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जीरो टालरेंस को 440 वोल्ट का झटका

  • बिजली चोरी रोकने में लापरवाह उर्जा निगम
  • छापों में ढिलाई फिर मीटर जांच को टालने में जुटा
  • वासु और गायत्री फैक्ट्री पर किसकी मेहरबानी
  • मुख्यमंत्री के इरादों पर पलीता लगाने की कोशिश
  • 15 करोड़ की बिजली चोरी की कहानी

चेतन गुरुंग
देहरादून। त्रिवेंद्र सरकार का ध्येय बार-बार यही बताया जाता है कि राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ शून्य सहनशक्ति दिखाई जाएगी। इसको मुख्यमंत्री ने जीरो टालरेंस नाम दिया है। ऐसा नहीं कि ये सिर्फ कोरा दिखावा रहा। कई मौके ऐसे आए जब सरकार ने भ्रष्टाचार पर बहुत सख्ती दिखाई। कई अफसरों और आरोपियों को जेल की सलाखों के पीछे पहुँचाया भी। जांच बिठाई। विशेष जांच दल का गठन किया गया। स्पेशल ऑडिट कराए गए। ऐसा लगता है कि बिजली महकमे में सरकार के जीरो टालरेंस का कोई असर या सन्देश नहीं है। इसका अंदेशा इसलिए हो रहा है कि एक पुख्ता शिकायत पर उर्जा निगम के सतर्कता दल को जब छापे के लिए रूडक़ी की दो फैक्ट्रियों में भेजा गया तो न सिर्फ दल को सिर्फ एक ही फैक्ट्री में छापा मारने में सफलता मिली बल्कि फैक्ट्री के मालिकों पर निगम जम कर मेहरबान भी दिखा। छापामार दल पहले गायत्री स्टील पहुंचा। वहां उसको जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा। जब काफी वक्त गुजरने के बावजूद दल को मीटर चेक करने और बिजली चोरी की जांच करने का मौका नहीं मिला तो उसको वासु स्टील्स का रुख करना पड़ा। दोनों ही फैक्ट्री हालांकि एक ही मालिक के बताए जाते हैं। शिकायत ये थी कि बिजली महकमे के इंजीनियरों के साथ मिलीभगत कर फैक्ट्री मालिक करोड़ों के राजस्व का चूना सरकार को लगा रहा है। छापे के दौरान विजिलेंस टीम ने छह घंटे फैक्ट्री में गुजारे। फिर वहां से तीन बिजली मीटर साथ ले के देहरादून पहुंचा। मोटा अंदेशा ये जताया जा रहा और आरोप भी यही है कि इन दो फैक्ट्रियों से हर महीने 15 करोड़ रूपये के करीब की बिजली चोरी की जा रही है।

