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भारत की रहस्यमयी गुफाओं का रहस्य

बबिता चतुर्वेदी

रंभिक मानव गुफा में रहता था? उल्लेखनीय है कि वैज्ञानिकों ने दुनिया की सबसे प्राचीन पहाड़ी अरावली और सतपुड़ा की पहाडिय़ों को माना है। यूनान के लोगों की धारणा थी कि उनके देवता गुफाओं में ही रहते थे। इसी प्रकार रोम के लोगों का मानना था कि गुफाओं में परियां तथा जादू-टोना करने वाले लोग रहते हैं। फारस के लोग मानते थे कि गुफाओं में देवताओं का वास होता है। आज का विज्ञान कहता है कि गुफाओं में एलियंस रहते थे। गुफाओं का इतिहास सदियों पुराना है। पाषाण युग में मानव गुफाओं में रहता था।
आमतौर पर पहाड़ों को खोदकर बनाई गई जगह को गुफा कहते हैं, लेकिन गुफाएं केवल पहाड़ों पर ही निर्मित नहीं होती हैं यह जमीन के भीतर भी बनाई जातीं और प्राकृतिक रूप से भी बनती हैं। प्राकृतिक रूप से जमीन के नीचे बहने वाली पानी की धारा से बनती हैं। ज्वालामुखी की वजह से भी गुफाओं का निर्माण होता है। दुनिया में अनेक छोटी-बड़ी गुफाएं हैं, जो किसी अजूबे से कम नहीं हैं।
अफगानिस्तान के बामियान से भीमबैठका तक और अमरनाथ से महाबलीपुरम तक भारत में हजारों गुफाएं हैं। हिमालय में तो अनगिनत प्राकृतिक गुफाएं हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि वहां साधु-संत ध्यान और तपस्या करते हैं। आइए जानते हैं भारत की रहस्यमयी गुफाओं के बारे में, जो अब रखरखाव के अभाव में अपने अस्तित्व संकट से जूझ रही हैं। भारत सरकार को चाहिए कि वह इस पर ध्यान दें।
बाघ की गुफाएं
बाघ की गुफाएं प्राचीन भारत के स्वर्णिम युग की अद्वितीय देन हैं। मध्यप्रदेश के प्राचीन स्थल धार जिले में स्थित बाघ की गुफाओं को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। धार, इंदौर शहर से 60 किलोमीटर की दूरी पर ही है। बाघिनी नामक छोटी-सी नदी के बाएं तट पर और विंध्य पर्वत के दक्षिण ढलान पर स्थित इन गुफाओं का इतिहास भी रहस्यों से भरा है।
बाघ-कुक्षी मार्ग से थोड़ा हटकर बाघ की गुफाएं बाघ ग्राम से 5 मील दूर हैं। यह स्थल उस विशाल प्राचीन मार्ग पर स्थित है, जो उत्तर से अजंता होकर सुदूर दक्षिण तक जाता है। इसमें कुल 9 गुफाएं हैं जिनमें से 1, 7, 8 और 9वीं गुफा नष्टप्राय है तथा गुफा संख्या 2 पाण्डव गुफा के नाम से प्रचलित है जबकि तीसरी गुफा हाथीखाना और चौथी रंगमहल के नाम से जानी जाती है। इन गुफा का निर्माण संभवत: 5वी-6वीं शताब्दी ई. में हुआ होगा।
माना जाता है कि इन गुफाओं का निर्माण भगवान बुद्ध की प्रतिदिन होने वाली दिव्यवार्ता को प्रतिपादित करने हेतु निर्मित और चित्रित किया गया था। बाघ की गुफा संख्या 1 से 9 तक में कक्ष, स्तंभ, लंबे बरामदे, कोठरियां, शैलकृत स्तूप, बुद्ध प्रतिमा, बोधिसत्व, अवलोकितेंर मैत्रेय, नदी, देवियों आदि का अंकन है। बाघ की गुफा संख्या 2, 3, 4, 5, एवं 7 में भित्तिचित्र हैं, गुफा में 6 दृश्यों का अंकन है। बाघ गुफाओं के चित्रों की शैली अजंता के समान है तथा ये अजंता के समकालीन हैं।
