You Are Here: Home » Front Page » झान्पू वीडियो गीत पर बवाल

झान्पू वीडियो गीत पर बवाल

  • त्रिवेंद्र पर एक और हमला 
  • मुख्यमंत्री की मीडिया टीम पर उठ रही अंगुली
  • उत्तराखंड को बदनाम करने वाले कौन

चेतन गुरुंग @Weekandtimes

देहरादून। उत्तराखंड के यशस्वी लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी ने सवा दशक पहले नौछमी नारेणा गाने से उस वक्त की नारायण दत्त तिवारी की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार को हिला कर रख दिया था। राज्य के सूचना महकमा में अधिकारी की नौकरी छोडक़र सरकार का नेगी ने इस गाने से अच्छा-खासा बाजा बजा डाला था। उन्होंने गाने के जरिये सरकार पर तगड़ा प्रहार किया था। गाने में मुख्य फोकस भ्रष्टाचार और सैकड़ों कांग्रेसियों को सरकारी कुर्सी इफरात में बांटकर करोड़ों का चूना सरकारी खजाने को लगाने पर था। इस कटाक्ष भरे गाने ने जहां नेगी को खूब लोकप्रियता प्रदान की वहीं तिवारी सरकार को सवालों के दायरे में ले लिया था। ये बात अलग है कि इस गाने के सुपर हिट होने के बावजूद तिवारी को कोई फर्क नहीं पड़ा। उन्होंने सरकार के आखिरी दिनों तक भी लाल बत्तियां खूब बांटी। नेगी अब वैसी आक्रामक और धारदार गानों से खुद को दूर रख रहे हैं लेकिन टिहरी के अनजान और गुमनाम पवन सेमवाल ने झान्पू गीत क्या गाया, हंगामा बरपा हो गया। इस स्तरहीन फिल्मांकन और मेकिंग वाले गीत में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पर निजी हमला ज्यादा है, सरकार पर कम, छायांकन ऐसे हुआ है मानो उत्तराखंड गैंग रेप और भ्रष्टाचार की धरती बन गई है। हैरानी की बात यह है कि इस मामले में भी मुख्यमंत्री की अपनी मीडिया टीम सिवाय किंकर्तव्यविमूढ़ दिखने के कुछ नहीं कर पाई। त्रिवेंद्र पर जितने भी हमले हो रहे हैं, उनकी टीम सिवाय दर्शक बनने के कुछ नहीं कर पाई है। अलबत्ता, सियासत की दुनिया में झान्पू गीत को त्रिवेंद्र के खिलाफ साजिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। इसको सरकार के कामकाज पर कटाक्ष से ज्यादा त्रिवेंद्र पर निजी और राजनीतिक हमले के तौर पर देखा जा रहा है।

