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लापरवाही: दुर्घटनाओं को न्यौता दे रहे खुले मैनहोल, कहां खर्च हो रहा लाखों का बजट

  • कई हादसों के बाद भी सडक़ों के खुले मैनहोल में अभी तक नहीं लगाए गए ढक्कन
  • नहीं सुधर रहा जलकल महकमा, हादसों के लिए कौन होगा जिम्मेदार
  • हाईकोर्ट के आदेश को भी नजरअंदाज कर रहे अफसर

Weekandtimes News Network
लखनऊ। राजधानी में खुले मैनहोल और नालों में कई मासूम अपनी जिंदगियां गंवा चुके हैं। खुले मैनहोल ढकने के लिए हाईकोर्ट ने भी सख्त आदेश दे रखे हैं बावजूद इसके जलकल विभाग को शहर में खुले मैनहोल नहीं दिख रहे हैं। जलकल विभाग की ओर से खुले मैनहोल ढकने के नाम पर लाखों का बजट खर्च किया जाता है। ऐसे में शहर में जगह-जगह खुले मैनहोल जलकल विभाग में चल रहे भष्टाचार की पोल खोल रहे हैं।
बरसात के मौसम में खुले मैनहोल, नाले और धंस रही सडक़ों से लोगों को जान का खतरा बना रहता है। शहर के फैजुल्लागंज, निशातगंज, महानगर, अलीगंज, मडियांव, राजाजीपुरम, गोमती नगर, डालीगंज, आलमबाग, जानकीपुरम, जानकीपुरम विस्तार, इन्दिरा नगर समेत दर्जन भर से ज्यादा इलाकों में मैनहोल से ढक्कन गायब हैं। कहीं ढक्कन क्षतिग्रस्त हो गए हैं तो कहीं खुले और अधखुले मैनहोल हादसों को न्यौता दे रहे हैं। इन इलाकों की मुख्य सडक़ों पर खुले मैनहोल देखे जा सकते है। आम जनता अक्सर ऐसे मैनहोल में गिरकर चोटिल होती रहती है। कई बार इसमें गिरकर लोगों की मौत भी हो जाती है। ऐसे तमाम मामले पिछले कुछ सालों में सामने आ चुके हैं, लेकिन खुले मैनहोल को लेकर अफसर सजग नहीं दिख रहे हैं। तमाम शिकायतों के बावजूद इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। न ही अफसर ऐसे हादसों पर ध्यान दे रहे हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ महीनों में शहर में खुले मैनहोलों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। यह हाल शहर की मुख्य सडक़ों का है, ऐसे में गली मोहल्लों की क्या स्थिति होगी इसका आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है।

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