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भारी पड़ी सेना-सरकार व प्रतिनिधियों की लापरवाही

देहरादून। राजभवन और मुख्यमंत्री के आवास से महज दो किमी की दूरी पर स्थित बीरपुर-घंघोड़ा पुल आखिर जब तड़के अंधेरे में टौंस नदी में जा समाया तो ज्यादातर लोग बिस्तर पर ही थे। पुल अपने साथ एक डम्पर और मोटर साइकिल पर सवार दो लोगों को भी अपने साथ ले गया। बाइक पर सवार दो की मौत तत्काल हो गई। सेना की ब्रिगेड और कई बटालियनों के साथ ही चांदमारी, बाणगंगा, जैतनवाला, धौलास, पौंधा, कान्डली गांव और ऐतिहासिक संतला देवी मंदिर जाने के लिए यही इकलौता पुल था, जो सभी के लिए था। इन सभी इलाकों को शहर और गढ़ी-डाकरा कैंट को भी यही पुल जोड़ता था। सालों से मांग चली आ रही थी कि पुल जर्जर और खतरनाक हो चुका है। इसका निर्माण किया जाए। मांगों पर कार्रवाई में सरकार और सेना ने सुस्ती बरती और इसका नतीजा हादसे के तौर पर सामने आया।
इस हादसे के बाद सेना ने जहां चुप्पी साध ली है। वहीं वह दबे स्वर से ये भी सफाई दे रही है कि इस पुल से सेना का कोई मतलब नहीं था। जिस स्थान पर पुल था, वह सिविल लोगों और सेना के अधिकार वाले इलाके से से जुड़ा है। छावनी प्रशासन का उस पर सीधा अधिकार है। छावनियां सीधे सेना के अधिकार क्षेत्र में आती हैं। इसलिए सेना अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकती है। राज्य सरकार ने पुल के पुनर्निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार कर एनओसी देने को सेना के सब एरिया को इसे भेजा है, लेकिन दोनों तरफ से लापरवाही हुई। सेना ने एनओसी में दिलचस्पी नहीं दिखाई और सरकार ने प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने में दौड़ धूप नहीं की। स्थानीय विधायक गणेश जोशी और कैंट बोर्ड के उपाध्यक्ष या सदस्यों ने भी इस दिशा में कोई सक्रियता जरुरत के अनुसार नहीं दिखाई।
पुल के ध्वस्तीकरण की दिक्कत तब ज्यादा सामने आएगी जब सर्दियों की छुट्टियों के बाद स्कूल खुलेंगे। हालांकि सेना के अधिकार क्षेत्र वाला एक रास्ता गजियावाला-सप्लाई मार्ग पर खोल दिया गया है लेकिन वह बहुत दूर और उल्टा पड़ता है। हादसे के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दु:ख जताया। अब पुल के निर्माण के लिए सरकार तेजी लाने की कोशिश कर रही है। मसूरी विधायक गणेश जोशी ने जिला प्रशासन, सेना, कैंट बोर्ड एवं लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों संग वीरपुर पुल का निरीक्षण किया। ये तय हुआ कि तीन सप्ताह के अन्दर वीरपुर में वैली ब्रिज का निर्माण कर लिया जाऐगा, जिसमें कार, स्कूटर एवं पैदल लोग आसानी से आवागमन कर सकेंगे।
जोशी ने सेना एवं लोनिवि के अधिकारियों से कहा कि जनहित की सुविधा के देखते हुए वैली ब्रिज का निर्माण किया जाना अति आवश्यक है। उन्होंने सैन्य अधिकारियों से लोक निर्माण विभाग को पूरा सहयोग देने की अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से स्वीकृत 32 मीटर स्पान के 237 लाख की लागत से बनने वाले डबल लेन पुल का निर्माण कार्य भी अतिशीघ्र प्रारम्भ हो जाएगा। उन्होंने माना कि पुल ध्वस्त होने से स्थानीय लोग परेशान हैं और स्थानीय कारोबार प्रभावित होने के कारण कारोबारी बेचैन हैं। निरीक्षण के दौरान उत्तराखण्ड सब एरिया के जीओसी मेजर जरनल भास्कर कलिता, डिप्टी जीओसी बिग्रेडियर एचएस जग्गी, अपर जिलाधिकारी वीर सिंह बुंदियाल, उप जिलाधिकारी सदर प्रत्युष सिंह, एडम कमाण्डेट वीरेन्द्र सिंह, कर्नल क्यू एसके मल्हौत्रा, लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता एससी अग्रवाल, अधिशासी अभियंता जेएस चौहान, सीईओ कैंट जाकिर हुसैन, देवेन्द्र पाल सिंह सहित कई अधिकारी एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
विधायक जोशी ने शोकाकुल परिवारों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के निर्देशों के बाद सरकार द्वारा प्रत्येक मृत व्यक्ति के आश्रित को दो-दो लाख एवं घायलों को पचास-पचास हजार की धनराशि दिये जाने की घोषणा की है। विधायक जोशी ने घायलों व्यक्तियों के परिवारजनों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम पूछा और सरकार की ओर से मदद किये जाने का आश्वासन दिया। विधायक जोशी ने कहा कि सरकार जनता के साथ है और उनके हर सुख-दुख में साथ देने को तैयार है।

 

 

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