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इन्वेस्टर्स समिट के उद्घाटन पर ठोंकी त्रिवेंद्र की पीठ

  • मोदी ने खाली छोड़ दी उत्तराखंड की झोली
  • बोले -त्रिवेंद्र की अगुवाई में पूरे होंगे सपने
  • उत्तराखंड में सरप्लस स्टेट बनने की क्षमता
  • पर्यटन में निवेश का रास्ता खुला
  • केंद्र सरकार के रुख से लटके दिखे निवेशकों के चेहरे

चेतन गुरुंग @ Weekandtimes

देहरादून। बहुत धूम थी इन्वेस्टर्स समिट की। देश-विदेश में इसका खूब डंका पीटा जा चुका था। जम कर रोड शो हुए थे। प्रमुख शहरों में 80 हजार करोड़ के करीब के करार की पेशकश सरकार के पास होने का दावा किया जा रहा है। 70 हजार करोड़ के करार हो चुके हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का ये ड्रीम प्रोजेक्ट हो चुका है। ऐसे में उम्मीद लगाई जा रही थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब इसका उद्घाटन करेंगे तो उत्तराखंड के लिए कुछ विशेष ऐलान ऐसे भी कर सकते हैं जो निवेश और औद्योगीकरण को बढ़ावा देगा। ऐसा हुआ नहीं। मोदी सुबह कुछ देर से सभागार में पहुंचे और उससे पहले उन्होंने औद्योगिक उत्पादों से जुड़े स्टालों का नजारा लिया। देहरादून में देश-विदेश के दिग्गज निवेशकों को उत्तराखंड में निवेश की दावत देते हुए कहा कि ऐसा करके वे दैवीय अनुभूति का अहसास भी करेंगे। वे इसके अलावा क्यों निवेश करें, केंद्र सरकार से उनको क्या मदद और फायदे मिलेंगे, ये उन्होंने बताया नहीं। ये उम्मीद करना कि दैवीय अनुभूति के लिए निवेश किया जाए, कुछ अजीब सा और अव्यावहारिक भी लगता है। लब्बोलुआब यह कि मोदी आए, उत्तराखंड और मुख्यमंत्री की तारीफ की। फिर राज्य को बिना कुछ दिए वापस दिल्ली उड़ गए।

