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यूपी में डगमगा रहा भाजपा का गठबंधन

  • अपना दल और सुभासपा अभी से दिखाने लगे तेवर
  • पीएम मोदी के कार्य क्रम में न जाकर दिया संदेश
  • सीटों को लेकर भाजपा पर दबाव बनाने में जुटे

Sanjay Sharma @WeekandTimes

लखनऊ। बिहार के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी एनडीए में रार शुरू हो गई है। यहां भाजपा की सहयोगी पार्टियां अपना दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने दबाव बनाना शुरू कर दिया है। यही नहीं दोनों दलों के नेताओं ने गाजीपुर और वाराणसी में हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम का बहिष्कार कर भाजपा को साफ संकेत दे दिया है। दोनों दलों के तेवर को देखते हुए भाजपा के दिग्गजों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गई हैं। यदि लोकसभा चुनाव के पहले मामले का निपटारा नहीं किया गया तो दोनों दलों की नाराजगी भाजपा पर भारी पड़ सकती है क्योंकि पूर्वांचल में कम से कम दस लोकसभा सीटों पर इनका खासा प्रभाव है। यदि दोनों दलों ने भाजपा से अलग होने की राह अपना ली तो भाजपा के लिए सपा-बसपा गठबंधन के साथ मुकाबला करने में बेहद मुश्किल का सामना करना पड़ेगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह बिहार की तरह यहां भी अपना राजनीतिक कौशल दिखाते हुए सहयोगियों को अपने साथ रख पाने में सफल होते हैं या नहीं।

…लोकसभा चुनावों की आहट के साथ ही भाजपा ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। हिंदी पट्टी के तीन राज्यों छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में मिली शिकस्त के बाद भाजपा ने अन्य राज्यों पर अपना फोकस कर दिया है। इसमें बिहार और उत्तर प्रदेश उसके खास निशाने पर हैं। उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटें हैं और 2014 के आम चुनाव में यहां से भाजपा 71 और उसकी सहयोगी पार्टी अपना दल ने दो यानी कुल 73 सीटें जीतीं थीं। इसके दम पर भाजपा ने अकेले लोकसभा में बहुमत हासिल कर लिया था। भाजपा को अच्छी तरह पता है कि यदि दोबारा दिल्ली की गद्दी पर आसीन होना है तो उत्तर प्रदेश से अधिक से अधिक सीटें जीतनी होंगी लेकिन जिस तरह भाजपा का रथ रोकने के लिए सपा-बसपा गठबंधन बन रहा है उसने पार्टी के दिग्गजों की नींद उड़ा दी है। इसके अलावा तीन राज्यों में मिली पराजय ने भी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को अंदर तक हिला दिया है। यही वजह है पीएम मोदी ने उत्तर प्रदेश की कमान खुद संभाल ली है। वे यहां के वाराणसी संसदीय क्षेत्र के सांसद भी हैं। पिछले साढ़े चार सालों में उन्होंने वाराणसी समेत प्रदेश के कई जिलों के ताबड़तोड़ दौरे किए हैं। वाराणसी में जबरदस्त तरीके से विकास कार्य कराया है और वाराणसी का लगभग कायाकल्प कर दिया है। भाजपा का फोकस पूर्वांचल और बुंदेलखंड पर भी है। यही वजह है कि पूर्वांचल व बुंदेलखंड पर भाजपा विशेष ध्यान दे रही है। पूर्वांचल में लगातार सौगातों की बरसात की जा रही है। बुंदेलखंड के विकास की तमाम योजनाएं बनाई जा रही हैं। वहीं अब भाजपा के सहयोगी भी सत्ता में अधिक भागीदारी चाहने लगे हैं। सुभासपा के राष्टï्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री होने के बावजूद अपनी ही सरकार के खिलाफ लगातार हमलावर हैं। वहीं अपना दल की अनुप्रिया पटेल भी नाराज हो गई हैं। उनकी यह नाराजगी दिखने लगी है। अपना दल कोटे से मोदी सरकार में मंत्री अनुप्रिया पटेल दिल्ली एयरपोर्ट से वापस लौट गई जबकि उन्हें पिछले दिनों प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए गाजीपुर और वाराणसी में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद रहना था। दूसरी ओर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने भी कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया। वहीं पीएम मोदी ने महाराजा सुहेलदेव के नाम पर डाक टिकट जारी कर राजभरों को सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की। यही नहीं गाजीपुर मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास भी किया। प्रधानमंत्री ने ऐलान किया कि वे पूर्वांचल को मेडिकल हब बनाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान केंद्र का शुभारंभ किया और करीब 278 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं की सौगात वाराणसी को दी। ओमप्रकाश राजभर इस बात से नाराज हैं कि डाक टिकट पर महाराजा सुहेलदेव राजभर का पूरा नाम नहीं अंकित है। उन्होंने आरोप लगाया है कि महाराजा सोहलदेव के साथ राजभर न जोडऩा इतिहास को मिटाने जैसा है। निमंत्रण मिलने के बाद भी ओम प्रकाश राजभर ने गाजीपुर व वाराणसी के कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया।
राजभर को पूर्वांचल में पिछड़ी जातियों के नेता के रूप में जाना जाता है। इनका राजभरों में खासा प्रभाव है। दूसरी ओर अनुप्रिया की पार्टी अपना दल (एस) के अध्यक्ष आशीष पटेल ने बयान दिया कि प्रदेश सरकार लगातार अपना दल के नेताओं की उपेक्षा कर रही है, ऐसे में केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया अब किसी भी सरकारी कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेंगी। यही नहीं अपना दल ने पीएम के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की सीट पर अपनी दावेदारी तक ठोंक दी। इसके अलावा अपना दल ने भाजपा से 9 अन्य सीटों को भी उनकी पार्टी को देने की बात कही है। अपना दल (एस) अध्यक्ष आशीष सिंह पटेल कहना है कि पार्टी ने 2014 के बाद से काफी तरक्की की है और हम इस बार ज्यादा सीटों पर चुनाव लडऩा चाहते हैं। हमने पहले ही 10 लोकसभा सीटों पर चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है, इनमें वाराणसी भी शामिल है। अनुप्रिया पटेल भी भाजपा पर अनदेखी का आरोप लगा रही हैं। अपना दल (एस) एनडीए का महत्वपूर्ण घटक है। केंद्र व प्रदेश की सरकारों में साझीदार दल की नाराजगी बीते 25 दिसंबर को तब उभर कर सामने आई जब सिद्धार्थ नगर में राज्य की मेडिकल कॉलेज के शिलान्यास कार्यक्रम में अनुप्रिया पटेल को आमंत्रित नहीं किया गया। उत्तर प्रदेश में अपना दल (एस) के दो सांसद और नौ विधायक हैं। अपना दल को लगता है भाजपा अनुप्रिया पटेल को सिर्फ मिर्जापुर तक ही सीमित कर देना चाहती है। फिलहाल भाजपा के तमाम सहयोगी मोल भाव करने में जुटे हैं। वे अधिक से अधिक सीट हासिल करना चाहते हैं। दूसरी ओर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महागठबंधन के दरवाजे सभी के लिए खुले रहने की बात कहकर अपना दल को संदेश दे दिया है। कुल मिलाकर भाजपा के सहयोगी दल उसकी राह में कांटे बिछाने में जुटे हैं। ऐसे स्थिति में भाजपा को आगामी लोकसभा चुनाव में अपने सहयोगियों को जोडक़र रखना किसी चुनौती से कम नहीं है।

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