बई में कई गुफाएं हैं। उनमें से एलीफैंटा, महाकाली और कन्हेरी की गुफाएं प्रसिद्ध हैं। महाकाली की गुफा मुंबई के अंधेरी वेस्ट में बौद्धमठ के पास है, जबकि कन्हेरी की गुफा मुंबई के पश्चिम में बसे बोरीवली क्षेत्र में स्थित है। महाकाली की गुफाएं 19 गुफाओं को मिलाकर बनाई गई हैं। माना जाता है कि लगभग 1 शताब्दी से 6वीं के शताब्दी के मध्य इसका निर्माण हुआ था। महाकाली गुफा के बीच में एक शिव मंदिर है। यहां का शिवलिंग 8 फिट ऊंचा है। महाकाली गुफा में 9वीं गुफा सबसे बड़ी है, इस गुफा में बुद्ध की पौराणिक कथा और उनके 7 चित्र बने हुए हैं। कन्हेरी की गुफा की लंबाई 86 फुट, चौड़ाई 40 फुट और ऊंचाई 50 फुट है। इसमें 34 स्तंभ लगाए गए हैं। कन्हेरी की गणना पश्चिमी भारत के प्रधान बौद्ध दरीमंदिरों में की जाती है।
बेलम गुफाएं
आंध्र में ही कुरनूल से 106 किलोमीटर दूर बेलम गुफाएं स्थित हैं। मेघालय की गुफाओं के बाद ये भारतीय उपमहाद्वीप की दूसरी सबसे बड़ी प्राकृतिक गुफाएं हैं। इन्हें मूल रूप से तो 1854 में एचबी फुटे ने खोजा था लेकिन दुनिया के सामने 1982 में यूरोपीय गुफा विज्ञानियों की एक टीम ने इन्हें मौजूदा स्वरूप में पेश किया।
पहाडिय़ों में स्थित बोरा गुफाओं के विपरीत बेलम गुफाएं एक बड़े से सपाट खेत के नीचे स्थित हैं। जमीन से गुफाओं तक 3 कुएं जैसे छेद हैं। इन्हीं में से बीच का छेद गुफा के प्रवेश द्वार के रूप में इस्तेमाल होता है। लगभग 20 मीटर तक सीधे नीचे उतरने के बाद गुफा जमीन के नीचे फैल जाती हैं। इनकी लंबाई 3,229 मीटर है।
उंदावली, विजयवाड़ा
की गुफा
विजयवाड़ा आंध्र प्रदेश प्रान्त का एक शहर है। विजयवाड़ा आंध्र प्रदेश के पूर्व-मध्य में कृष्णा नदी के तट पर स्थित है। दो हजार वर्ष पुराना यह शहर बैजवाड़ा के नाम से भी जाना जाता है। यह नाम देवी कनकदुर्गा के नाम पर है, जिन्हें स्थानीय लोग विजया कहते हैं। यहां की गुफाओं में उंद्रावल्ली की प्रमुख गुफा है, जो सातवीं सदी में बनाई गई थी। शयन करते विष्णु की एक शिला से निर्मित मूर्ति यहां की कला का श्रेष्ठ नमूना है। विजयवाड़ा के दक्षिण में 12 किलोमीटर दूर मंगलगिरि की पहाड़ी पर विष्णु के अवतार भगवान नरसिंह का विख्यात मंदिर है।
जम्मू-कश्मीर की गुफाएं
कश्मीर में तो अमरनाथ और वैष्णो देवी की गुफा में हिन्दूजन दर्शन के लिए जाते ही हैं लेकिन कश्मीर में ऐसी चार गुफाएं हैं, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि उनका दूसरा सिरा 4000 हजार किलोमीटर दूर रूस तक जाता है। इतना ही नहीं, इन गुफाओं के बारे में और भी ऐसे रहस्य हैं, जिनकी सच्चाई सदियों बाद भी सामने नहीं आई।
पीर पंजाल की गुफा
जम्मू-कश्मीर के पीर पंजाल में एक गुफा है जहां एक शिवलिंग रखा है। इसका नाम पीर पंजाल केव रखा गया है।
डुंगेश्वरी गुफा, बिहार
सुजात नामक स्थान पर डुंगेश्वरी गुहा मंदिर को महाकाल गुफाओं के नाम से भी जाना जाता है जो बोधगया (बिहार) के उत्तर-पूर्व में 12 किमी की दूरी पर स्थित है। यहां तीन पवित्र बुद्ध गुफाएं हैं। इन गुफाओं में भगवान बुद्ध ने ध्यान लगाया था। भगवान बुद्ध ने बोधगया आने के पूर्व छह वर्षों तक कठोर निग्रह के साथ इन गुफाओं में तपस्या की थी। यह माना जाता है कि भगवान बुद्ध को यहीं से मध्यम मार्ग का ज्ञान प्राप्त हुआ था। दो छोटे मंदिर इस घटना की याद मे यहां बनाए गए हैं। मूलत: यह हिन्दू धर्म से जुड़ी गुफाएं हैं जो हिंदू देवी डुंगेश्वरी नाम से विख्यात है।
अर्जुन गुफा
कुल्लू से 5 किलोमीटर की दूरी पर जगतसुख स्थान है। जगतसुख कुल्लू के राजा जगत सिंह की राजधानी थी। इस स्थान पर बिम्बकेश्वर और गायत्री देवी के मंदिर विशेष आकर्षक हैं। इसके नजदीक हमटा नाम स्थान है। यहां प्रसिद्ध अर्जुन गुफा है। इस गुफा में अर्जुन की विशाल प्रतिमा है। यहां से 2 किलामीटर दूर त्रिवेणी नामक स्थान है,जहां व्यास गंगा, धोमाया गंगा और सोमाया गंगा का संगम है। इससे 1 किलोमीटर की दूरी पर गर्म पानी का चश्मा कलात कुंड है और कपिल मुनि का आश्रम भी यहां है। यहीं पर टोबा नामक प्रसिद्ध गुफा मठ भी है।
