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फायदा उठाने में माहिर है मोदी ?

  • हर योजना की करते है आक्रामक मार्केटिंग
  • हमेशा चुनावी मोड में रहते है प्रधानमंत्री

Snigdha Jain @ WeenakandTimes

लखनऊ। देश आजकल पाक के दु:साहस का जवाब में देने में लगा है। क्या सत्ता पक्ष, क्या विपक्ष, आम हो या खास सभी लोग सरकार के साथ खड़े हैं। वहीं भारत में आगामी दो महीने के अंदर चुनाव होने वाले हैं,ऐसे में सत्ताधारी दल अपने द्वारा किए जाने वाले हर उस फैसले को भुनाने में लग गया है जिससे आम मतदाता प्रभावित हो सकता है। यहां चर्चा यह हो सकती है कि क्या हर चीज को वोट लेने की मार्केटिंग के नजरिये से प्रचाारित करना उचित है या अनुचित। 2014 से मोदी अपनी सरकार के हर निर्णय, चाहे वे आलोचनाओं के शिकार ही क्यों न हुए हों पूरे दमखम के साथ प्रचारित करते रहे। फैसले कारगर रहे या नहीं रहे इसका फैसला तो 2019 के चुनावी नतीजों के बाद चर्चा का विषय बनेंगे, पर इतना तो स्वीकार करना ही पड़ेगा कि मोदी को चुनाव प्रचार के दौरान फैसलों को जनता के बीच पहुंचाने की कला आती है। गत दिनों तीन राज्यों में भाजपा की हार से एकबार लग रहा था कि मोदी मैजिक खत्म हो रहा है पर आर्थिक रुप से कमजोर लोगों को आरक्षण, अंतरिम बजट के लोक लुभावनी योजनाओं को जनता के बीच में पुरजोर तरीके से पेश करके मोदी अपनी व सरकार की पैठ जनता के बीच में बनाने में लग गए हैं।

पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक हो या अन्य सैन्य अभियान उनका प्रचार के रूप में इस्तेमाल करना नरेंद्र मोदी को बखूबी आता है। इन तरीकों से वह विपक्ष के निशाने पर आ ही जाते हैं यदा-कदा उन पर सेना व अन्य सुरक्षा एजेंसियों का उपयोग राजनीति चमकाने में करने का आरोप भी लगता रहता है। अभी हाल ही में पाकिस्तान में आतंकी ठिकाने पर वायुसेना की कार्रवाई का लोकसभा चुनाव में लाभ होने संबंधी कर्नाटक के वरिष्ठ भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा के कथित बयान पर कांग्रेस ने भाजपा एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि इससे जवानों के पराक्रम का राजनीतिक लाभ लेने के एजेंडे का खुलासा हो गया है। एक बयान में कहा कि सशस्त्र बलों के पराक्रम और समर्पण का उपयोग तुच्छ राजनीति के लिए करना पूरी तरह शर्मनाक और निंदनीय है। इसमें दावा किया गया कि पूरे देश को हमारे जवानों के सर्वोच्च बलिदान पर गर्व है। राष्टï्र के प्रति उनकी सेवा का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए करने का दोहरा एजेंडा प्रधानमंत्री मोदी और शाह द्वारा पूरे देश में चलाया जा रहा है।
खैर ऐसा करना अच्छा है या बुरा यह तो अलग मुद्दा हो सकता है पर यह तो निश्चित है कि यह सब उनकी एक सोची समझी रणनीति है। भारत में युवाओं की संख्या बहुतायत में है। उसे अपनी ओर आक र्षित करने का एकमात्र तरीका है मार्के टिंग व एडवरटाइजमेंट। मोदी वही कर रहे हैं। अपने हर एक काम को हर तरह के मंचों से आक्रामक रूप से प्रचारित कर रहे हैं। यही नहीं नरेंद्र मोदी गरीबों को पांच लाख तक का निशुल्क इलाज के लिए शुरू की गई आयुष्मान योजना को सार्वजनिक मंचों से बताना नहीं भूलते हैं। इसके अलावा भी केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई तमाम योजनाओं की मार्केटिंग वे आक्रामक तरीके से करते हैं। वे हर एक आदमी तक यह बात पहुंचाने की कोशिश करते हैं कि केंद्र की सरकार सभी का ख्याल रख रही है। गरीब सवर्णों को आरक्षण देने के केंद्र के फैसले को भी वे जोर-शोर से प्रचारित करते हैं। इन सबके बीच विकास उनके केंद्र में रहता है। भ्रष्टïाचार के मुद्दे पर वे विरोधियों पर ऐसे-ऐसे तंज कसते हैं कि विपक्षी तिलमिलाए बिना नहीं रह पाता है। यही मोदी की शैली है। उनकी इस नई और आक्रामक शैली लोगों को पंसद भी आ रही है।
उनके इस मार्केटिंग से लोग प्रभावित भी हो रहे हैं। इसकी बानगी इसी से लगाई जा सकती है सर्वे में आज भी उनकी लोकप्रियता बरकरार है। विषेशज्ञों का मानना यह तरीक ा खराब नहीं अपनी योजनाओं के बारे में जनता को बताना हर राजनैतिक दल व व्यक्ति का कर्तव्य है। बाजारवाद के समय में राजनीतिक दलों को भी आक्रामक तरीके से अपनी बात जनता के बीच में पहुंचाना जरूरी है, आप सत्ता में हो या विपक्ष में अपनी पुरानी योजनाओं का बखान करें व भावी योजनाओं का भी गुणगान करे तभी जन के मन तक पहुंच पाएंगे और चुनावी वैतरणी पार कर पाएंगे। यही वजह है कि मोदी कई बार विरोधियों को चित कर देते हैं। चौंका देते हैं। फिलहाल प्रचार में तो प्रधानमंत्री मोदी सब पर भारी पड़ रहे हैं।

 

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