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भाजपा के गले की फांस बना राम मंदिर

  • सुप्रीम कोर्ट में तारीख पर तारीख से नाराज हुए साधु संत और संघ
  • कुंभ में राम मंदिर पर आर या पार की लड़ाई का एलान करने की तैयारी
  • पीएम मोदी के बयान के बाद मंदिर निर्माण की मांग तेज, चेतावनी भी
  • विपछ के साथ सहयोगी डालो के निशाने पर भी भाजपा

Sanjay Sharma @ WeekandTimes

लखनऊ। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा भाजपा और मोदी सरकार के गले की फांस बनता जा रहा है। पीएम मोदी के कोर्ट के फैसले के बाद ही अध्यादेश या अन्य विकल्पों पर विचार करने वाले बयान से मंदिर निर्माण का मुद्दा एक बार फिर तूल पकड़ चुका है। रही सही कसर सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर विवाद पर एक बार फिर सुनवाई टालकर निकाल दी है। इससे न केवल साधु-संत बल्कि संघ भी नाराज हो गया है। कुंभ में आए संतों ने भाजपा सरकार से मंदिर निर्माण पर फैसला मांगा है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जल्द फैसला नहीं किया गया तो वे अयोध्या कूच कर जाएंगे। दूसरी ओर विपक्ष ने भी भाजपा पर अपने तरकश से चुन-चुनकर तीर छोडऩे शुरू कर दिए हैं। सहयोगी शिवसेना और संघ ने भी मंदिर निर्माण को लेकर भाजपा सरकार के सामने अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है। लोकसभा चुनाव को देखते हुए मंदिर निर्माण भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है। भाजपा को पता है कि यदि इसका समाधान जल्द नहीं निकाला गया तो दांव उल्टा पड़ सकता है।

…..लोकसभा चुनाव के साथ मंदिर निर्माण पर फिर से सियासत शुरू हो गई है। पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में मिली शिकस्त के बाद भाजपा भी सकते में हैं। भाजपा को सबसे अधिक झटका हिंदी पट्टी वाले तीन राज्यों छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश में पराजित होने से लगा है। लोकसभा चुनाव के ठीक पहले इन राज्यों को गंवाना भाजपा के लिए भारी पड़ सकता है। अब भाजपा और उसके सहयोगी दोनों को ही मंदिर का मुद्दा ही नैया पार लगाता दिख रहा है। भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने मंदिर मुद्दे पर भाजपा को अपना स्टैंड क्लीयर करने की चेतावनी दी थी और साफ कर दिया था कि यदि लोकसभा चुनाव से पहले मंदिर का निर्माण नहीं हुआ तो दोनों दलों को भारी नुकसान होगा। यही नहीं शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे दो दिन की अपनी अयोध्या यात्रा पर आए थे। यहां उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द राम मंदिर निर्माण की मांग की थी। इसके अलावा विहिप ने धर्मसंसद आयोजित कर सरकार पर दबाव बनाने की पूरी कोशिश की थी। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सभा में भी मंदिर निर्माण को लेकर नारे लगाए गए थे। खुद मुख्यमंत्री ने साधु-संतों से मुलाकात कर मंदिर निर्माण का आश्वासन दिया है। दूसरी ओर विपक्ष ने इस मामले पर भाजपा पर जमकर निशाना साधा है। सपा और बसपा ने मंदिर निर्माण को भाजपा का चुनावी स्टंट करार दिया है। साधु-संतों ने भी कोर्ट के फैसले में देरी को देखते हुए सरकार पर अध्यादेश जारी कर मंदिर निर्माण कराने का दबाव बढ़ा दिया है। भाजपा की केंद्र सरकार पर लगातार बढ़ रहे दबाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ताजा बयान ने सियासत को और गरमा दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि अदालती प्रक्रिया खत्म होने के बाद ही सरकार अध्यादेश या अन्य विकल्पों पर विचार करेगी और कोर्ट में कांग्रेस मंदिर निर्माण में रोड़े अटका रही है। संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने पीएम के बयान को मंदिर निर्माण की दिशा में सकारात्मक कदम बताया। वहीं संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर ही बनना चाहिए। रही सही कसर सुप्रीम कोर्ट ने निकाल दी। सुप्रीम कोर्ट ने चार जनवरी को एक बार फिर मंदिर विवाद पर सुनवाई टाल दी। कोर्ट ने कहा कि इस मामले पर तीन जजों की बेंच सुनवाई करेगी। इसका गठन जल्द किया जाएगा। इन सारे घटनाक्रम ने न केवल हिंदू संगठनों बल्कि साधु-संतों को भी नाराज कर दिया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष मंहत नरेन्द्र गिरी ने कहा कि कुंभ मेले में होने वाली विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) की धर्म संसद में देश भर से जुटे साधु-संत राम मंदिर के निर्माण पर विचार-विमर्श करेंगे। उन्होंने कहा 31 जनवरी और एक फरवरी को होने वाली विहिप की धर्म संसद में नागा संन्यासियों के अयोध्या कूच की रणनीति भी तैयार हो जाएगी। महंत नरेन्द्र गिरी ने कहा है कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अयोध्या विवाद के मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी और सुन्नी वक्फ बोर्ड के साथ लगातार सम्पर्क में है। साथ ही सुलह समझौते से अयोध्या विवाद का हल निकलाने की कोशिश भी की जा रही है। महंत ने कहा कि भाजपा नेताओं को यह भ्रम है कि विकास के नाम पर देश की जनता ने उन्हें वोट दिया है। भाजपा यदि राम मंदिर मुद्दे को उठा लेती है और निर्माण शुरू करा देती है तो देश में अगले पचास साल तक राज करेगी लेकिन अगर मंदिर का निर्माण शुरू नहीं किया तो ये उसका आखिरी साल होगा। कुल मिलाकर मोदी सरकार और भाजपा के सामने राम मंदिर पर आर-पार की स्थिति बनती जा रही है। यूपी में सपा-बसपा गठबंधन को देखते हुए भाजपा को अच्छी तरह पता है कि यदि मंदिर मुद्दे पर जल्द कोई निर्णय नहीं लिया गया तो स्थितियां खराब हो जाएंगी। यह देखना दिलचस्प होगा भाजपा नेतृत्व इसको किस प्रकार हैंडिल करता है।

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