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चर्चों के अमानवीय चेहरे उजागर…

जर्मनी के दो मीडिया संस्थानों स्पीजेल ऑनलाइन और डाई जेत ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि जर्मन कैथोलिक चर्च में 1946 से 2014 के बीच यौन शोषण के 3677 मामले सामने आये। रिपोर्ट के मुताबिक, आधे से अधिक पीडि़त 13 साल से या इससे कम उम्र के हैं और ज्यादातर लडक़े हैं। दोनों साप्ताहिक ने बताया है कि हर छठा मामला बलात्कार का है और कम से कम 1670 धर्मगुरु इसमें शमिल थे।

नीरज कुमार दुबे

पादरियों के यौन दुव्र्यवहार के मामले सिर्फ भारत में ही बढ़ रहे हों, ऐसी बात नहीं है। दुनिया भर से इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं जिसमें पादरी यौन शोषण में लिप्त पाये जा रहे हैं। शायद इसी बात से पोप फ्रांसिस भी चिंतित हैं और उन्होंने दुनियाभर के सभी बिशप्स के अध्यक्षों को अगले साल फरवरी में होने वाले सम्मेलन में तलब किया है। इस सम्मेलन में पादरियों के यौन दुव्र्यवहार और बच्चों की सुरक्षा पर चर्चा होगी। पोप के इस कदम को लेकर कहा जा रहा है कि उन्हें यह महसूस हुआ है कि यह अनैतिक आचरण वैश्विक स्तर पर हो रहा है और अगर इस पर कार्रवाई नहीं की गई तो यह उनकी विरासत को कमतर करेगा।
अमेरिका के कैथोलिक चर्च के नेताओं की छवि को दशकों से चर्च में चल रहे यौन अपराध के आरोपों और उसे ढंकने की कोशिश के हालिया प्रकरण से धक्का लगा है। ऐसे ही मामले विभिन्न देशों में लगातार सामने आ रहे हैं। यही नहीं भारत में भी जिस तरह एक हालिया मामले में नन की ओर से पादरी पर बलात्कार का आरोप लगाया गया है और इस मामले में वेटिकन से मदद की गुहार लगायी गयी है उसने ईसाई समुदाय के इन धार्मिक नेताओं की छवि पर गहरा धब्बा लगाया है। आरोप सिर्फ पादरियों तक ही सीमित नहीं हैं, अमेरिका में आर्चबिशप कार्लो मारिया विगानो ने पिछले माह यह कहकर सनसनी मचा दी थी कि पोप फ्रांसिस ने अमेरिकी कार्डिनल टी मैककैरिक के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों की व्यक्तिगत तौर पर पांच वर्षों तक अनदेखी की। इसी के साथ विगानो ने पोप से पद से हटने की भी मांग कर डाली। उल्लेखनीय है कि विगानो वॉशिंगटन में वैटिकन के राजदूत रह चुके हैं। यही नहीं, जर्मनी के दो मीडिया संस्थानों स्पीजेल ऑनलाइन और डाई जेत ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि जर्मन कैथोलिक चर्च में 1946 से 2014 के बीच यौन शोषण के 3677 मामले सामने आये। रिपोर्ट के मुताबिक, आधे से अधिक पीडि़त 13 साल से या इससे कम उम्र के हैं और ज्यादातर लडक़े हैं। दोनों साप्ताहिक ने बताया है कि हर छठा मामला बलात्कार का है और कम से कम 1670 धर्मगुरु इसमें शमिल थे। सिर्फ जर्मनी की ही रिपोर्ट से मत चौंकिये, जरा भारतीय मामलों पर गौर करिये।
जालंधर के बिशप फ्रैंको मुलक्कल पर एक नन ने बलात्कार का आरोप लगाया है और यह किसी ईसाई धर्मगुरु पर लगा यौन शोषण का पहला आरोप नहीं है। मुलक्कल पर वर्ष 2014 से 2016 के बीच कई बार बलात्कार करने के आरोप लगाये गये हैं। लेकिन शर्म की बात है कि केरल के एक विधायक बिशप के पक्ष में आ गये और ईसाई धर्मगुरुओं ने भी चुप्पी साधी हुई है। एक असहाय नन आज मदद के लिए वेटिकन से गुहार लगा रही है क्योंकि उसे अपने देश के धर्मगुरु न्याय नहीं दिला पा रहे हैं। यह वही धर्मगुरु हैं जोकि अकसर चुनावों के समय चिटिठ्यां जारी करके लोकतंत्र को बचाने के लिए