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…तो हाईटेक पुलिस भी करती है चोरी हसनगंज थाने से चोरी हो गए 100 कारतूस

  • दो वर्ष बाद कप्तान के घर पहुंचा हेड कांस्टेबल
  • पेंशन के पैसों से भरपाई करने की लगाई गुहार
  • गायब कारतूस का अब तक नहीं मिला कोई सुराग

WeekandTimes News Network
लखनऊ। थाने से दूर कहीं भी चोरी होने पर शक चोरों पर ही जाता है। पुलिस चोरों को पकडक़र मामले का पर्दाफाश करती है, लेकिन यदि थाने में चोरी हो जाए तो मामला मुश्किल होता है। राजधानी के हसनगंज थाने में 100 कारतूस चोरी होने का मामला सामने आया है। इसमें मालखाने में तैनात सिपाही के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है लेकिन अब तक कारतूस नहीं मिले हैं। इसलिए आरोपी सिपाही ने अपनी पेंशन के पैसों से कारतूस की रकम अदा करने के लिए एसएसपी से मिलकर गुहार लगाई है।
हसनगंज थाने में तत्कालीन मालखाने में तैनात सिपाही कन्हैया लाल के मुताबिक उसकी ड्यूटी के दौरान वर्ष 2015 में 100 कारतूस चोरी हो गए थे। इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस मामले की जांच करने लगी। लेकिन दो वर्ष बाद भी कारतूस बरामद नहीं हो पाये और न ही चोरी करने वाला पकड़ा गया। इस मामले में पुलिस फाइनल रिपोर्ट लगाने की तैयारी कर रही है। इसलिए कन्हैया लाल ने एसएसपी आवास पहुंचकर कप्तान से गुहार लगाई कि वह सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसलिए उनकी पेंशन से कारतूसों की कीमत काट ली जाए। कन्हैया का कहना है कि कारतूस उस समय गायब होते हैं जब कोई पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी से आता है और कोई अन्य कार्य होने के कारण कारतूस का मिलान नहीं हो पाता है। ऐसे में गौर करने वाली बात यह है कि यदि प्रदेश के सभी थानों में कारतूसों का मिलान कराया जाए तो मामला हजारों से ऊपर निकलेगा।

दो वर्ष बाद भी कारतूस बरामद नहीं हो पाये और न ही चोरी करने वाला पकड़ा गया। इस मामले में पुलिस फाइनल रिपोर्ट लगाने की तैयारी कर रही है।

चोरी के बजाय खोने का मुकदमा

हसनगंज थाने से 100 कारतूस चोरी हो गये लेकिन पीडि़तों के साथ गलत रवैया अपनाने वाली पुलिस अपने साथ भी वही करती है। थाने में मुकदमा कारतूस चोरी के बजाय खोने का लिखा हुआ है। सूत्रों की मानें तो कारतूसों के इस तरह गायब होने का खेल बहुत पुराना है। प्रदेश के कई थानों में इस तरह की घटनाएं हुई हैं। लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया जाता है। अधिकतर कारतूसों को बेच दिया जाता है। अपराधियों से मिलीभगत होन के कारण उनके पास तक ये कारतूस पहुंच जाते हैं। यही कारण है कि जब कहीं घटनाएं होती हैं तो पुलिस को वहां से प्रतिबंधित असलहों के साथ ही कारतूस भी मिलते हैं। इस मामले को गंभीरता से लेकर अधिकारियों को कार्रवाई करनी चाहिए।

बहुत कम है सरकारी कीमत

बाजारों में मौजूद लाइसेंसी दुकानों में कारतूसों की कीमत लगभग 30 रुपये से शुरू होकर 100 रुपये के करीब है। लेकिन सरकारी कारतूस की कीमत बहुत ही कम है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक सरकारी कारतूस की कीमत पांच रुपये से भी कम होती है। ऐसे में एक कारतूस बेचने में पचास रुपये से ऊपर का फायदा होता है। यदि 100 कारतूस गायब हो गए तो पांच हजार रुपये का फायदा हो जाता है।

 

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