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अपने ही जाल में उलझी कांग्रेस

  • सपा बसपा ने छोड़ा हाथ का साथ अति आत्मविश्वास ने बिगड़ी बात
  • छत्तीसगढ़ राजस्थान और मध्य प्रदेश चुनाव में भी बिगड़ सकता है खेल
  • लोकसभा से पहले लगा महागठबंधन को झटका भाजपा गदगद
  • उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय दलों को मिलाकर भाजपा को घेरने पर लगा रोड़ा

Sanjay Sharma @ WeekandTimes

लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अपने ही बनाए जाल में उलझ गई है। छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस और बसपा के बीच बात नहीं बनी। लिहाजा बसपा प्रमुख मायावती ने कांग्रेस का हाथ झटक दिया और भविष्य में उससे किसी भी स्तर पर गठबंधन नहीं करने का ऐलान कर दिया। मायावती के ऐलान के बाद सपा के राष्टï्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी कांग्रेस से नाता तोड़ लिया है। यूपी के दो अहम दलों के कांग्रेस से किनारा करने के बाद भाजपा गदगद है। वहीं, लोकसभा चुनाव के पहले कांग्रेस के महागठबंधन बनाने का सपना चूर हो गया है। यही नहीं बसपा और सपा से नाराजगी मोल लेकर कांग्रेस ने अपने पांव पर कुल्हाड़ी मार ली है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनाव में बसपा कांग्रेस का खेल बिगाड़ सकती है। साथ ही यूपी में कमजोर कांग्रेस, भाजपा का मुकाबला करने की स्थिति में नहीं है। कुल मिलाकर अति आत्मविश्वास ने कांग्रेस को अकेला कर दिया है। हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अभी भी लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा के साथ आने की बात कह रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वाकई राहुल की बात सच होगी।

…..लोकसभा चुनाव में मोदी का रथ रोकने का कांग्रेस का प्लान चौपट हो चुका है। कांग्रेस जहां क्षेत्रीय दलों को मिलाकर भाजपा के खिलाफ एक महागठबंधन बनाना चाहती है वहीं बसपा प्रमुख मायावती अपनी पार्टी का अन्य राज्यों में विस्तार करना चाहती हैं। यूपी में बसपा का साथ कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हो सकता है। लिहाजा दोनों दलों के नेताओं ने महागठबंधन की बातचीत शुरू की। पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में बसपा प्रमुख छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में एक बार फिर किस्मत आजमाना चाहती हैं। इन राज्यों में कांग्रेस का साथ बसपा के काम आ सकता है। वहीं कांग्रेस को बसपा का साथ मिलने पर दलित वोट बैंक का साथ मिलता। कुल मिलाकर दोनों एक-दूसरे के लिए मुफीद साबित हो सकते थे। लेकिन सीटों के बंटवारें को लेकर कांग्रेस के साथ बसपा प्रमुख से बात बनी नहीं। कांग्रेस को मध्य प्रदेश और राजस्थान में वापसी का भरोसा है। वहीं छत्तीसगढ़ में बसपा से समझौता करने में उसे लाभ का सौदा नहीं नजर आया। लिहाजा कांग्रेस ने बसपा को राजस्थान की 200 में 9-10 , मध्यप्रदेश की 230 में 15-20 और छत्तीसगढ़ की 90 में केवल 5-6 सीटें देना चाहती थी। बसपा प्रमुख इससे अधिक सीट चाहती थीं। राजस्थान में कांग्रेस का वापसी का भरोसा कुछ हद तक स्वीकार कर भी लिया जाए लेकिन मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की स्थिति एकदम अलग है। इन तीन राज्यों में बसपा का ठीक-ठाक जनाधार है। मध्य प्रदेश में बसपा को 1993 के विधानसभा चुनाव में 11 सीटें मिलीं थीं। इसके अलावा पिछले विधानसभा चुनाव में भी 6.42 प्रतिशत मतों के साथ बसपा के चार विधायक बने। राजस्थान में बसपा को 3.4 प्रतिशत मतों के साथ दो सीटें मिलीं तो छत्तीसगढ़ में भी पिछले चुनाव में उसे चार प्रतिशत मत मिले। कांग्रेस को लगता है कि तीनों राज्यों में कांग्रेस को सत्ता विरोधी रुख का फायदा मिलेगा। वह बसपा को अधिक सीट देकर सत्ता में अपनी भागीदारी को कमजोर नहीं करना चाहती है। कांग्रेस के तमाम नेताओं को लगता है कि वे इन राज्यों में अकेले दम पर सरकार बना लेंगे। ऐसे में केवल साथ पाने के लिए सत्ता में किसी दूसरे दल को भागीदार बनाकर खुद को कमजोर क्यों किया जाए। बसपा प्रमुख ने कांग्रेस की इस चाल को भंाप लिया और गठबंधन नहीं करने की घोषणा करते हुए मध्य प्रदेश और राजस्थान में अकेले दम पर चुनाव लडऩे की घोषणा कर दी। अपने छत्तीसगढ़ दौरे में बसपा प्रमुख ने इस बात को सार्वजनिक तौर पर स्वीकार भी कर लिया कि कांग्रेस, बसपा को कमजोर करना चाहती थी, इसलिए उससे गठबंधन नहीं हो सका। छत्तीसगढ़ में मायावती अजित जोगी की पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ रही हैं। अजित जोगी की आदिवासियों में काफी अच्छी पकड़ है। यहां दलित और आदिवासी गठजोड़ का फायदा मायावती को मिलेगा। इसका नुकसान भाजपा को कम और कांग्रेस को अधिक होगा। वहीं राजस्थान और मध्य प्रदेश में दलितों के वोट बैंक के सहारे बसपा कई सीटों पर कांग्रेस का खेल बिगाड़ सकती है। सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में होगा। बसपा के साथ सपा ने भी कांग्रेस से नाता तोड़ लिया है। यूपी में बसपा और सपा ने मिलकर भाजपा को लोकसभा उपचुनाव में धूल चटा दी है। यहां दोनों दलों का मजबूत जनाधार है। दूसरी ओर लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस अकेले लडऩे का हश्र देख चुकी है। यूपी में कांग्रेस की स्थिति बेहद खराब है। ऐसी स्थिति में यहां सपा व बसपा का साथ उसके लिए संजीवनी साबित हो सकती थी, लेकिन अब यहां इस तरह के गठबंधन की संभावना दूर तक नहीं दिखाई पड़ रही है। यूपी में कांग्रेस अकेले लड़ेगी तो इसका सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा इसलिए भाजपा भी गदगद है। हालांकि राजनीति में कुछ कहा नहीं जा सकता है। बावजूद ताजा हालातों को देखते हुए कांग्रेस-सपा-बसपा के गठबंधन के आसार नहीं दिख रहे हैं।

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