You Are Here: Home » Front Page » भाजपा की राह में कांटे बिझाएंगे राजा भैया

भाजपा की राह में कांटे बिझाएंगे राजा भैया

  • नयी पार्टी के गठन का एलान कर चला सावर्ड दांव
  • SC- ST ACT को लेकर केंद्र पर किया प्रहार
  • ारंछाड़ के खिलाफ आवाज उठा कर जता दी मंसा
  • योगी के सामने ठाकुर वोटों को एकजुट रखने की चुनौती

Sanjay Sharma @ Weekandtimes

प्रतापगढ़ के कुड़ा से निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के राजनीतिक पार्टी के ऐलान से सियासी गलियारों में हडक़ंप मच गया है। राजा भैया ने अपनी पार्टी के ऐलान के साथ जिस तरह एससी-एसटी एक्ट और आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला उसने एक बार फिर यूपी में सवर्ण जातियों को भडक़ा दिया है। राजा भैया के तेवरों से साफ हो गया है कि वे इस मुद्दे पर आगे और भी आक्रामक होंगे। इससे यह भी स्पष्टï हो गया है कि वे प्रदेश में सवर्णों की सियासत की बागडोर अपने हाथ में लेने की तैयारी कर रहे हैं। राजा भैया क्षत्रियों में खासे लोकप्रिय हैं। उनके इस तरह पार्टी बनाने और फिर चुनाव लडऩे की घोषणा से भाजपा के क्षत्रिय चेहरे सीएम योगी के सामने भी इस बात की चुनौती रहेगी कि वह क्षत्रियों को राजा भैया के साथ जाने से रोकें। राजा भैया के ये कदम आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं।


…पिछले काफी समय से आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा का परंपरागत वोट माना जाने वाला ब्राह्मïण, क्षत्रिय और वैश्य समुदाय नाराज था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जिस तरह भाजपा ने एससी-एसटी अधिनियम को प्रभावी बनाने के लिए अध्यादेश को संसद में रखा उससे यह वर्ग खुद को ठगा महसूस कर रहा था। इस वर्ग के लोगों का मानना था कि सवर्ण जातियां परंपरागत रूप से भाजपा के साथ जाती हैं मगर भाजपा के इस फैसले से इन्हीं जातियों को नुकसान हो रहा है। भाजपा ने इस डैमेज को कंट्रोल करने की काफी कोशिश की। अप्रत्यक्ष रूप से कहा गया कि सीएम योगी क्षत्रियों का चेहरा हैं। यूपी में लंबे समय के बाद कोई क्षत्रिय सीएम बना है और भाजपा इस बात से गदगद थी कि इस बार क्षत्रिय वोट उसको मिलेगा मगर लोकसभा चुनाव से ठीक पहले राजा भैया के इस घोषणा ने भाजपा की परेशानी बढ़ा दी है। जब से मायावती ने राजा भैया पर पोटा लगाया था तब से क्षत्रिय समुदाय में राजा भैया एक हीरो की तरह स्थापित हुए थे। राजा भैया यूं तो निर्दलीय थे मगर सपा से उनका झुकाव जगजाहिर था और वह सपा सरकार में मंत्री भी बने थे। विगत दिनों राज्यसभा चुनाव में वोट डालने से पहले सीएम योगी से उनकी मुलाकात चर्चा का विषय बन गई थी और लोगों को लगने लगा था कि राजा भैया भी भाजपा खेमे में जा सकते हैं मगर राजा भैया ने अपनी पार्टी के ऐलान के साथ इन अटकलों पर विराम लगा दिया है। हालांकि अभी इस पार्टी का नाम फाइनल नहीं हुआ है। राजा भैया ने चुनाव आयोग को अपनी पार्टी के नाम के लिए जनसत्ता पार्टी, जनसत्ता दल और जनसत्ता लोकतांत्रिक पार्टी ये तीन नामों का सुझाव दिया है। यही नहीं पार्टी के गठन की घोषणा करते समय जिस तरह राजा भैया ने आरक्षण के मुद्दे पर सवाल खड़े किए हैं उससे जाहिर है कि आने वाले समय में भाजपा को राजा भैया के ये तीखे सवाल और चुभेंगे। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि नई पार्टी उन लोगों की आवाज बुलंद करेगी जो एससी-एसटी एक्ट और आरक्षण के खिलाफ हैं। आज कई राजनीतिक पार्टियां हैं लेकिन वे सिर्फ जातिवाद और आरक्षण की राजनीति कर रही हैं। उनकी पार्टी उन लोगों की आवाज बनेगी जो एससी-एसटी एक्ट के शिकार हैं और आरक्षण की वजह से बेरोजगार हैं। राजा भैया ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राजीव गांधी के समय में एससीएसटी एक्ट पास किया गया। उसके बाद इसमें कई संशोधन हुए। इसे गैर जमानती बनाया गया। यह भी कहा गया कि इसकी जांच पहले इंस्पेक्टर करेंगे। इसके बाद इसमें भी संशोधन किया गया। यह प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है। दलित राजनीति की ओर इशारा करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि दलितों का उत्थान दूसरी जातियों की अनदेखी करके नहीं की जा सकती। संविधान हम सभी को समान अधिकार देता है लेकिन आज जाति के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है। आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्टï कर दिया कि जो व्यक्ति आईएएस या अधिकारी हैं, धन सम्पन्न हैं, उसे आरक्षण की क्या जरूरत है। प्रमोशन में आरक्षण लोगों को हतोत्साहित करता है। योग्यता के मुताबिक आरक्षण होना चाहिए। कुल मिलाकर राजा भैया खासतौर से क्षत्रियों को आरक्षण के इस संवेदनशील मुद्दे पर एकजुट रखना चाहते हैं और सीएम योगी के लिए यह अग्निपरीक्षा का समय है कि वह क्षत्रियों को यह समझा सकें कि असल में उनके मुद्दे का समाधान भाजपा ही कर सकती है। जाहिर है भाजपा के ठाकुर नेता के सामने दूसरा ठाकुर नेता ताल ठोक कर मैदान में आ गया है और चुनाव से पहले जहां वोटों की मारामारी है वहां क्षत्रिय वोटों का बंटवारा भाजपा को नुकसान पहुंचाएगा। ताजा सियासी घटनाक्रम आने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। सपा-बसपा की दोस्ती से परेशान भाजपा को यूपी में अब एक और मोर्चे पर जूझना होगा। भाजपा के सामने सबसे बड़ी चिंता दलित और पिछड़ों को एकजुट करने के अलावा अपने परंपरागत वोट बैंक सवर्णों को भी संतुष्टï करने की भी है। राजा भैया के दलीय राजनीति में कूदने से सवर्ण वोटों विशेषकर क्षत्रिय वोटों के बिखरने की आशंका अधिक बलवती है। इसका उन क्षेत्रों पर अधिक असर देखने को मिल सकता है जहां राजा भैया का प्रभाव काफी अधिक है।

All Rights Reserved to Weekand Times . Website Developed by Prabhat Media Creations.