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अधर में लटकी हाउस और वाटर टैक्स बिल को जोडऩे की योजना, हाथ पर हाथ धरे बैठे जिम्मेदार

  • जल संस्थान का डाटा नहीं हो सका ऑनलाइन
  • कर वसूली में सुविधा के लिए लिया गया था निर्णय

वीकएंड टाइम्स न्यूज नेटवर्क

लखनऊ। जल संस्थान में वाटर टैक्स का डाटा ऑनलाइन न होने के चलते फिलहाल हाउस टैक्स और वाटर टैक्स का बिल एक नहीं हो पाएगा। अभी इस काम में तीन माह से ज्यादा समय लगेगा। हालांकि जल संस्थान के अफसरों का दावा है कि अप्रैल 2019 तक उनका टैक्स भी ऑनलाइन हो जाएगा। दरअसल, जलकल और नगर निगम में अलग-अलग टैक्स जमा होता है। करदाताओं को सहुलियत और निगरानी सिस्टम को कारगर बनाने के लिए यह फैसला लिया गया था कि हाउस टैक्स के बिल में जलकर और यूजर चार्ज का बिल भी जोड़ दिया जाएगा। नगर निगम का हाउस टैक्स सिस्टम पहले से ऑनलाइन था। नगर निगम की ओर से सारी तैयारियां पूरी है वहीं जल संस्थान अभी तक यह व्यवस्था ऑनलाइन नहीं कर सका है।
शहर में करीब छह लाख गृहकर दाता है जो वाटर टैक्स भी देते हैं। दोनों ही बिल जमा करने के लिए जनता को अलग-अलग टैक्स जमा करने के लिए विभागों के चक्कर लगाने पड़ते हैं जबकि शासन में करीब 8 साल पहले नगर निगम में जलकल विभाग का विलय कर दिया था। पर इससे अंतर नहीं आया दोनों विभाग का कामकाज पहले की तरह चल रहा है। जलकल विभाग में महाप्रबंधक का शासन चलता है और उनका अपना बजट भी है। जलकल और सीवर कर की वसूली वह खुद करता है। उसका बिल भी अलग जारी होता है। बिल की कमियां दूर कर गृहकर और जलकर का बिल एक करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन मामला इस बात पर फंसा हुआ है कि अभी तक जल संस्थान में हाउस टैक्स का बिल ऑनलाइन नहीं हो पाया। शहर में करीब छह लाख लोग जलकर जमा करते हैं। इन सभी का डाटा ऑनलाइन किया जाना है। हालांकि इसके लिए जल संस्थान में काम चल रहा है लेकिन अभी भी इसके लिए तीन माह से अधिक का समय लगने की बात कही जा रही है। नगर निगम के अफसरों का कहना है कि अगर बिल एक होने की नई व्यवस्था लागू हो जाती है तो एक ही जगह नामांतरण की आवश्यकता होगी। भवन स्वामी जैसे गृहकर का नामांतरण कराएगा। जलकर का नामांतरण अपने आप हो जाएगा। इस व्यवस्था के लागू होने से समय और पैसे दोनों की ही बचत होगी।

विभाग के चक्कर काट रहे लोग
हाउस और वाटर टैक्स को एक नहीं किए जाने से शहरवासियों को परेशानी हो रही है। करदाता टैक्स जमा करने के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर
काटने को मजबूर हो रहे है। वहीं अफसरों का दावा है कि यह व्यवस्था जल्द लागू होगी।

नगर निगम की हाउस टैक्स व्यवस्था ऑनलाइन है लेकिन जल संस्थान में अभी वाटर टैक्स की व्यवस्था ऑनलाइन नही हो सकी है इसलिए जब तक यह व्यवस्था ऑनलाइन नहीं हो जाती तब तक दोनों बिल एक नहीं हो पाएंगे।
अशोक सिंह, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी, नगर निगम

व्यवस्था लागू करने के लिए काम चल रहा है। इसमें अभी वक्त लगेगा।
एसके वर्मा, महाप्रबंधक जल संस्थान

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