….प्रधानमंत्री ने समिट के दौरान सियासी तौर पर एक सन्देश दिया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अगुवाई में राज्य विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा, कह कर ये साफ कर दिया कि राज्य में नया चेहरा तो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर फिलहाल नहीं आने वाला है। उन्होंने ये भी बोला कि साल 2025 तक सरकार राज्य के लोगों के सारे सपनों को पूरा कर देगी। मोदी ने दो दिवसीय इन्वेस्टर्स समिट के उद्घाटन के मौके पर राज्य को ऊर्जा सरप्लस बनने की ताकत रखने वाला बताया तथा कहा कि राज्य सरकार की नई पर्यटन नीति से अब इस क्षेत्र में निवेश का रास्ता खुला गया है। रायपुर में राजीव गांधी क्रिकेट स्टेडियम परिसर में बनाए गए विशेष ऑडिटोरियम में मोदी से निवेशक और राज्य सरकार उम्मीद लगाए हुए थीं कि वह कुछ ऐसा ऐलान कर सकते हैं, जो उत्तराखंड में निवेश को निश्चित तौर पर बढ़ावा देगा। ऐसा न होने से निवेशकों और खुद राज्य सरकार के लोगों को भी कुछ निराशा हुई। तय वक्त से देर से पहुंचे मोदी ने पहले सिंगापुर के मंत्री, चेक गणराज्य और जापान के राजदूतों तथा प्रमुख उद्यमियों को सुना। उन्होंने अपने भाषण में कोई खास बात नहीं की। उन्होंने कहा कि राज्य अभी 18 साल का युवा हो चुका है। त्रिवेंद्र सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा दे दिया है। पहली बार 13 जिलों में 13 टूरिस्ट डेस्टिनेशन चिह्नित किए गए हैं। इससे रोजगार और निवेश आएगा।
उत्तराखंड में जल विद्युत ऊर्जा की अपार सम्भावना पहले से थी लेकिन अब सोलर पॉवर की दिशा में भी सरकार काम कर रही है। इससे राज्य देश में ऊर्जा सरप्लस स्टेट हो जाएगा। अपने लिए ही नहीं बल्कि देश के लिए भी बिजली पैदा करेगा। राज्य आज विकास की राह पर तेज गति से दौड़ रहा है। राज्य में लघु, माध्यम और बड़े उद्योगों के लिए बेहतर माहौल बना हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य में वन नीति के कारण दिक्तत न हो इसके लिए खास ध्यान रखा गया है। पीएमओ में फारेस्ट क्लीयरेंस के लिए अलग पोर्टल बनाया गया है। अब तेजी से अनापत्तियाँ दी जा रही हैं। उत्तराखंड के लिए केंद्र सरकार खास ध्यान दे रही है। राज्य को एयरवे, रेलवे और हाईवे से जोड़ा जा रहा है। बद्री-केदार यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए आल वेदर रोड का निर्माण हो रहा। ऋ षिकेश-कर्णप्रयाग रेल मार्ग पर काम चल रहा है। गांवों में सडक़ें पक्की की जा रही हैं। मोदी ने उत्तराखंड को पर्यटन के लिहाज से भी सम्पूर्ण पैकेज करार दिया। उन्होंने कहा कि यहां नेचर, एडवेंचर, कल्चर और योगा सब है। इस राज्य में निवेश के लिए शानदार माहौल है। उन्होंने केंद्र की आयुष्मान योजना का फायदा गिनाते हुए कहा कि मेडिकल और वेलनेस के क्षेत्र में सरकार की ये योजना सबको राहत देगी। 50 करोड़ लोग इस योजना से फायदा उठाएंगे। मरीजों को इस योजना में ईलाज तत्काल हाजिर है। डॉक्टर्स का भुगतान तैयार है। उन्होंने उत्तराखंड में एसईजेड की नई परिभाषा बताते हुए इसको स्पिरिचुअल ईको जोन करार दिया और कहा कि इस जोन की ताकत किसी भी अन्य जोन से कहीं ज्यादा है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उत्तराखंड के प्रति दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपई के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि उनके कारण ही उत्तराखंड को औद्योगिक पैकेज मिला। तब उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार थी। पैकेज के कारण ही राज्य ने विकास के नए आयाम छुए।
आज देश की प्रति व्यक्ति आय से उत्तराखंड की प्रति व्यक्ति आय कहीं ज्यादा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी से ही उनको इन्वेस्टर्स समिट के आयोजन की प्रेरणा मिली। इससे सभी राज्यों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होगी, उन्होंने कहा कि निवेश के लिए जो भी चीजें चाहिए, वह उत्तराखंड में है। कुशल कारीगर, कर्मचारी, सस्ती बिजली, सिंगल विंडो सिस्टम, शांत और सुरक्षित माहौल इसकी खासियत है। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने बताया कि राज्य में निवेश के लायक 50 परियोजनाएं तैयार की गई हैं।
विगत 18 वर्षों में उत्तराखंड व्यापार गंतव्य के रूप में उभरा है। उत्तराखंड में निवेशकों के आकर्षित होने के लिए प्रदूषणमुक्त पर्यावरण,जल की अधिकता,शांतिपूर्ण माहौल,राज्य सरकार का उद्योग के प्रति सकारात्मक रुख,रेल,रोड और एयर कनेक्टिविटी,आधुनिक एवं एकीकृत औद्योगिक आस्थान, सस्ती दर पर बिजली,उत्कृष्ट शिक्षण संस्थान, हिल स्टेशन प्रमुख कारण हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का उत्तराखंड के प्रति विशेष लगाव होने की वजह से आल वेदर चारधाम सडक़ परियोजना, भारतमाला परियोजना, कर्ण प्रयाग रेल परियोजना और बड़ी संख्या में अंतरराज्यीय सडक़ों का चौड़ीकरण जैसी प्रमुख कार्य यहाँ हो रहे हैं। समिट और प्रधानमंत्री के आगमन के कारण एक फायदा ये हुआ कि शहर की ज्यादातर प्रमुख और टूट-फूट गई सडक़ों का जीर्णोद्धार हो गया। डाट काली मंदिर के करीब नए टनल और हरिद्वार रोड पर जोगीवाला में नए फ्लाई ओवर का भी उद्घाटन हो गया।

सिंगापुर के मंत्री भी मौजूद रहे
इन्वेस्टर्स समिट को सिंगापुर के सूचना प्रसारण मंत्री एस.ईश्वरन, भारत में जापान के राजदूत केंजी हिरमात्सु, चेक गणराज्य के राजदूत मिलन होवोरका ने भी सम्बोधित किया। अडाणी, जिंदल, अमूल समेत अन्य प्रमुख समूह के आला अफसरों ने भी विचार प्रकट किये। इस अवसर पर राज्यपाल बेबीरानी मौर्य सहित उत्तराखण्ड सरकार के मंत्रीगण, विधायक, सम्मेलन में प्रतिभाग करने आए उद्यमी व निवेशक उपस्थित थे। इससे पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने थीम पैवेलियन व प्रदर्शनी स्थल का अवलोकन भी किया। पास सिस्टम बदतर होने के कारण पत्रकारों को भीतर घुसने में दिक्कत हुई लेकिन कई तथाकथित पत्रकार पास लटकाए मीडिया गैलरी में दिखे। इसके कारण पत्रकारों में बहुत रोष भी दिखाई दिया।

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