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जांच पर बिफरे नौकरशाह 

  • एनएच-74 की एसआईटी जांच के पीछे धड़ेबाजी!
  • आर्बिट्रेशन की जांच को गलत करार दे रहा आईएएस एसोसिएशन  
  • फिलहाल, दबाव में नहीं दिख रहे त्रिवेंद्र
  • तीन और आईएएस के नाम सामने आने से ब?ी गर्मी 

चेतन गुरुंग @WeekandTimes

देहरादून। उत्तराखंड के तकरीबन पौन दो दशक से कुछ अधिक की उम्र में कई घोटालों ने जन्म लिया, लेकिन ऐसा पहली बार दिख रहा जब बड़े नौकरशाहों पर घोटालों की जांच की आंच आ गई है। पहले की सरकारों ने जांच आयोग तक बिठाए लेकिन करोड़ों का बोझ सरकारी खजाने में डालने के बाद भी घोटालों के एक भी मुजरिम को कम से कम आयोग तो दंड नहीं दिला सका। त्रिवेंद्र सरकार लगातार जीरो टालरेंस की दुहाई देती रही है। इसके कारण उस पर हर छोटे-बड़े घोटाले में की कार्रवाई करने का अतिरिक्त दबाव रहता रहा है। इस बार उसने हाथ डाला है सीधे उस एनएच-74 घोटाले पर, जिसमें छोटे ही नहीं बल्कि बड़ नौकरशाहों और सियासी उस्तादों के भी शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। सरकार का यह कदम सही साबित होगा या गलत, भविष्य बताएगा। अलबत्ता,नौकरशाहों में घोटाले की जाँच को ले कर जबरदस्त गुस्सा छाया हुआ है। वे जाँच का समर्थन कर रहे हैं लेकिन इसके दायरे में आर्बिट्रेशन का काम देखने वाले कलेक्टरों को भी शामिल करने और उनसे एसआईटी की पूछताछ ने उनको बिफरा डाला है। इसमें कोई शक नहीं है कि इस घोटाले ने जहां पूरे उत्तराखंड को हिला डाला है वहीं अफसरों के लिए परेशानी का सबब बन गया है ये घोटाला।

……आधा दर्जन से ज्यादा अफसर जेल में जा चुके हैं। अब एसआईटी ने आईएएस अफसरों पर निशाना साधा है। बस यहीं पर एसआईटी के लिए चुनौती कठिन होती जा रही है। मुख्यमंत्री के लिए भी आगे की चुनौती दुश्वारी भरी साबित होती दिख रही है। भले वह अभी दबाव में आते नहीं दिख रहे हैं। एसआईटी ने देहरादून पहुँच के आईएएस डॉ. पंकज पाण्डेय और चंद्रेश यादव से पूछताछ की। दल सिविल सर्विसेस इंस्टिट्यूट, जो राजपुर में पहाडिय़ों की खूबसूरत वादियों में है, में जा के इस काम को अंजाम दिया। उसने पूछताछ इस कदर खामोशी तथा गोपनीय तरीके से की कि मीडिया को भनक तक नहीं लगी। खुद दोनों नौकरशाहों ने एसआईटी को पूछताछ के लिए निश्चित तारीख से पांच दिन पहले देहरादून बुला लिया। ऐसा मीडिया की घेराबंदी से बचने और तय तिथि 18 अगस्त के दिन मीडिया के भी अलर्ट रहने की सम्भावना को देखते हुए किया गया। एसआईटी ने न सिर्फ दोनों अफसरों को प्रश्नावली दी बल्कि पूछताछ से सम्बंधित दस्तावेज देखने के लिए देने की पेशकश भी की। डॉ. पाण्डेय ने दस्तावेज देखे लेकिन यादव ने देखने से भी इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर उनको दस्तावेजों की जरुरत पड़ी तो वे खुद ही मांग लेंगे। एसआईटी के इस दल को महिला आईपीएस अफसर कमलेश उपाध्याय ने लीड किया। पूछताछ के घेरे में आए दोनों नौकरशाह उस वक्त उधमसिंह नगर के कलेक्टर थे, जब एनएच-74 के लिए जमीनों का मुआवजा बांटा जा रहा था। साथ ही उनकी पंचाट में

