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नतीजों से पहले सरकार बनाने-बिगाड़ने का खेल शुरू

  • मोदी को रोकने के लिए कांग्रेस बना रही राणनीति जुटे दिग्गज
  • भाजपा को उम्मीद एनडीए को मिलेगा बहुमत , बिपक्ष के मनसूबे नहीं होंगे कामयाब
  • सोनिआ गाँधी भी हुई एक्टिव परिणाम से पहले महागठबंधन की बनने लगी भूमिका

Sanjay Sharma @WeekandTimes

कसभा के अंतिम चरण के चुनाव होने हैं। नतीजे भी नहीं आए हैं। बावजूद इसके विपक्ष अभी से महागठबंधन की सरकार बनाने और भाजपा की राह मुश्किल बनाने की रणनीति बनाने में जुट गया है। कांग्रेस ने तो यहां तक संकेत दे दिए थे कि मोदी को रोकने के लिए वह पीएम पद तक कुर्बान करने को तैयार है। हालांकि बाद में वह इससे पलट गई। इसके अलावा कांग्रेस ने जदयू पर भी डोरे डालने शुरू कर दिए हैं। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी भी एक्टिव हो चुकी हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव पहले ही कह चुके हैं कि देश का अगला प्रधानमंत्री यूपी और गठबंधन से होगा। बसपा प्रमुख मायावती खुद को पीएम मोदी से बेहतर बताकर प्रधानमंत्री पद की दावेदारी का संकेत दे चुकी हैं। इन सबसे बेफिक्र भाजपा और एनडीए को दोबारा बहुमत का पूरा भरोसा है। भाजपा का मानना है कि नतीजे आने के बाद विपक्ष के इन मंसूबों पर पानी फिर जाएगा।

…केंद्र में गैर भाजपा सरकार बनाने के लिए विपक्ष धीरे-धीरे लामबंद होने लगा है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू काफी पहले से सक्रिय हैं। उन्होंने चुनाव नतीजों के पहले ही विभिन्न पार्टी प्रमुखों से मुलाकात करनी शुरू कर दी है। पिछले दिनों चंद्रबाबू नायडू ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भेंट की। हालांकि ममता बनर्जी से उन्हें कोई स्पष्टï आश्वासन नहीं मिला। ममता चाहती हैं कि चुनाव नतीजे आने के बाद ही इस मामले पर कोई चर्चा की जानी चाहिए। मोदी के खिलाफ एकजुटता पर सबसे आगे रहने वाली ममता बनर्जी के कदम पीछे खींचने के कई कयास लगाए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि ममता पश्चिम बंगाल में भाजपा के बढ़ते जनाधार और सरकार विरोधी लहर से चिंतित है। लिहाजा वे फूंक-फूंककर कदम रखना चाहती हैं। साथ ही वे खुद को प्रधानमंत्री पद का दावेदार मानती हैं। कांग्रेस ने पहले ही बहुमत नहीं आने का अंदेशा जता दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठï नेता कपिल सिब्बल ने साफ तौर पर स्वीकार कर लिया है कि उनकी पार्टी को बहुमत मिलने का चांस नहीं है लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए गठबंधन की सरकार बन सकती है। खुद सोनिया गांधी ने भी मोदी को सरकार बनाने से रोकने के लिए अपनी ताकत झोंक दी है। उन्होंने विभिन्न दलों के नेताओं से फोन पर बातचीत की। साथ ही 22, 23 या 24 मई को दिल्ली में बैठक करने की बात कही। इस तरह सोनिया विपक्षी दलों की बैठक बुलाकर यह संदेश देना चाहती है कि हम भले ही चुनाव से पहले गठजोड़ का हिस्सा न हो लेकिन हम मोदी के खिलाफ लड़े और एकजुट हंै, इसलिए हमारे गठबंधन को ध्यान में रखा जाए और किसी एक दल की बजाय गठबंधन को ही सरकार बनाने का न्यौता मिलना चाहिए। लोकसभा चुनाव के नतीजे 23 मई को आएंगे। ऐसे में अगर इस चुनाव में किसी दल या गठबंधन को स्पष्टï बहुमत नहीं मिला तो देश का सियासी समीकरण बदल जाएगा। कांग्रेस ने मोदी को रोकने के लिए पीएम पद तक कुर्बान करने का संकेत दिया है। हालांकि बाद में वह इससे पलट गई। यही नहीं कांग्रेस ने भाजपा के सहयोगी जदयू पर भी डोरे डालने शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि अगर नीतीश कुमार हमारा साथ दें तो हम केंद्र में गैर भाजपा सरकार बनाएंगे। तेलंगाना के सीएम चंद्रशेखर राव ने भी कहा है कि वह माइनस राहुल गांधी कांग्रेस नेतृत्व स्वीकारने को तैयार हैं। एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार का कहना है कि अगर राष्ट्रपति भाजपा को सरकार बनाने के लिए बुलाते भी हैं तो वह सदन में अपना बहुमत सिद्ध नहीं कर सकेगी। मोदी सरकार का भी हश्र वही होगा, जो 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार का हुआ था। हालांकि जदयू और नीतीश पर कांग्रेस के बयान का असर शायद ही पड़े क्योंकि नीतीश काफी सोच-समझ कर एनडीए में दोबारा आए हैं। पिछले कुछ महीनों में पीएम मोदी और नीतीश कुमार के बीच केमिस्ट्री भी ठीक है। ऐसे में नीतीश एनडीए का साथ छोड़ेंगे, ऐसा दूर-दूर तक नहीं दिखाई पड़ रहा है। सपा-बसपा गठबंधन पहले से ही महागठबंधन का संकेत दे चुकी है लेकिन इन सारी कवायदों के बावजूद यक्ष प्रश्न यह है कि यदि ऐसी स्थिति पैदा हो गई और महागठबंधन बन भी गया तो क्या क्षेत्रीय दलों के नेता अपनी महत्वाकांक्षाओं को दरकिनार कर प्रधानमंत्री पद के लिए किसी एक नाम पर एकराय हो सकेंगे। क्या सबसे अधिक सीट पाने वाला दल प्रधानमंत्री के पद को छोड़ देगा? हालांकि भाजपा को पूरी उम्मीद है कि विपक्ष के ये मंसूबे कामयाब नहीं होंगे और मोदी के नाम पर भाजपा और एनडीए को दोबारा सरकार बनाने का मौका मिलेगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में दिल्ली के तख्त पर कौन बैठता है।

 

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