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शूटिंग करते मोदी आए निशाने पर

  • पुलवामा हमले के बावजूद शूटिंग करते रहे पीएम!
  • कॉर्बेट पार्क में नौका विहार किया
  • निजी चैनल में ब्रांडिंग के लिए कैमरों के सामने व्यस्त रहे मोदी शाम छह बजे निकले पार्क से
  • सामने आईं पार्क में मोदी की शूटिंग की तस्वीरें
  • देहरादून एअरपोर्ट रुके लेकिन मुख्यमंत्री से नहीं मिले
  • जनसभा भी रद्द नहीं की,फोन से संबोधित किया

चेतन गुरुंग
देहरादून। पुलवामा में अचानक सीआरपीएफ के काफिले पर ठीक वेलेंटाइंस डे पर दोपहर आतंकी आत्मघाती हमला करते हैं। 40 जांबाज बगैर कुछ करने का मौक़ा पाए धरती माँ की गोद में हमेशा के लिए सो जाते हैं। विस्फोटक से भरी कार को काफिले के वाहन से टकरा दिया जाता है। फिर गोलीबारी भी की जाती है। पूरे देश को तत्काल खबर लग जाती है। हर भारतीय ग़मगीन हो जाता है। पाकिस्तान को मटियामेट करने की बात करता है। टीवी चैनलों और सोशल मीडिया में जम के ख़बरें चलने लगती हैं। हर पार्टी चाहे वह कांग्रेस ही क्यों न हो, पकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ किसी भी कार्रवाई के लिए सरकार के साथ खड़े होने का एलान करते हैं। इस बीच सभी को इन्तजार रहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार के रुख तथा एलान का, कि भारत अब क्या कदम उठाता है। उनकी खोज खबर होती है। पता चलता है कि प्रधानमंत्री अलस्सुबह दिल्ली से पहले देहरादून चले गए थे। फिर वहां से अपनी जनसभा के लिए रुद्रपुर जाएंगे। किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि रुद्रपुर जाने के बजाए प्रधानमंत्री देहरादून क्यों आ गए। वह भी इतनी सुबह-सुबह।