पीतलखोरा की गुफा
पीतलखोरा की गुफा महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित है। यहां पत्थर की चटïï्टानों को काटकर कुल 13 गुफाएं बनाई गई है। गुफा संख्या 3 चैत्य गृह और गुफा संख्या 4 विहार हैं। यहां स्थित 37 अठपहलू स्तंभों में से 12 बचे हैं, तथा शेष ये स्तूप विनष्ट हो गए हैं। इसका निर्माण सम्भवत: द्वितीय शताब्दी ईसा पूर्व में होने का अनुमान है।
उदयगिरी और खंडगिरि की गुफाएं
उदयगिरि और खंडगिरि ओडीशा में भुवनेश्वर के पास स्थित दो पहाडिय़ां हैं। इन पहाडिय़ों में आंशिक रूप से प्राकृतिक व आंशिक रूप से कृत्रिम गुफाएं हैं जो पुरातात्विक, ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व की हैं। भुवनेश्वर से 8 किमी दूर स्थित इन दो पहाडिय़ों का वातावरण काफी निर्मल है। उदयगिरि और खंडगिरि में कभी प्रसिद्ध जैन मठ हुआ करते थे। इन मठों को पहाड़ी की चोटी पर चटï्टानों को काट कर बनाया गया था। इन्हीं मठों को आज गुफा के रूप में देख सकते हैं। ये मठ काफी प्रचीन थे और इसका निर्माण ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी में किया गया था। इन में से कुछ गुफाओं में नक्काशी भी की गई है। यहां एक दो तल्ला गुफा भी है जिसे रानी गुफा के नाम से जाना जाता है। इस गुफा को ढेरों नक्काशियों से सजाया गया है। यहां एक और बड़ी गुफा है, जिसे हाथी गुफा के नाम से जाना जाता है। उदयगिरि में जहां 18 गुफाएं हैं, वहीं खंडगिरि में 15 गुफाएं हैं।
पहली और दूसरी गुफाएं तातोवा गुफा 1 और 2 कहलाती हैं, जो प्रवेश स्थल पर रक्षकों और दो बैलों तथा सिंहों से सुसज्जित है। प्रवेश तोरण पर तोते की आकृतियां हैं। गुफा संख्या 3 अनंत गुफा कहलाती है, जहां स्त्रियों, हाथियों, खिलाडिय़ों और पुष्प उठाए हंसों की मूर्तियां हैं। गुफा संख्या 4 तेन्तुली गुफा है। गुफा संख्या 5 खंडगिरि गुफा दो मंजिली है, जो सामान्य तरीके से काटी गई हैं। गुफा संख्या 12, 13 और 14 के कोई नाम नहीं है। गुफा संख्या 6 से गुफा संख्या 11 के नाम हैं- ध्यान गुफा, नयामुनि गुफा, बाराभुजा गुफा, त्रिशूल गुफा, अम्बिका गुफा और ललतेंदुकेसरी गुफा। गुफा संख्या 11 की पिछली दीवार पर जैन तीर्थंकरों, महावीर और पाश्र्वनाथ की नक्काशी वाली उभरी हुई मूर्तियां हैं। गुफा संख्या 14 एक साधारण कक्ष है, जिसे एकादशी गुफा के नाम से जाना जाता है। उदयगिरी की गुफा ओडीशा की राजधानी भुवनेश्वर की उदयगिरी पहाडिय़ों में स्थित यह गुफा भी विश्व प्रसिद्ध है। इस गुफा के साथ ही यहां पर कई रहस्यमयी और अदï्भुत गुफाएं भी हैं। इन्हीं में से एक है टाइगर केव। दरअसल इस गुफा का प्रवेश द्वार शेर के मुख की तरह बना हुआ है, इसी वजह से इसे टाइगर केव या शेर गुफा कहा जाता है। उदयगिरी की पहाडिय़ों को सूर्योदय पर्वत भी माना जाता है और यहां से सूर्योदय का नजारा बेहद खास होता है।
बादामी गुफा
गुफा के अन्दर कई मंदिर होने से आकर्षक और भव्य दिखती है यह गुफा। कर्नाटक में स्थित बादामी गुफा के अन्दर कई मंदिर हैं। इतिहासकारों के अनुसार बादामी गुफा पांचवीं सदी की है। इन गुफाओं को देखने कश लिए आज भी पर्यटक पहुंचते हैं।

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