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शहादत पर सियासत

  • पुलवामा आतंकी हमले पर कांग्रेस समेत विरोधी दलों ने मोदी सरकार को घेरा
  • चुनाव के पहले आतंकवाद और पाकिस्तान के खिलाफ निर्णायक कार्यवाही का दबाव
  • देशहित पर भारी पड़ रहा सियासी स्वार्थ शुरू हुआ आरोप प्रत्यारोप का दौर
  • मोदी सरकार की कार्यवाही को भुनाने में जुटी भाजपा विपक्षी दलों में बढ़ रही बेचैनी

Sanjay Sharma @WeekandTimes

लखनऊ। पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के फिदायीन हमले में पुलवामा में चालीस जवानों की शहादत से पूरे देश में गुस्सा है। आलम यह है कि इस बार भारत की जनता मोदी सरकार से आतंकवाद के खात्मे और इसके सरपरस्त पाकिस्तान से आर-पार की लड़ाई चाहती है। जनता का मूड देखते हुए हमले के तुरंत बाद विपक्षी दलों ने भी सरकार का साथ देने का ऐलान किया था। सरकार ने भी आनन-फानन में पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस करने समेत कई कदम उठाए। पीएम मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की बात की लेकिन दो दिनों की चुप्पी के बाद विपक्ष ने सैनिकों की शहादत पर सियासत करनी शुरू कर दी। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने आतंकी हमले के लिए न केवल मोदी सरकार और सेना को जिम्मेदार ठहरा दिया बल्कि विभिन्न योजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास पर भी सवाल उठाए। कांग्रेस ने पीएम मोदी पर आरोपों की बौंछार कर दी। इसी के साथ आरोपों और प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया। विपक्ष यह दिखाने में जुट गया कि भाजपा की मोदी सरकार को शहीदों की कोई फिक्र नहीं है और वह आतंकवाद के खात्मे को लेकर गंभीर नहीं है। दूसरी ओर भाजपा केंद्र सरकार द्वारा आतंकवाद और पाकिस्तान के खिलाफ उठाए गए कदमों को भुनाने में जुट गई है ताकि एक बार फिर मोदी लहर पैदा की जा सके। कुल मिलाकर अब शहादत पर सियासत का दौर शुरू हो चुका है। यह सियासत लोकसभा चुनाव में क्या गुल खिलाएगी यह तो वक्त बताएगा।

…..लोकसभा चुनाव से कुछ माह पहले जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में सेना के काफिले पर आतंकी हमले ने सरकार और विपक्ष दोनों को सांसत में डाल दिया है। जनता के आक्रोश को देखते हुए सरकार के ऊपर आतंकवाद और पाकिस्तान के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का दबाव है। भाजपा के दिग्गज इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि यदि आतंकवाद और पाकिस्तान के खिलाफ जरा सा भी ढुलमुल रवैया अपनाया गया तो यह लोक सभा चुनाव में भारी पड़ेगा। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी यह पता है। लिहाजा, पीएम मोदी ने आतंकवादी हमले के 24 घंटे के भीतर पाकिस्तान के खिलाफ कदम उठाने शुरू कर दिए। सबसे पहले पाकिस्तान का मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस लिया। इसके बाद पाकिस्तान से आने वाली वस्तुओं पर 200 फीसदी से अधिक की कस्टम ड्यूटी लगा दी। इसके अलावा भारत ने विश्व के देशों के सामने आतंकी हमले में पाकिस्तान के हाथ होने का सबूत पेशकर पड़ोसी देश को अलग-थलग करने की कोशिश की। इस मामले में भारत काफी कुछ सफल भी रहा। अमेरिका और सोवियत रूस समेत दुनिया के अधिकांश देशों ने न केवल भारत का समर्थन किया बल्कि यह भी कहा कि आत्मरक्षा के लिए भारत कोई भी कदम उठाने के लिए स्वतंत्र है। भारत के कारण ही यूरोपीय संघ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में बरकरार रखा है। इसके बाद पाकिस्तान को सीधा ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा। इसका असर यह होगा कि पाकिस्तान पूरी दुनिया से व्यापार के मामले में अलग-थलग हो जाएगा और उसे कहीं से भी आर्थिक सहायता नहीं मिल पाएगी। भारत सरकार ने पाकिस्तान जाने वाली नदियों के अपने हिस्से के अस्सी फीसदी पानी को भी रोकने का ऐलान किया है। जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कराने में भी भारत जुटा है। माना यह जा रहा है कि सरकार जल्द ही पाकिस्तान के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई करेगा। सेना को खुली छूट देकर भारत ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश दे दिया है। इसका असर दिख रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत से एक मौका देने की गुहार लगाई है। मोदी सरकार की इन कार्रवाईयों का जनता के बीच सकारात्मक संदेश गया है। इस बात से चिंतित होकर विपक्ष की बेचैनी बढ़ गई है। विपक्ष को लगने लगा है कि यदि मोदी सरकार ने कोई बड़ी कार्रवाई की तो आने वाले दिनों में भाजपा को सत्ता में जाने से रोकना संभव नहीं होगा। लिहाजा वह पीएम मोदी और सरकार पर हमला करने लगी है। बसपा प्रमुख मायावती ने पीएम से जुमलेबाजी बंद करने को कहा है। उन्होंने कहा कि सैनिकों की शहादत पर केंद्र के ढुलमुल रवैये पर भाजपा को जनता को जवाब देना होगा। कांग्रेस पार्टी ने सरकार पर कई आरोपों के गोले दागे। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने तो यहां तक कह दिया कि पुलवामा आतंकी हमले पर जब पूरा देश शोक मना रहा था तो पीएम मोदी कॉर्बेट पार्क में एक फिल्म की शूटिंग में व्यस्त थे। यह दीगर है कि उस समय कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आदिवासियों के बीच डांस कर रहे थे। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पीएम पर निशाना साधते हुए कहा कि सैनिकों की शहादत के बाद भी पीएम मोदी उद्घाटन और रैलियां कर रहे हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सवाल उठाया कि सरकार को सैनिकों की सुरक्षा में हुई चूक का जवाब देना होगा। कांग्रेस के आरोपों पर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पुलवामा पर कांग्रेस प्रवक्तओं और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के सुर एक जैसे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सर्जिकल स्ट्राइक पर भी सरकार से सबूत मांगे थे। अब कांग्रेस प्रवक्ताओं के ऐसे बयान से पार्टी का असली रंग सबके सामने आ गया है। कुल मिलाकर, शहादत पर सियासत का दौर जारी है। हालांकि संकट के समय सतही आरोप-प्रत्यारोप का दौर कतई उचित नहीं कहा जा सकता है। लोकसभा चुनाव में अभी वक्त है। हरे जख्मों पर मलहम की जरूरत है। एकजुटता का प्रदर्शन करके ही देश आतंकवाद और आतंकी देश पाकिस्तान से निपट सकता है। विपक्ष को यह बात समझ आनी चाहिए कि यदि वह सैनिकों की शहादत पर सियासत जारी रखती है तो इसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ सकता है क्योंकि सैनिकों के मामले में भारत की जनता बेहद
संवेदनशील है।

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