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आवासीय इलाकों में बेतरतीब बने व्यावसायिक प्रतिष्ठïानों से चरमराई यातायात व्यवस्था, जाम से जूझ रहे लोग

  • नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से बनाई जा रहीं इमारतें
  • सडक़ और फुटपाथ का वाहन पार्किंग की तरह हो रहा इस्तेमाल

वीकएंड टाइम्स न्यूज नेटवर्क

लखनऊ। शहर के रिहायशी इलाकों में बेतरतीब तरीके से बनी दुकानें, मॉल्स और व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स के कारण लखनऊ की ट्रैफिक व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। मानकों के विपरीत बिल्डिंगो का निर्माण जारी है। वहीं, इन बिल्डिंगों के सामने फुटपाथ और सडक़ का प्रयोग वाहन पार्किंग के रूप में किया जा रहा है। ट्रैफिक पुलिस के अफसरों का भी मानना है कि अगर मकान में दुकान चलाने पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया तो ट्रैफिक व्यवस्था को संभालना मुश्किल हो जाएगा। इस मामले में ट्रैफिक पुलिस की ओर से कई बार एलडीए को पत्र भी भेजा जा चुका है। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि व्यावसायिक इमारत बनाने या मकान में दुकान खोलने की अनुमति देने से पहले ट्रैफिक पुलिस से एनओसी ली जाए।
नियमों को ठेंगे पर रखकर यहां धड़ल्ले से आवासीय में व्यावसायिक प्रतिष्ठान खोले जा रहे हैं। आलम यह है कि एलडीए ट्रैफिक को नजरअंदाज कर व्यावसायिक भवनों के नक्शे पास कर रहा है। मिश्रित भू-उपयोग की अनुमति भी ट्रैफिक पुलिस की एनओसी के बिना दी जा रही है। लिहाजा गोमतीनगर जैसे नई बसावट वाले इलाके भी जाम की चपेट में आ गए। पत्रकारपुरम चौराहे पर हर समय जाम रहता है। रिंग रोड के आस-पास के क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों की वजह से मुंशीपुलिया से सीतापुर रोड तक लोग घंटों जाम से जूझते हैं। पहले से बनी इमारतों में पार्किंग बंद कर दुकानें बना ली गई हैं। एलडीए की दशकों पुरानी आवासीय योजनाओं में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। घर तोड़ कर दुकानें बनायी जा रही हैं। इनमें पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। तमाम आदेशों के बाद भी एलडीए उन पार्किंगों को रिस्टोर करवाने में नाकाम रहा है। यही नहीं वह नए निर्माण में पार्किंग स्थल सुनिश्चित किए बिना निर्माण की इजाजत दे रहा है। गोमतीनगर में विवेक खंड, विनय खंड, विपिन खंड, विकास खंड, विराम खंड, विभवखंड समेत कई क्षेत्रो में निश्चित अनुपात से ज्यादा दुकानें और ऑफिस खुल चुके हैं। एक आकलन के अनुसार एक व्यावसायिक बिल्डिंग के इर्द-गिर्द सडक़ पर आठ सौ से एक हजार गाडिय़ां रोजाना खड़ी होती हैं। सडक़ों की हालात ऐसी है कि ट्रैफिक का चलना मुश्किल है। ऐसे में सडक़ पर पार्किंग की हालात बेकाबू हो रही है।

नो पार्किंग जोन की भी हालत खराब

हैरानी की बात यह है कि जिन सडक़ों पर नो पार्किंग का बोर्ड लगा है उन सडक़ों के किनारे बने होटल, शो रूम, मॉल्स और अन्य दुकानों के सामने लोग वाहन खड़े कर रहे हैं। मसलन, लालबाग स्थित नगर निगम मुख्यालय के पास चाय, रेस्टोरेन्ट समेत कई होटल संचालित है लेकिन इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। जाम और शहर में आने वाली गाडिय़ों की बात करें तो शहर में 30 लाख से अधिक वाहन फर्राटा भर रहे हैं।

अपील भी बेअसर

जाम से राजधानी को मुक्त कराने के मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी स्थितियां सुधर नहीं रही हैं। जिला प्रशासन ने पिछले दिनों यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए लोगों से अपील की लेकिन यह भी बेअसर साबित हुआ। आज भी लोग यातायात नियमों को ठेंगा दिखाते हुए कहीं भी वाहन पार्क कर रहे हैं।

मामला ठंडे बस्ते में

कुछ साल पहले ट्रैफिक पुलिस ने एलडीए को आठ सौ से ज्यादा प्रतिष्ठानों की सूची सौंपी थी, जिनमें पार्किंग स्पेस पर दुकानें बना ली गई हैं। इनमें हजरतगंज, चारबाग, हुसैनगंज, अलीगंज, विकासनगर और फैजाबाद रोड पर बनीं दुकानें शामिल हैं। सूची मिलने के बाद एलडीए ने उस समय कार्रवाई का आश्वासन दिया था लेकिन समय बीतने के साथ मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया जबकि ट्रैफिक पुलिस ने पत्र में स्पष्ट कहा था कि एलडीए पार्किंग नहीं खाली करवा पा रहा है तो उन प्रतिष्ठानों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाकर, कॉपी दे दे। बावजूद इसके एलडीए आज तक अपने स्तर से कार्रवाई नहीं कर सका, जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है।

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