सांप्रदायिक ताकतों को हराने की अपीलें धड़ल्ले से जारी करते हैं। रोमन कैथलिक पादरी पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली नन ने भारत में वेटिकन के प्रतिनिधि को अर्जी देकर आरोप लगाया है कि आरोपी पादरी मामले को दफनाने के लिए ‘‘राजनीतिक ताकत और धन बल’’ का इस्तेमाल कर रहा है। तत्काल दखल देने की गुहार लगाते हुए नन ने अपने पत्र में पादरी के खिलाफ आरोपों के साथ सामने आने से पहले की अपनी चुप्पी पर सफाई देने की भी कोशिश की और कहा कि उसमें ‘‘काफी डर और शर्म’’ थी और सवाल किया कि चर्च ‘‘सच्चाई की तरफ अपनी आंखें क्यों मूंद रहा है?’’ अपनी आपबीती में नन ने लिखा है कि क्या चर्च उन्हें वह लौटा सकता है जो उन्होंने खोया है। चर्च की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए नन ने पत्र में बताया है कि कब-कब उन्हें शिकार बनाया गया। वेटिकन के ‘एपोस्टोलिक ननसियो’ (एक राजयनिक मिशन) जियामबटिस्ता डीक्वात्रो को लिखे गए पत्र में पादरी फ्रैंकों मुलक्कल पर 2014 और 2016 के बीच बलात्कार और अप्राकृतिक यौनाचार का आरोप लगाने वाली नन ने कहा कि उसने इंसाफ के लिए चर्च के अधिकारियों का रुख किया है। नन ने वेटिकन से गुहार लगाते हुए कहा है कि भारत में ‘होली सी’ के प्रतिनिधि के नाते आपसे इस मामले में तत्काल दखल की गुहार लगा रही हूं। आठ सितंबर को लिखे गए इस पत्र की प्रतियां कैथलिक बिशप कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया के अध्यक्ष कार्डिनल ओस्वाल्ड ग्रासियास और दिल्ली मेट्रोपॉलिटन के आर्चबिशप अनिल कूटो सहित 21 अन्य को भेजी गई हैं। पंजाब के जालंधर डायोसीज के पादरी फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन बढऩे और इस मामले के तूल पकडऩे पर अब केरल सरकार के वरिष्ठ मंत्री ई.पी. जयराजन ने मामले को दबाने की कोशिश के आरोपों को खारिज कर दिया है और इस बात पर जोर दिया कि जांच ‘‘सही दिशा’’ में बढ़ रही है। मंत्री ने यह भी कहा कि पादरी के खिलाफ कार्रवाई करने में सरकार पर कोई दबाव नहीं है। हालांकि केरल सरकार ने इस मामले में कैसे ढिलाई बरती यह बात किसी से छिपी नहीं है। बलात्कार की पीडि़ता नन के बारे में शर्मनाक टिप्पणी करने वाले केरल के निर्दलीय विधायक पीसी जॉर्ज पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी। वह तो केरल उच्च न्यायालय का दखल काम आया जिसने सरकार से इस संबंध में एसआईटी गठित करने और उसकी कार्रवाइयों के बारे में जानकारी देने को कहा है।
वहीं आरोप लगाने वाली नन को ही झूठा साबित करने के प्रयास जारी हैं। ‘मिशनरीज ऑफ जीसस’, शिकायतकर्ता नन जिससे जुड़ी रही हैं, ने इस नन और पांच साथी ननों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और उन पर पादरी के खिलाफ ‘‘सफेद झूठ’’ फैलाने के आरोप लगाए हैं। उल्लेखनीय है कि शिकायतकर्ता नन और पांच अन्य नन कोच्चि में प्रदर्शन कर इंसाफ की मांग कर रही हैं। प्रदर्शनकारी ननों ने आरोप को खारिज करते हुए कहा कि वे न्याय मिलने तक अपना प्रदर्शन जारी रखेंगी। बहरहाल, इस मामले के साथ ही इन दिनों केरल के कोल्लम जिले में एक नन सिस्टर सुसैन का शव कुएं से बरामद होने का मुद्दा भी गर्माया हुआ है। इसी के साथ ही पिछले दिनों मिशनरीज ऑफ चैरिटी से बच्चे गायब होने के मामले भी अब तक पूरी तरह नहीं सुलझ पाये हैं। देखना होगा कि वेटिकन का हस्तक्षेप कितना काम आता है।

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