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अब शुरू हुई पिछड़ों को लुभाने की कवायद एक-दूसरे को घेरने में जुटे राजनीतिक दल

  • ब्लाक स्तर पर कांग्रेस करेगी बैठकें, जातियों का सम्मेलन कर रही भाजपा
  • सपा पिछड़े बाहुल्य गांव में सरकार की नाकामियों की खोल रही पोल

वीक एंड टाइम्स न्यूज नेटवर्क
लखनऊ। लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए सभी दल अभी से तैयारियों में जुट गए हैं। जातीय समीकरण बनाने की रणनीति तेज हो गई है। चुनाव नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाने वाले पिछड़े वर्ग को साधने के लिए सभी दलों ने दांव चलने शुरू कर दिए हैं। भाजपा जहां पिछड़ी जातियों का सम्मेलन बुलाकर अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रही है, वहीं सपा पिछड़े बाहुल्य गांवों में मोदी सरकार की नाकामियों की पोल खोलने में जुटी है। इस मामले में कांग्रेस भी पीछे नहीं है। कांग्रेस ने पिछड़ा वर्ग की बैठक बुलाकर इसकी शुरुआत कर दी है और ब्लॉक स्तर पर बैठकों को करने की रणनीति बनाई है। इस बैठकों में न केवल सरकार की तमाम योजनाओं की नाकामियों के बारे में जानकारी दी जाएगी बल्कि कांग्रेस शासन काल में शुरू की गई तमाम योजनाओं के फायदे भी गिनाए जाएंगे। कुल मिलाकर सभी एक-दूसरे को घेरने में जुटे हैं।
यूपी की सियासत हमेशा से जाति और धर्म से जुड़ी रही है। बिना जाति और धर्म के समीकरण के यहां सत्ता तक पहुंचा मुश्किल होता है। यही वजह है कि भाजपा एक ओर विहिप के जरिए राम मंदिर के मुद्दे को हवा देने में जुटी है वहीं जातियों में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रही है। उसने अपना फोकस पिछड़ी जातियों पर कर दिया है। वह पिछड़ी जातियों का सम्मेलन कर अपनी पैठ बढ़ाना चाहती है। प्रदेश में पिछड़ी जातियों के सम्मेलन की जिम्मेदारी उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य संभाल रहे हैं। वह सभी जातियों के जातिवार सम्मेलन कर उन्हें पार्टी से जोडऩे की कोशिश कर रहे हैं। पिछले महीने यादवों को जोडऩे के लिए एक सम्मेलन बुलाया गया था। प्रदेश में करीब नौ फीसदी यादव वोट हैं और पिछड़ी जाति में इनकी लगभग 20 फीसदी हिस्सेदारी है। 2014 के आम चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियां भाजपा के पक्ष में लामबंद हुई थीं। यही वजह थी कि भाजपा ने यूपी की 80 सीटों में 71 सीटें जीती थीं। वहीं उसकी सहयोगी पार्टी अपना दल ने दो सीटों पर जीत दर्ज की थी। हालांकि अधिकांश यादव मतदाताओं ने सपा को वोट किया था। लिहाजा भाजपा एक बार फिर पिछड़ी और अतिपिछड़ी जातियों को लामबंद करने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर सपा एक ओर साइकिल यात्रा के जरिये अपने वोट बैंक को संभालने में जुटी है वहीं पिछड़े वर्गों को लुभाने के लिए पिछड़े बाहुल्य गांव में बूथ स्तर तक भाजपा सरकार की नाकामियां गिनाने के लिए भी कार्यक्रम शुरू कर दिया है। इसके तहत जिलों में पदाधिकारियों की विधानसभावार नियुक्ति भी कर दी गई है। सपा भाजपा के नए वोट बैंक में सेंधमारी की पूरी जुगत लगा रही है। पार्टी उन स्थानों पर ज्यादा फोकस कर रही है, जहां अन्य पिछड़े वर्ग की आबादी अधिक है। पिछड़े बाहुल्य वाले गांवों में हर गांव के प्रत्येक बूथ पर भाजपा सरकार की पोल खोल अभियान का कार्यक्रम रखा गया है। इन बूथों पर केन्द्र की करीब साढ़े चार साल और प्रदेश की डेढ़ साल की सरकार की नाकामियों को सपा कार्यकर्ता जनता के बीच ले जाएंगे। पिछड़ा वर्ग को लेकर कांग्रेस भी पीछे नहीं है। उसने पिछड़ा वर्ग की बैठक शुरू कर दी है। पार्टी की रणनीति ब्लॉक स्तर पर ऐसी बैठकें आयोजित करने की हैं। इन बैठकों में वह सरकार की नाकामियों की पोल खोलेगी। कुल मिलाकर सभी बड़े राजनीति दल पिछड़ों को साथ कर चुनाव की वैतरणी पार करने की जुगत में लगे हैं।

यह है समीकरण

यूपी में सबसे बड़ा समूह पिछड़ा वर्ग का है। यह कुल आबादी का 40 फीसदी यानी करीब 8 करोड़ है। यादव और कुर्मी इस वर्ग की बड़ी जातियां हैं। यादव कुल सूबे की आबादी का 9 फीसदी हैं जिसकी वजह से यादव सबसे बड़ी पिछड़े वर्ग की जाति बनती है। दूसरी बड़ी जाति कुर्मी 3 फीसदी हैं। खीरी, सीतापुर, देवीपाटन के कई जिलों में इनका प्रभाव है। अति पिछड़ा वर्ग जिसमें निषाद, कश्यप, बिन्द, मल्लाह, राजभर, कुम्हार आदि जातियां है। इन जातियों पर अपनी नजर गड़ाते हुए सपा ने 16 अति पिछड़ी जातियों को 2005 में एससी में शामिल कर लिया था लेकिन बाद में मामला कोर्ट में चला गया और अब केंद्र के पास प्रस्ताव लंबित है। अति पिछड़ी जातियां राज्य की आबादी का तकरीबन 15 फीसदी है।

सपा सभी वर्गों को साथ लेकर चलने पर विश्वास करती है। इसी क्रम में वह पिछड़े वर्ग के लोगों के साथ संवाद कर रही है। वहीं भाजपा समाज को बांटने का काम कर रही है।
-अरविंद सिंह, एमएलसी, सपा

भाजपा जाति की राजनीति में विश्वास नहीं करती। केंद्र सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया है। इस आयोग के बारे में विस्तृत जानकारी देने के लिए सम्मेलन बुलाए गए।
-संजय राय, प्रवक्ता,भाजपा

पार्टी में तमाम जातियों से जुड़े प्रकोष्ठï हैं। इन प्रकोष्ठïों की बैठक बुलाई जा रही है। इसके जरिए सभी वर्गों से संवाद किया जा रहा है।
-दीपक सिंह, एमएलसी, कांग्रेस

 

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