभवन में प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र के टॉपर्स जुटे। इस मौके पर राज्यपाल डा. कृष्णकांत पाल और इसरो के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एएस किरन कुमार ने उनको बाकियों के लिए प्रेरणास्रोत बनने को कहा। दोनों ने संयुक्त रूप से टॉपर्स कानक्लेव का उद्घाटन किया। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री अरविन्द पाण्डेय, उच्च शिक्षा मंत्री(राज्य) धन सिंह रावत तथा सभी राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपति भी उपस्थित थे। राज्यपाल डा. पाल ने प्रो. किरन कुमार का स्वागत करते हुए उनकी उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में ‘एकेडमिक एक्सीलेंस’ का वातावरण विकसित करना हैं। प्रदेश के छात्रों में तकनीकि विकास एवं आधुनिक ज्ञान के प्रति अभिरूचि को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि कान्क्लेव की कार्यवाही और व्याख्यानों को एक किताब के रूप में प्रकाशित कर कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों में भेजा जायेगा। शिक्षा व्यवस्था को भविष्योन्मुखी होने की जरुरत भी जताई। छात्र-छात्राओं को स्मार्ट कैम्पस के साथ-साथ स्मार्ट विलेज का ध्वजवाहक बनने को भी कहा.
मुख्य वक्ता प्रो.एएस किरन कुमार ने राष्ट्र निर्माण में वैज्ञानिक एवं तकनीकि शोध की भूमिका’’ विषय पर व्याख्यान देते हुए उपस्थित छात्र-छात्राओं को असफलताओं से सीख लेते रहने को कहा। उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अभियान के प्रारम्भिक दिनों की चुनौतियों के बारे में बताते हुए कहा कि शुरूआती असफलताओ के बावजूद दढ़ निश्चय एवं लगन के बूते भारत के वैज्ञानिकों ने अपना अलग मुकाम बनाया।
उन्होने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान में चन्द्रयान, मंगलयान तथा सैटेलाइट लॉन्च होने से भारत की प्रतिष्ठा मे वृद्वि हुई है। उन्होने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी का सर्वश्रेष्ठ उपयोग मानवता की भलाई के लिए किया जाना चाहिये। प्रो. किरन ने लर्निग, अनलर्निग और रि-लर्निग के बारे मे बताया। उन्होने कहा कि तकनीकि की दुनिया तेजी से बदलती रहती हैं। युवाओ को भी सदैव नया सीखने की प्रवृत्ति रखनी चाहिये। शिक्षामंत्री पाण्डेय ने उपस्थित छात्र-छात्राओ को चुनौतियों तथा संघर्षो के सामने हार न मानने की सीख दी। उच्चशिक्षा राज्य रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड के विश्वविद्यलयों में शैक्षणिक कैलेण्डर लागू कर दिया गया है। राज्य के कॉलेजों में 93 प्रतिशत फैकल्टी नियुक्त हैं। राज्य में शीघ्र ही देश का पहला ’’ज्ञान कुम्भ’’ आयोजित किया जायेगा। उत्तराखण्ड आवासीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एच एस धामी ने स्वागत भाषण दिया। यूकोस्ट के महानिदेशक डा. राजेन्द्र डोभाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम में सचिव राज्यपाल रविनाथ भी थे। कॉन्क्लेव के द्वितीय सत्र में उत्तराखण्ड आवासीय विश्वविद्यालय के कुलपति एचएस धामी की अध्यक्षता में हुआ। कुलपति, दून विश्वविद्यालय, सीएस नौटियाल ने कहा कि द्वितीय विश्वयुद्ध के समय भारत, जापान और चीन आर्थिक रूप से लगभग समान थे। परन्तु आज इनमें बहुत बड़ा गैप है। उन्होंने कहा कि हमें अभी स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बहुत कुछ करना है। उच्च शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा इन सभी पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्नात तकनीक का प्रयोग करके ही देश को समृद्ध बनाया सकता है। उन्होंने बताया कि दुनिया में जो इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन आया, वह कुछ आविष्कारों के बाद ही आया।
जब नये आविष्कार होंगे, तभी उत्पादन बढ़ेगा और समृद्धि आएगी। हमें देश का विकास करने के लिए अपनी उत्पादक क्षमता बढ़ानी होगी। नौटियाल ने प्रस्तुतिकरण के माध्यम से बताया कि पृथ्वी पर मानव विकास 4.5 (साढ़े चार) अरब साल पूर्व हुआ। पृथ्वी की शुरूआत से अब तक, मानव मात्र पिछले 52 हजार सालों से पृथ्वी में है। और मानव जाति का महत्वपूर्ण विकास मात्र पिछले 100-200 वर्षों में हुआ है। पलायन की समस्या से पूरी दुनिया जूझ रही है। गांव से शहरों की ओर पलायन पूरी दुनिया में हो रहा है। इसे रोकने के लिए दूरस्थ क्षेत्रों में भी विकास करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जापान में 80 प्रतिशत पर्वतीय क्षेत्र होने के बावजूद कृषि और पशुपालन से संबंधित उद्योगों के क्षेत्र में बहुत अच्छा कर रहा है।
उत्तराखण्ड के परिदृश्य में हम हर्बल प्रोडक्शन को बढ़ावा देकर राज्य व देश के विकास के लिए कार्य कर सकते हैं। उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि हम जो भी पढ़ रहे हैं उसे एक्सीलेंस के साथ पढ़े। पहले दिन के अंतिम सत्र में विभिन्न छात्र-छात्राओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उत्तराखण्ड ओपन यूनिवर्सिटी की छात्रा आरती ने कहा कि आज के युग में टेक्नौलाजिकल इनोवेशन की बहुत अधिक आवश्यकता है। डिजीटल इण्डिया को सपोर्ट किया जाना चाहिए। उत्तराखण्ड के दूरस्थ क्षेत्रों में संचार सुविधाएं उपलब्ध हों तभी यह संभव होगा।

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