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भगवान भरोसे सियासी दल

  • भाजपा के राम, कांग्रेस के शिव और सपा के विष्णु होंगे चुनावी मैदान में
  • आम आदमी के मुद्दे छोड़ भगवान को चुनावी मैदान में उतारेंगे नेता
  • भाजपा के हिंदुत्व कार्ड का जवाब देने के लिए राहुल और अखिलेश ने भी लिया भगवान का सहारा
  • गाय गंगा और पीपल के बाद अब हिंदुत्व के लिए नई ब्रांडिंग करने को तैयार हैं पार्टियां

Sanjay Sharma

2019 के लोकसभा चुनाव की पहली झलक नजर आने लगी है। इस चुनाव में भी हमारी और आपकी परेशानियां मुद्दा नहीं बनेंगी। हमारे भगवान बनाम उनके भगवान के नाम पर चुनाव कराने की रणनीति सभी राजनीतिक दल बनाने लगे हैं। हर बार इस खेल में भाजपा आगे रहती थी। इसका तोड़ सपा मुखिया अखिलेश यादव ने निकाला और कहा कि वह सत्ता में आने पर भगवान विष्णु का भव्य मंदिर बनायेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भला इस खेल में कहां पीछे रहने वाले थे, उन्होंने भी अपने भगवान तलाशे और भगवान शिव की अराधना के लिए कैलाश मानसरोवर पहुंच गए। उनके निर्वाचन क्षेत्र में कैलाश मानसरोवर और भगवान शिव के साथ राहुल गांधी के फोटो ने स्पष्टï कर दिया है कि अब कांग्रेस भी हिन्दुत्व कार्ड में भाजपा को बढ़त बनाने का कोई मौका नहीं देने वाली है।

25 सालों से राम मंदिर बनता रहा है हर चुनाव में बड़ा मुद्दा

पिछले 25 सालों से अधिक समय से अयोध्या में राम मंदिर भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने का एक बड़ा माध्यम बनता रहा है। भाजपा जानती है कि अयोध्या का राम मंदिर देश के लोगों की आस्था से जुड़ा है, लिहाजा वह हर चुनाव में इसका भरपूर फायदा उठाती रही है। मगर पिछले कुछ समय से भाजपा के लिए राम मंदिर का मुद्दा परेशान भी करने लगा है। लोग सवाल करने लगे हैं कि आखिर चुनाव के समय ही भाजपा क्यों राम मंदिर के निर्माण की बात करने लगती है और अब जब केन्द्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की सरकारें हैं तो मंदिर के निर्माण में देरी क्यों की जा रही है। इस बार भी लोकसभा चुनाव से पहले सीएम योगी कई बार अयोध्या जाकर संतों के बीच यह संदेश दे चुके हैं कि जल्द ही राम मंदिर का निर्माण किया जायेगा।

… हर लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भाजपा बड़ी सफाई के साथ यह संदेश देती रही है कि कांग्रेस और सपा जैसे दल सिर्फ अल्पसंख्यकों की बात करते रहे हैं और उसमें भी मुस्लिम वोटों के लिए तुष्टिïकरण करते रहे हैं। केन्द्र में मोदी सरकार बनने के बाद मोदी मंत्रिमंडल में शामिल काबीना मंत्री भी कभी पाकिस्तान के बहाने तो कभी मंदिर के बहाने कांग्रेस पर कटाक्ष करके यह साबित करने की कोशिशें करते रहते हैं कि कांग्रेस को हिन्दुवों के वोटों की कोई खास चिंता नहीं है। 2017 के विधानसभा चुनावों में तो अखिलेश पर मुस्लिम तुष्टिïकरण का तीखा आरोप लगाकर भाजपा ने अपने पक्ष में माहौल भी बना लिया था। नतीजा यह निकला कि प्रचंड बहुमत से यूपी में भाजपा की सरकार बनी क्योंकि हिन्दू वोट बड़ी संख्या में एकजुट हो गया।
अखिलेश ने यह बात समझ ली और घोषणा की कि सत्ता में आने पर वह कंबोडिया के अंकोरवाट मंदिर की तर्ज पर भव्य भगवान विष्णु का मंदिर बनवाएंगे। सपा ने यह दांव इसलिए भी खेला कि भगवान राम, भगवान विष्णु के ही अवतार माने जाते हैं। जाहिर है कि अखिलेश के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया भी सामने आई क्योंकि किसी को अंदाजा नहीं था कि अखिलेश इस तरह का बयान भी दे सकते हैं, जिससे उनके मुस्लिम वोटों पर असर पडऩे का खतरा हो। अखिलेश यादव ने अपने कार्यकाल में अयोध्या में भव्य राम भजन स्थल, 14 कोस के परिक्रमा क्षेत्र का सौन्दर्यीकरण और मथुरा-वृंदावन में भी कई करोड़ का काम कराया था, मगर यह भाजपा के आरोपों के आगे ठहर न सका। बाद में उन्होंने कहा भी कि वह नवरात्रि में पूजा करते हैं और कन्याओं को भोजन कराने के बाद उनके चरण छूते हैं मगर उसका प्रचार नहीं करते लेकिन भाजापा के खेल के बाद अब वह अपने परिवार के साथ पूजा अर्चना करने के फोटो सोशल मीडिया पर डालने लगे हैं।
कांग्रेस भी राहुल गांधी के कैलाश मानसरोवर यात्रा के शानदार फोटो के साथ देश भर में लाखों पोस्टर लगाकर यह संदेश देने की तैयारी में है कि राहुल गांधी आस्तिक है और भगवान में उन्हें पूरी श्रद्धा है और इसलिए वह कैलाश मानसरोवर तक भगवान शिव के दर्शन करने के लिए गए। भाजपा भी जानती है कि अगर आम जन में यह संदेश चला गया कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव भी ईश्वर की आराधना करने लगे हैं तो उन्हें यह साबित करने में परेशानी होगी कि यह नेता सिर्फ मुसलमानों की बात सुनते हैं और ऐसी स्थिति में वह अपने हिन्दू वोट बैंक को एकजुट नहीं कर सकेंगे। इसी बात को ध्यान में रखकर भाजपा के नेता यह बात प्रचारित करने में जुट गए हैं कि हिन्दुओं के दबाव में आकर कांग्रेस और सपा के नेता भी भगवान का नाम लेने लगे हैं। यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने तंज कसते हुए कहा भी कि तुष्टिïकरण की राजनीति करने वाले नकली ही सही मगर अब भगवान को याद करने लगे हैं। जाहिर है सत्ता तक पहुंचने के
लिए इस बार भगवान राम, विष्णु और शिव भी मैदान में होंगे।

 

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