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रामजी करेंगे बेड़ा पार!

  • मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी गैरविवादित जमीन
  • राम मदिर विवाद पर सुनबाई के टालते रहने पर चला नया दांव
  • धर्म संसद के बहाने कण्ट्रोल में जुटे विहिप और संघ
  • साधु संन्तो की नाराजगी और बिपक्षी गठबंधन से सहमी भाजपा

Sanjay Sharma @WeekandTimes

लखनऊ। लोक सभा चुनाव की आहट के साथ राम मंदिर का मुद्दा फिर गर्म हो गया है। मंदिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में लगातार सुनवाई टलने से साधु-संतों के साथ हिंदू संगठन और संघ भी नाराज हैं। सभी मोदी सरकार पर अध्यादेश लाकर मंदिर निर्माण का दबाव बना रहे हैं। विपक्ष भी इस मामले पर मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहा है। वहीं प्रियंका गांधी के यूपी के सियासी अखाड़े में उतरने और सपा-बसपा गठबंधन ने भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। लिहाजा भाजपा एक बार फिर मंदिर मुद्दे के सहारे दिल्ली की गद्दी तक पहुंचने की तैयारी में जुट गई है। मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करने के लिए मोदी सरकार ने नया दांव चल दिया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अयोध्या की गैरविवादित जमीन सौंपने की मांग की है। दूसरी ओर विहिप प्रयागराज में धर्म संसद आयोजित कर मंदिर मुद्दे को हवा देने और डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। इस मामले में संघ भी विहिप का साथ दे रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि भगवान राम लोक सभा चुनाव में इस बार भाजपा का बेड़ा पार लगाते है या नहीं।  

…..लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आता जा रहा है, सियासत रोज रंग बदलती दिख रही है। उत्तर प्रदेश में सियासत का यह रंग कुछ ज्यादा ही चटख है। इसकी वजह यहां की 80 लोक सभा सीटें हैं और यह कहा जाता है कि दिल्ली का रास्ता यूपी से होकर जाता है। इन सीटों पर न केवल भाजपा और सपा-बसपा गठबंधन की नजरें टिकी हुई हैं बल्कि कांग्रेस भी पूरे दमखम के साथ जोर आजमाइश में लगी हुई है। सपा-बसपा गठबंधन से किनारे किए जाने के बाद कांग्रेस ने यहां की सभी सीटों पर चुनाव लडऩे का ऐलान कर दिया था। हालांकि वह मध्य प्रदेश और राजस्थान में सरकार बनाने में बसपा और सपा का समर्थन हासिल कर चुकी है। कांग्रेस ने यूपी में अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक दांव चल दिया है। कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को पार्टी का महासचिव बनाने के साथ पूर्वी यूपी की कमान भी सौंप दी है। प्रियंका गांधी को इस क्षेत्र का प्रभारी बना दिया है। कांग्रेस को उम्मीद है कि प्रियंका के चुनाव मैदान में उतरने से यूपी में उसको फायदा होगा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भी बढ़ेगा। इसमें दो राय नहीं कि प्रियंका के राजनीति में उतरने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जोश बढ़ा है बल्कि यहां पार्टी को लोकसभा चुनाव में संजीवनी मिलने की संभावना भी बढ़ गई है। इससे पहले सपा-बसपा गठबंधन ने भाजपा के सामने कड़ी चुनौती पेश कर दी है। जातीय समीकरणों को देखते हुए कांग्रेस से अधिक सपा-बसपा गठबंधन भाजपा के लिए भारी पड़ सकता है। भाजपा इस चुनौती से निपटने के लिए एक ओर विकास कार्यों को जनता के सामने रख रही है वहीं दूसरी ओर वह राम मंदिर मुद्दे को हवा देने पर लगी है। भाजपा को उम्मीद है कि यदि राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो गया तो उसे इसका फायदा यूपी में मिलेगा। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने यहां की अस्सी सीटों में से 71 सीटों पर कब्जा कर लिया था और दो सीटें उसके सहयोगी अपना दल ने जीती थी। इसी सफलता के कारण भाजपा केंद्र में सरकार बनाने में सफल रही थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह दोनों की नजरें यूपी की इन सीटों पर लगी हुई है। भाजपा एक बार फिर 2014 के लोकसभा चुनाव परिणामों को दोहराना चाहती है। यूपी में बने सियासी समीकरणों ने भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश में उसके सहयोगी दल भी विरोध का स्वर मुखर करने लगे हैं। अपना दल और सुभासपा ने भाजपा से गठबंधन को लेकर नाखुशी जतानी शुरू कर दी है। कुल मिलाकर भाजपा को विपक्ष के साथ अपनों की चुनौती का भी सामना करना पड़ रहा है। यही वजह है कि अब भाजपा पूरी तरह राम मंदिर के मुद्दे के सहारे यूपी का किला फतह करना चाहती है। सुप्रीम कोर्ट में मंदिर विवाद पर सुनवाई टलती देखकर मोदी सरकार ने नया दांव चल दिया है। चुनाव से ठीक पहले सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अयोध्या में गैरविवादित जमीन को लौटाने की मांग की है। गौरतलब है कि 70 एकड़ की जमीन पर महज 2.77 एकड़ जमीन ही विवादित है। भाजपा सरकार को उम्मीद है कि यदि सुप्रीम कोर्ट उसकी मांग मान लेती है तो मंदिर निर्माण का काम शुरू हो जाएगा और वह जनता को मंदिर निर्माण के वादे को पूरा करने के नाम पर अपने पक्ष में वोट देने की अपील कर सकेगी। हालांकि विपक्ष ने इसे राजनीतिक स्टंट करार दिया है। बावजूद यदि मंदिर निर्माण का काम शुरू हो गया तो इसका फायदा भाजपा को मिलना तय है। इसी बीच मंदिर मुद्दे पर भाजपा के डैमेज कंट्रोल के लिए विहिप और संघ भी जुट गया है। विहिप ने धर्म संसद बुलाकर इस मुद्दे को हवा दे रही है ताकि भाजपा के पक्ष में एक बार फिर लहर बनायी जा सके। वहीं संघ प्रमुख मोहन भागवत भी भाजपा को जीत दिलाने के लिए जुट गए हैं। कुल मिलाकर भाजपा को अब भगवान राम का ही भरोसा है।

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