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इस बार एनएच के अफसरों की बलि!

  • बिजली तार व पोल शिफ्टिंग में भी करोड़ों का घोटाला
  • कुमाऊं के मुख्य अभियंता को सौंपी जांच

वीक एंड टाइम्स ब्यूरो

देहरादून। एनएच-74 परियोजना लगता है कई लोगों की बलि लेकर रहेगा। अभी तक सिर्फ अफसरों पर कार्रवाई हुई है। इनमें आईएएस और पीसीएस शामिल हैं। कुछ अन्य लोग भी हैं लेकिन लगता है कि ये मामला इतना सीधा-सादा नहीं है। अभी एनएचएआई के अफसरों को जांच के दायरे में लाना और उनके खिलाफ भी कार्रवाई बची हुई है। इस बीच एक नया घोटाला सामने आया है। करोड़ों का यह घोटाला बिजली की लाइनों को शिफ्ट करने में होने की आशंका जताई जा रही है। एनएचएआई ने जिस कंपनी को राष्टï्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित बिजली के पोल और तार को हटाने का ठेका दिया, उसने विद्युत अभियंताओं के साथ साजिश रच कर सरकार को करोड़ों को चूना लगा दिया। इस मामले का खुलासा होने के बाद ऊर्जा निगम में खलबली का आलम है। यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक बीसीके मिश्रा ने तत्काल मुख्य अभियंता (कुमाऊं) से जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है।
सरकार अभी जमीनों का मुआवजा मनमाने तरीके से बांटे जाने और गलत तरीके से लोगों का भू उपयोग बदले जाने की साजिश में ही व्यस्त थी, लेकिन एनएच -74 पर एनएचएआई के नए खुलासे ने एक बार फिर सबको हिला डाला है.माना जा रहा है कि बिजली के खम्भे व तार शिफ्टिंग के काम में उर्जा निगम और एनएचए आई के अफसरों और इंजीनियरों ने मिलीभगत कर अपना उल्लू सीधा किया और सरकार के खजाने को झटका दे दिया। ठेका तकरीबन 60 करोड़ रुपये में दिया था। इसमें पुराने खम्भों के स्थान पर नए लगाने एवं नई तार खींचे जाने थे। सूत्रों के मुताबिक ऐसा नहीं किया गया। आपसी मिलीभगत से पुराने खम्भों और तार का ही इस्तेमाल कर दिया। ये घोटाला सामने आने के बाद उर्जा निगम और शासन में हंगामे की नौबत आ गई है। अफसर खुद को बचाने की कोशिशों में जुटने लगे हैं। वे सफाई दे रहे हैं कि बिजली लाइन शिफ्टिंग की पूरी जिम्मेदारी एनएचएआई की है। एनएचएआई ने ही अपने स्तर पर कंपनी को ठेका दिया। उनका इससे कोई वास्ता नहीं है.उर्जा निगम की भूमिका बिजली लाइन शिफ्टिंग की मॉनीटरिंग तक ही सीमित है। प्रबंध निदेशक ने मुख्य अभियंता कुमाऊं को जांच अधिकारी बनाया गया है। साथ ही निर्देश दिए गए हैं यथाशीघ्र प्रकरण की जांच करके तथ्यों के साथ ही रिपोर्ट सौंपें। एमडी मिश्रा के मुताबिक एनएचएआई में पोल व तार शिफ्टिंग में पुराने पोल व तार के इस्तेमाल सम्बन्धी गोलमाल पर मामला उन्होंने जांच बिठा दी है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। भले बिजली लाइन शिफ्टिंग का ठेका एनएचएआई ने ही दिया है। सुपरविजन चार्ज के रूप में यूपीसीएल ने धनराशि का 15 फीसदी बजट जमा कराया है।
यूपीसीएल के एक अधिशासी अभियंता को इसका नोडल अधिकारी बनाया गया था। अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले में शासन ने आईएएस अधिकारी पंकज पांडे और चंद्रेश यादव को मुअत्तल किया हुआ है। इस प्रकरण में तत्कालीन एसएलएओ और पीसीएस अफसर डीपी सिंह, अनिल शुक्ला, एनएस नगन्याल, तीरथ पाल, भगत सिंह फोनिया समेत कई अफसर, बिल्डर व किसान जेल में हैं। इस सम्भावना से इनकार नहीं किया जा रहा है कि अब एनएचएआई के लोग भी इस मामले फंस सकते हैं.अभी तक उनको केंद्र सरकार ने जमीन मुआवजा मामले में बचाया हुआ है।

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