जनसभा तो दोपहर बाद थी। पता चला कि मोदी रामनगर चले गए हैं। जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, उनके साथ एक बड़े निजी टीवी चैनल का क्रू है। वह उनको लगातार शूट कर रहा है। कुछ ही घंटे बाद ये खुसर-पुसर शुरू हो गई थी कि मोदी शायद किसी शूटिंग में व्यस्त हैं। मौसम की खराबी के बाद उन्होंने जनसभा जाने का कार्यक्रम भी रद्द कर दिया। सुनने आए लोगों को फोन से ही संबोधित कर दिया। अब जबकि ये खुलासा हो चुका है कि पुलवामा हमले और इतनी मौतों के बावजूद प्रधानमंत्री वास्तव में शूटिंग में व्यस्त थे, तो इसे कांग्रेस अब बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने जा रही है। ये वाकई हैरानी की बात कही जा सकती है कि जब देश भर में दु:ख और शोक की जबरदस्त लहर थी, मोदी ने अपनी शूटिंग को रद्द करना उचित नहीं समझा, जो कि सिर्फ ब्रांडिंग भर का हिस्सा थी। ये बात अलग है कि देश के कई मीडिया हाउस और टीवी चैनलों ने प्रधानमंत्री को उसी देर शाम कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक में दिखा दिया।
पुलवामा हमले और मौतों पर प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया भी बहुत देर से देश के सामने आई। प्रधानमंत्री की इस ब्रांडिंग शूटिंग को निहायत गोपनीय रखने की कोशिश भरपूर हुई। सुबह सात बजे तक मोदी देहरादून के जौली ग्रांट हवाई अड्डे पहुंच चुके थे। उनके देहरादून आने का औपचारिक कार्यक्रम तक गोपनीय रखा गया था। इस बात का जिक्र तक नहीं किया गया कि आखिर वह देहरादून किस मकसद से आ रहे थे। मुख्यमंत्री सचिवालय को भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। मुख्यमंत्री के साथ प्रधानमंत्री की मुलाक़ात का भी कोई कार्यक्रम आधिकारिक तौर पर नहीं था। अगले दिन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र्र सिंह रावत सुबह-सुबह काफिले के साथ जौली ग्रांट एयरपोर्ट रवाना हुए। उनको बीच रास्ते से ही लौटा दिया गया कि प्रधानमंत्री किसी से भी नहीं मिल रहे हैं। वह बहुत व्यस्त हैं और किसी से मिलने का वक्त उनके पास नहीं है। त्रिवेंद्र आठ बजे तक वापिस मुख्यमंत्री आवास लौट आए। इसके बाद उन्होंने कुछ ख़ास लोगों से ही मुलाकात की। नाश्ता भी लौट के किया। पहले उनका नाश्ता प्रधानमंत्री के साथ करने का था। मुख्यमंत्री के लौट आने के बाद भी कई घंटे मोदी देहरादून हवाई अड्डे रहे। फिर रामनगर चले गए। टीवी क्रू उनके साथ ही गया। बताया गया कि देहरादून में भी इस क्रू ने कुछ शूटिंग की। फिर रामनगर में कॉर्बेट पार्क में पूरे दिन शूटिंग चलती रही। वह नौका विहार करते रहे। भिन्न-भिन्न अंदाज में शूटिंग करते रहे। इस दौरान राज्य के स्थानीय अफसरों को भी साथ रहने की इजाजत नहीं दी गई। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक मोदी को शूटिंग से फारिग हो कर रुद्रपुर में जनसभा स्थल जाना था। उन्होंने शूटिंग तो की लेकिन जनसभा जाना रद्द कर दिया। इस बीच शूटिंग के दौरान ही पुलवामा में हमला हो गया था। इसके बावजूद न शूटिंग रोकी गई न ही जनसभा रद्द की गई। मोदी तकरीबन रात को पार्क से निकले। रास्ते में लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। डाक बंगले में रुक के नाश्ता किया। अब जबकि ये जाहिर हो गया कि प्रधानमंत्री पुलवामा हमले के दिन शूटिंग में व्यस्त रहे और उसको रोका नहीं, तो ये खबर छन के आ रही कि उनको हमले के बारे खबर ही नहीं थी। अगर ये सच है तो कहने का मतलब इतने लम्बे-चौड़े अहम प्रधानमंत्री कार्यालय या फिर एनएसए अजीत डोभाल, आईबी और रॉ के शीर्ष बॉस, कैबिनेट सचिव, गृह सचिव, रक्षा सचिव और सेना प्रमुख ने उनको इस जघन्य हमले के बारे में तत्काल कुछ नहीं बताया। ये बात हजम तो नहीं होती कि इतना बड़ा हमला कश्मीर में हो जाए और प्रधानमंत्री को इसकी खबर तक न हो। जो भी हो। प्रधानमंत्री को देर से खबर मिलना या फिर मिलने के बावजूद शूटिंग करते रहना, प्रतिक्रिया न देना, तत्काल कोई बैठक न बुलाना बहुत ही संवेदनशील मामला कहा जा सकता है। लोकसभा चुनाव के मौसम में कांग्रेस के हाथ ये बहुत बड़ा हथियार लग गया है। वह इसको भुनाने में कोई कसर शायद ही छोड़ेगी। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री की शूटिंग के बारे में अखबारों की कटिंग और तस्वीरों को भी जारी किया हुआ है।
उत्तराखंड में मोदी का ये रुख इसलिए भी बीजेपी को भारी पड़ सकता है कि पुलवामा हमले में न सिर्फ यहाँ के जांबाज शहीद हुए बल्कि हमले के कुछ ही घंटे बाद जवाबी कार्रवाई में देहरादून के मेजर विभूति ढोन्दियाल पुलवामा में ही आतंकवादियों को काल के मुख में पहुंचाने के दौरान शहीद हो गए। इससे पहले देहरादून के ही मेजर चित्रेश बिष्ट सरहद पर बम डिफ्यूज करते हुए विस्फोट हो जाने के कारण सर्वोच्च बलिदान कर बैठे। शहीद मोहनलाल का पार्थिव शरीर भी देहरादून में बसे उनके परिवार के पास पहुंचा। इन शहादतों ने सिर्फ देहरादून को नहीं बल्कि पूरे उत्तराखंड को हिला डाला है। ऐसे में प्रधानमंत्री का शूटिंग में व्यस्त रहना लोगों के गले नहीं उतर रहा है।

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