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छवि दुरुस्त करने के लिए अब अपराधों के आंकड़ों में खेल कर रही राजधानी पुलिस

  • कम अपराध के दावों की खुली पोल, रिपोर्ट में नहीं पेश किए सभी आंकड़े
  • पुलिस के पास नहीं छेड़छाड़, चेन व पर्स स्नेचिंग जैसी वारदातों के रिकार्ड
  • कुल अपराधों की संख्या से अपराधों में नहीं लगती दिख रही लगाम

वीकएंड टाइम्स न्यूज नेटवर्क

लखनऊ। अपराध पर नियंत्रण लगानें में नाकाम राजधानी पुलिस अब आंकड़ों की बाजीगरी दिखाने लगी है। लखनऊ की हाईटेक पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में केवल उन्हीं आंकड़ों को दर्शाया है जो पिछले साल की तुलना में कम हुए हैं। यही नहीं इन आंकड़ों में छेड़छाड़, पर्स व चेन स्नेचिंग जैसी वारदातों के आंकड़ें नहीं उपलब्ध कराए हैं। हालांकि इस खेल के बाद भी पुलिस पिछले साल के कुल अपराधों के आंकड़ों से कम आंकड़े पेश नहीं कर पाई है।
राजनीति में झूठ और सच चलता है, लेकिन यदि झूठ बोलने का काम पुलिस विभाग भी करने लगे तो इनके खिलाफ कार्रवाई कौन करेगा? कुछ ऐसा ही मामला है राजधानी पुलिस के आंकड़ों में दिखाई पड़ रहा है। अपराध को कम दिखाने के लिए पुलिस हमेशा खेल करती रही है। राजधानी पुलिस भी ऐसा ही खेल कर अपनी छवि चमकाने में जुटी है। लगातार बढ़ रहे अपराध को रोकने में जब पुलिस विफल रही तो उसने अपराध के आंकड़ों में खेल कर दिया। इन आंकड़ों में छेड़छाड़, चेन और पर्स स्नेचिंग जैसी संगीन अपराधों के आंकड़े ही नहीं है। पुलिस ने आंकड़े भी जारी कर दिए ताकि ऊपर के अधिकारी व मुख्यमंत्री स्वयं यह जान सकें कि लखनऊ में अपराध काफी कम हो गए हैं। पुलिस विभाग ने वर्ष 2017 और 2018 की तुलनात्मक रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में अधिकारियों के मुताबिक हत्या, बलात्कार, चोरी, लूट सहित अन्य अपराधों में इस बार कमी आई है जबकि फिरौती के मामलों में कोई वृद्घि नहीं हुई है। पुलिस के अनुसार पिछले साल की तुलना में अपराध की कमी न के बराबर हुई है। दरअसल, राजधानी पुलिस के अधिकारियों ने जो आंकड़े पेश किए हैं उनमें 2018 में ऐसे कई मामले हैं जिन्हें दर्ज तक नहीं किया गया है जबकि पुलिस ने वर्ष 2018 में हुए कुल अपराधों से वर्ष 2017 को दिखाते हुए बाजी मारी है। इतना ही नहीं जिस अपराध में राजधानी पुलिस का ग्राफ ऊपर हैं उसके आंकड़े विभाग के पास नहीं हैं। राजधानी पुलिस के पास चेन स्नेचिंग, पर्स स्नेचिंग, महिला उत्पीडऩ, छेडख़ानी जैसे संगीन अपराधों के आंकड़े उपलब्ध नहीं है। कुल मिलाकर राजधानी पुलिस ने आंकड़ों में खेल किया है। वहीं 2017 में हुए कुल अपराध की संख्या 19512 है जबकि 2018 में हुए कुल अपराधों की संख्या 19667 है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुलिस अपराधिक आंकड़ों में खेल कर रही है।

राजधानी पुलिस अपराधियों पर नकेल कसने के लिए कार्य कर रही है। अपराध रोकने और लोगों की सुरक्षा के लिए राजधानी पुलिस हमेशा तैयार है। 2017 की तुलना में वर्ष 2018 में गंभीर अपराध कम हुए हैं और इसे भी कम करने की कोशिश की जा रही है।
कलानिधि नैथानी, एसएसपी

ऐसे किया खेल

पुलिस के मुताबिक वर्ष 2017 में कुल हत्या 115 हुई हैं जबकि वर्ष 2018 में 111 हत्याएं हुई हंै। पुलिस के मुताबिक इसमें 8.70 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं पुलिस के मुताबिक वर्ष 2017 में बलात्कार के कुल मामले 163 दर्ज किए गए थे जबकि वर्ष 2018 में 143 दर्ज हुए हंै। इन सब के अलावा 2018 में जिन अपराधों ने ग्राफ बढ़ाया है उसका पुलिस के पास डाटा ही नहीं है।

 

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