मामले आ भी रहे थे। दोनों ने सरकार को सिर्फ जवाब ही नहीं दिया है। चंद्रेश ने तीन और नौकरशाहों के लिए परेशानी पैदा कर दी है। उन्होंने कहा कि अगर पुरानी तारीखों पर भूमि की प्रकृति बदली गई है तो फिर उस अवधि (2013 से 2016) तक जो अफसर काशीपुर के एसडीएम थे या फिर परगनाधिकारी थे, उनसे पूछताछ की जानी चाहिए। उन्होंने इसका कारण भी बताया कि बैक डेटिंग से जुड़ी फाइल इन अफसरों के कब्जे में होती हैं। ये उनका ही दायित्व बनता है कि वे इन जरूरी दस्तावेजों को संभाल के रखे। चंद्रेश के कहने के मुताबिक अगर सरकार ने कदम उठा लिया तो घोटाले की जाँच में और गर्मी आना तय है। एसआईटी को तब जांच का दायरा बढ़ाना पड़ेगा। तीनों आईएएस अफसरों के साथ ही तीन ही एसडीएम भी जांच में पूछताछ के लिए एसआईटी के सम्मुख पेश होने को मजबूर होंगे। इनमें आशीष श्रीवास्तव, ईवा सहाय और विजय जोगदंड अभी युवा आईएएस हैं। अभी उनके बारे में कोई अवधारणा बनाना उचित नहीं होगा। चंद्रेश ने इन तीनों के नाम अपने जवाब में लिया है।

एनएच-74 जांच में चंद्रेश का जवाब ही नया कोण है। वैसे आईएएस एसोसिएशन के गुस्से में उबलने की वजह दो है। एक तो पाण्डेय और चंद्रेश के बतौर आर्बिट्रेटर दिए गए फैसलों को एसआईटी की जांच के दायरे में लाना है। दूसरा-आला आईएएस अफसर आर मीनाक्षी सुन्दरम के कार्यकाल के दौरान एमडीडीए का विशेष ऑडिट किया जाना है.ये भी कहा जा रहा है कि एक खास ब्रेकेट के अफसरों को सरकार निशाना बना रही है। आईएएस अफसरों ने मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश के दफ्तर में बैठक कर नाराजगी जताई कि एसआईटी को न्यायिक अफसरों के तौर पर दिए गए फैसलों की जांच करने का अधिकार दिया जाना उचित नहीं है। न ही ये उसकी परिधि में ही आता है। सरकार का ऐसा रुख नौकरशाहों को काम करने से वास्तव में रोकेगा। इसका नतीजा प्रदेश के विकास कार्यों को भुगतना पड़ेगा। कोई भी अफसर लचीला रुख नहीं अपनाएगा। बैठक में खुद ओम प्रकाश ने भी एसआईटी जांच पर असहमति जताई। साथ ही संघ के सचिव और प्रमुख सचिव (गृह) आनंदबर्धन ने भी इस परिपाटी को गलत करार दिया। बैठक में कुछ नौकरशाह नहीं आए। कुछ के बारे में ये आरोप भी उठे कि नौकरशाहों की एसआईटी जांच के पीछे वे ही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को गलत रिपोर्ट दे के माहौल इस तरह का बना दिया है।

अब ये देखने वाली बात होगी कि जिन नौकरशाहों पर अपनी ही बिरादरी को झटके देने के आरोप लग रहे हैं, वे आगे किस तरह का रुख अपनाते हैं। वे बिरादरी के साथ भविष्य में खड़े होते हैं या फिर मौजूदा अंदाज अपनाए रखते हैं। इस बीच ये मामला अब आईएएस बनाम आईपीएस कैडर भी होता दिखने लगा है। एसआईटी के मुखिया उधमसिंह नगर, जहाँ एनएच-74 प्रोजेक्ट बन रहा है, के एसएसपी हैं। उनको एक खास आईपीएस गुट से जोड़ के देखा जा रहा है। ऐसे में उस गुट का विरोधी आईपीएस गुट भी सक्रिय हो चुका है। वह आईएएस लॉबी के संपर्क में है। इस लड़ाई से आईपीएस को कोई नुक्सान होता है या नहीं ये नजर रखने वाला मामला है।

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