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अनियोजित कॉलोनियों की जकड़ में शहर , सरकारी तंत्र की लापरवाही से बिगड़ी विकास की चाल

  • कॉलोनियों में पेयजल आपूर्ति, सीवर लाइन और कूड़ा प्रबंधन बड़ी समस्या
  • मूलभूत जरूरतें भी उपलब्ध कराने में नाकाम हो रहा है सरकारी तंत्र
  • हर साल पचास हजार आशियानों की जरूरत पर बन रहे पांच हजार

@WeekandTimes

लखनऊ। नवाबों का शहर चौतरफा अनियोजित कॉलोनियों से गिरता जा रहा है। इन कॉलोनियो के विकास पर सरकारी तंत्र का कोई नियंत्रण नहीं है। इसकी सबसे बड़ी वजह एलडीए और आवास विकास द्वारा लोगों को कम दाम में आवास नहीं उपलब्ध करा पाना है। नतीजतन लोग अनियोजित कॉलोनियों की ओर आकर्षित हो रहे है। लखनऊ को हर साल पचास हजार आशियानों की जरूरत है मगर सरकारी स्तर पर केवल पांच हजार मकानों की व्यवस्था ही हो पा रही है। लखनऊ के शहरी क्षेत्र का दायरा बढ़ रहा है लेकिन जरूरत के मुताबिक सुविधाओं में बढ़ोतरी नहीं हो रही। राजधानी में रहने की बढ़ती चाहत ने शहर में ढेरों अनियोजित कॉलोनियों को जन्म दिया है। कॉलोनियां भले ही अनियोजित है मगर लोगों में मूलभूत और अवस्थापना सुविधाओं की मांग बढ़ रही है।
शहर में जरूरत के अनुसार विकास में सीमित बजट का रोड़ा है। हाल यह है कि 40 प्रतिशत इलाकों में सीवर और पेयजल के पाइप तक नहीं पड़ पाए हैं। यहां जुगाड़ तंत्र से काम चल रहा है। सडक़ें चौड़ी हुई हैं लेकिन यातायात के बढ़ते दबाव को वह झेल नहीं पा रही हैं। आवासीय कॉलोनियों में व्यावसायिक प्रयोग के कारण जाम की समस्या बढ़ी है। इस समस्या से निपटने के लिए शहर में मैट्रो का काम जोरों पर है। माना जा रहा है कि अगले साल मेट्रो ट्रांसपोर्टनगर से इंदिरानगर और मुंशी पुलिया तक दौड़ेगी, इससे शहर को कुछ राहत मिलेगी। बिजली के क्षेत्र में सुधार हुआ है लेकिन ट्रांसमिशन लाइनों और बिजली उपकेंद्रों की बेहद कमी है। यही कारण है कि कटौती न होने के बावजूद रोजाना शहर के कई इलाकों में बिजली संकट बना रहता है। सीवर लाइन की बड़ी समस्या आलमबाग और कृष्णानगर से जुड़े इलाकों में आज भी है। सीवर लाइन नहीं होने से घनी आबादी में सीवर को नाले में बहाया जा रहा है। पुराने शहर में पुराने जमाने की सीवर लाइनें जवाब दे चुकी हैं। जवाहर लाल नेहरू अर्बन मिशन के तहत ट्रांसगोमती इलाके में पड़ी सीवर लाइन भी गति नहीं पकड़ पा रही। अभी शहर में 1900 किलोमीटर में सीवर लाइन है जबकि बढ़ते क्षेत्र के कारण इतने ही किमी की अभी और दरकार है। इसके अलावा शहर में पेयजल के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। 613 नलकूपों और 130 मिनी नलकूपों में से चालीस प्रतिशत अपनी क्षमता के अनुरूप पानी नहीं दे पा रहे है। दो हजार हैंडपंप खराब हैं। पानी की आपूर्ति बाधित होने से गोमतीनगर और इंदिरानगर समेत कई इलाकों में हाहाकार मच जाता है। 135 किलोमीटर दूर शारदा नहर से पानी आता है और इसके लिए सिंचाई विभाग से मिन्नतें करनी पड़ती हैं। पेयजल की आपूर्ति के लिए 33 सौ किलोमीटर में पाइप लाइन पड़ी है जबकि एक हजार किलोमीटर में पाइप की अभी और आवश्यकता है।

 

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