…..सेमवाल ने शुरू में झान्पू गीत से प्रचार और वाहवाही बेशक बटोरी। फिर जल्दी ही लोगों को ये भी लगने लगा कि सरकार के खिलाफ वीडियो गीत निकालना ठीक है, लेकिन जिस तरह से राज्य को इसमें पेश किया गया है, वह देवभूमि को सिर्फ दुनिया भर में बदनामी ही देगा। झान्पू कहा जाना भी ज्यादातर को चुभा। इसके बाद सोशल मीडिया में गीत के पक्षकार और विरोधी आपस में भिडऩे लगे हैं। हिमायतियों की दलील है कि गाने में कुछ भी गलत नहीं है। जैसा हो रहा है, वैसा बताया गया है। विरोधियों का कहना है कि घर के झगड़ को गाने गा के दुनिया के सामने यूं पेश कर देवभूमि को बदनाम करना कहीं से उचित नहीं है। ये सिर्फ सस्ती और तुरन्त लोकप्रियता बटोरने की कोशिश है। गाने में किसी समाजसेवी रोशन रतूड़ी का भी तस्वीरों के साथ जिक्र किया गया है। उसकी जम के तारीफ की गई है। इसके चलते रतूड़ी पर भी अंगुली उठाई जा रही है कि वीडियो अल्बम उसने ही बनवाई है। मामले के तूल पकडऩे के बाद रतूड़ी को सामने आना पड़ा। रतूड़ी दुबई में रहते हैं।
बताया जाता है कि वह वहां काफी समाज सेवा करते हैं। खास तौर पर उत्तराखंड के लोगों की वहां मदद करते हैं। रतूड़ी ने वीडियो सन्देश के जरिये हालांकि सफाई दी कि उनका इस अल्बम से कोई मतलब नहीं है। उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल भी गलत किया गया है। खुद गायक पवन ने भी वीडियो सन्देश जारी कर माफी मांग ली कि उनसे गलती हो गई। उन्होंने मुख्यमंत्री पर कोई निशाना नहीं साधा है। उनके गाने में मुख्यमंत्री का जिक्र नहीं है। उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल भी गलत हुआ है। वह ये बता पाए कि आखिर किसने अलबम बनवाया और किसके कहने पर रोशन का यशगान हुआ और मुख्यमंत्री पर अंगुली उठाई गई। उन्होंने गाने में त्रिवेंद्र की तस्वीर का इस्तेमाल किया। लिहाजा उनकी ये सफाई मायने नहीं रखती कि गाने से त्रिवेंद्र का दूर-दूर तक वास्ता नहीं है। भीतारखाने ऐसा कहा जा रहा है कि बीजेपी के ही कुछ लोगों ने इस तरह के अल्बम को बनवाया। जिससे त्रिवेंद्र विवादों में बने रहे। साथ ही लोगों और पार्टी हाई कमान के सामने नाकाम मुख्यमंत्री के तौर पर स्थापित हो जाएं.फिर किसी और को कुर्सीनशीं होने का मौका मिले।
समझा जा रहा है कि उनकी कोशिश लोकसभा चुनाव से पहले त्रिवेंद्र को विवादों में डाल के और उनका प्रचार कर त्रिवेंद्र को हटाने का दबाव हाई कमान पर बनाया जाए। ये बात अलग है कि त्रिवेंद्र शीर्ष स्तर पर बहुत मजबूत समझे जाते हैं। उनको पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की पसंद पर मुख्यमंत्री बनाया गया है। शाह कभी नहीं चाहेंगे कि त्रिवेंद्र को बीच में हटा के अपनी ही छीछालेदर कराए कि उनमें मुख्यमंत्री के चयन का गुण नहीं है। सूत्रों के मुताबिक झान्पू गीत त्रिवेंद्र के विरोधियों की चाल या साजिश का हिस्सा है। हमेशा की तरह मुख्यमंत्री का मीडिया तंत्र उनके बचाव में अपनी भूमिका तरीके से नहीं निभा पाया। इसका नतीजा ये हुआ कि न्यूज चैनलों और अखबारों ने इस गीत को खूब तरजीह दी। सोशल मीडिया ने तो नाक में दम ही कर दिया। मुख्यमंत्री ने इस गीत पर सिर्फ इतना ही कह कर विराम दिया कि जिसका जो काम है वह कर रहा है। इससे पहले महिला शिक्षिका के साथ मुख्यमंत्री की झड़प भी जम कर मीडिया में छाई रही थी।
कहा तो ये जा रहा है कि त्रिवेंद्र के लिए मीडिया अगर संकट का सबब बना है तो सिर्फ उनके ही निजी मीडिया टीम के कारण जिनके कुछ सुल्तानों का बर्ताव बेहद अहंकारपूर्ण ही नहीं है बल्कि उनमें मीडिया से रिश्ते रखने वाली परिपक्वता का अभाव भी है। इसके कारण मीडिया का निशाना मुख्यमंत्री बन रहे हैं। पिछले सूचना महानिदेशक डॉ.पंकज पाण्डेय को मीडिया में सरकार के खिलाफ खबरों को न रोक पाने के लिए हटाया गया था लेकिन खेल खराब खुद मुख्यमंत्री की मीडिया टीम ने किया था।

All Rights Reserved to Weekand Times . Website Developed by Prabhat Media Creations.