निगम को बिजली चोरी का सूत्र स्थानीय कारोबारियों से मिला। इसके बावजूद निगम ने छापामार दस्ता तब भेजा, जब बात सरकार में ऊपर तक गई। हैरानी इस बात पर जताई जा रही है कि जब परीक्षण के लिए मीटरों को देहरादून लाया गया तो फैक्ट्री के प्रबंधन से जुड़े लोगों के साथ ही कर्मचारियों की भीड़ भी ईस्ट कैनाल रोड स्थित बिजली महकमे के दफ्तर में पहुंच गई। इनमें ऐसे लोगों को भी देखे जाने की बात है, जिनका वास्ता जुर्म की दुनिया से समझा जाता है। साथ ही बाउंसर किस्म के लोग भी दर्जनों की तादाद में पहुंचे। मामला संवेदनशील और तनाव देखते हुए तत्काल पुलिस भी बिजली दफ्तर पहुंची। इस दौरान जांच दल की समझ में नहीं आ रहा था कि वह आगे क्या कदम उठाए।
दरअसल निगम के बड़े अफसरों, जिनमें प्रबंध निदेशक बीसीके मिश्र भी शामिल थे, ने अपने फोन उठाने बंद कर दिए, अन्य अफसरों ने भी इस मामले में दिलचस्पी दिखाने के बजाए कन्नी काट ली। इससे ऐसा महसूस हुआ मानो फैक्ट्री प्रबंधन और निगम के अफसरों में कहीं मिलीभगत तो नहीं है। हरिद्वार के रूडक़ी के वासु प्लांट का कनेक्शन 4500 किलोवॉट और गायत्री स्टील का कनेक्शन 9500 किलो वॉट का है। विजिलेंस टीम अधिशासी अभियंता विवेक राजपूत की अगुवाई में काम कर रही थी, लेकिन सच्चाई ये है कि वे छापे के दौरान असहाय दिखाई दे रहे थे। छापा रात साढ़े दस बजे से तडक़े चार बजे तक चला। छापे में फैक्ट्री प्रबंधन ने सहयोग तो नहीं दिया बल्कि जांच दल पर बेहद दबाव बनाने की कोशिश भी की। सभी मीटर गाड़ी में रखे रहे। गढ़वाल के आईजीपी अजय रौतेला ने अतिरिक्त पुलिस भेजकर जांच दल को पूरी सुरक्षा प्रदान की। निगम ने जान बचाने के लिए मीटर की जांच के लिए अलग टीम का गठन किया लेकिन इसकी सम्भावना कम दिख रही कि इसका कोई नतीजा सही निकलेगा। ख़ास तौर पर निगम के अफसरों के रुख ने शक का बीज बहुत गहरा बो दिया।
ऊर्जा निगम के रवैय्ये और बिजली चोरी पर निगम के बर्ताव से शक होना लाजिमी है कि क्या वाकई वह मुख्यमंत्री के जीरो टालरेंस नारे के साथ है या फिर इसको हवा में उड़ा दिया है। ख़ास बात ये है कि ऊर्जा निगम के मंत्री खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत हैं। इसके बावजूद जिस तरह बिजली चोरी पर सरकार और निगम लापरवाही का परिचय दे रहे, वह हैरान करने के लिए काफी नजर आती है। मुख्यमंत्री भी शायद नहीं चाहेंगे कि लोकसभा चुनाव के मौसम में ऐसी बड़ी चोरी का खुलासा हो और फिर उनको ही दिक्कत आए, इसके बावजूद त्रिवेंद्र की प्रतिष्ठा और छवि अलग किस्म की है। उनको किसी के भी दबाव में न आने वाला मुख्यमंत्री समझा जाता है। लिहाजा, ये उम्मीद की जा सकती है कि वह बिजली चोरों और भ्रष्ट लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाएंगे। उनके इस अभियान में ऊर्जा निगम के लोग ही पलीता लगा रहे, कहा जा सकता है। मीटर को देहरादून लाया गया तो वासु स्टील के कर्मचारी सडक़ों पर आ गए थे। कम्पनी के कुछ ख़ास किस्म के लोग मोबाइल फोन पर व्यस्त दिखे। पुलिस ने आकर उनको बिजली महकमे के परिसर से हटवाया। ये गलत नहीं है कि त्रिवेंद्र ने मुख्यमंत्री बनने के बाद अपनी दबंग और न दबने वाली छवि को जमकर भुनाया। इसके लिए भले उनको सिडकुल घोटाले की जांच करानी पड़ी। साथ ही एसआईटी लगाकर एनएच-74 घोटाले की जांच कराई। इसमें आधा दर्जन पीसीएस अफसर जेल गए तो आईएस अफसर पंकज पाण्डेय, जो सचिव स्तर के हैं, के भी जेल जाने की नौबत है। एक अन्य आईएएस अफसर चंद्रेश यादव को सरकार पहले निलंबित कर चुकी है। उनकी जांच चल रही है।
यादव अब बहाल किए जा चुके हैं। ऐसे में दो फैक्ट्री मालिकों और प्रबंधन को इतनी बड़ी बिजली चोरी पर बख्शने या सहयोग देने के आरोप में निगम के अफसरों और इंजीनियरों को बख्शा जाना समझ से बाहर की बात कही जा रही है। मीटर को परीक्षण के लिए लाया गया था। अगर मीटर गड़बड़ नहीं हैं तो भला किसलिए फैक्ट्री मालिक को बाउंसर भेजकर मीटर का परीक्षण रुकवाने की चेष्टा करनी पड़ रही है। इतना ही नहीं फैक्ट्री मालिकों की इच्छा पर ही मीटर परीक्षण की तारीख तय करनी पड़ रही है। इस बात पर हैरानी जताई जा रही है कि आखिर निगम के जांच दल को ऐसी क्या मजबूरी आन पड़ी जो, इतनी सारी छूट फैक्ट्री मालिकों को दी जा रही है।

छापेमारी टीम के अफसर
यूपीसीएल की जिस विजिलेंस टीम ने रुडक़ी के धनोरी गांव के वासु स्टील पर बिजली चोरी की शिकायत पर छापा मारा उसमें अधिशासी अभियंता विजिलेंस विवेक राजपूत, अधीक्षण अभियंता विजिलेंस राहुल जैन, एसडीओ विजिलेंस एचएस रावत देहरादून व अधिशासी अभियंता टेस्ट नंदिता अग्रवाल, अधिशासी अभियंता रुडक़ी अनूप कुमार, एसडीओ सचिन सचदेवा, जेई योगेंद्र रावत व जेई वसीम अहमद भी शामिल रहे।

पारदर्शी होगी मीटरों की जांच: राधिका
देहरादून। प्रदेश की ऊर्जा सचिव राधिका झा ने कहा कि किसी भी सूरत में बिजली की चोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी अगर कोई भी व्यक्ति बिजली चोरी करते हुए पकड़ा जाता है तो उसके लिए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने रुडक़ी क्षेत्र के वासु व गायत्री स्टील पफैक्ट्री में बिजली चोरी व ऊर्जा निगम के छापेमारी के सवाल पर कहा कि इस मामले में पारदर्शिता के साथ जांच की जाएगी। मीटरों में गड़बड़ी की शिकायत पर उन्होंने कहा कि इसमें किसी तरह की राहत फैक्ट्री मालिकों को नहीं दी जाएगी।

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