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जम्मू-कश्मीर एक तीर, कई निशाने

  • सियासत में बड़ी लकीर खींचने में सफल नजर आरही भाजपा
  • संघ और भाजपा के वैचारिक अजेंडे पर तेजी से बढ़ रही मोदी सरकार
  • तीन राज्यों के विधान सभा चुनाव भाजपा की बढ़त मिलनी तय

Sanjay Sharma @WeekandTimes

जम्मू-कश्मीर से धारा 370 खत्म कर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक तीर से कई निशाने साधे। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो केंद्र शासित राज्य घोषित कर मोदी सरकार ने साफ कर दिया कि वह संघ और भाजपा के एजेंडे पर तेजी से आगे बढ़ रही है। साथ ही विश्व के देशों को भी स्पष्टï संदेश दे दिया कि भारत बेहद शक्तिशाली है और वह अपने अंदरूनी मामलों में किसी का दखल पसंद नहीं करता है। दूसरी ओर विपक्ष एक बार फिर जनता के राष्टï्रवादी मूड को समझने में चूक गया। कांग्रेस, जदयू और सपा ने जम्मू-कश्मीर पर मोदी सरकार के फैसले का विरोध कर खुद को हाशिए पर पहुंचा दिया। मोदी के इस मास्टर स्ट्रोक का फायदा न केवल तीन राज्यों में इस साल के अंत में होने वाले विधान सभा चुनावों में मिलेगा बल्कि भाजपा 2024 के लोक सभा चुनाव में भी इस मुद्दे को भुनाएगी। कुल मिलाकर भाजपा ने विपक्षी दलों की सियासत के सामानांतर एक बड़ी लकीर खींच दी है, जिससे पार पाना आसान नहीं होगा। पिछले लोक सभा चुनाव में भाजपा ने इसी सियासी रणनीति से कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों की धार को कुंद कर दिया था और वे पीएम मोदी के सामने तिनके की तरह उड़ गए थे।

मोदी सरकार ने पांच अगस्त को विपक्ष के विरोधों को दरकिनार कर जम्मू-कश्मीर के विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया। अनुच्छेद 370 को खत्म करने की घोषणा के साथ जम्मू-कश्मीर को विधान सभा के साथ केंद्रशासित राज्य बना दिया गया। लद्दाख को कश्मीर से अलग कर नया केंद्रशासित राज्य बनाया गया। हालांकि यहां विधान सभा का प्रावधान नहीं किया गया है। इसके पहले तीन तलाक विधेयक, गैरकानूनी गतिविधियां निरोधी कानून और राष्टï्रीय जांच एजेंसी कानून पास कर मोदी सरकार ने साफ कर दिया था कि वह संघ और भाजपा के वैचारिक मुद्दों पर तेजी से आगे बढ़ रही है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और जम्मू-कश्मीर को देश की मुख्यधारा से जोडऩा भाजपा के एजेंडे में लंबे समय से रहा है। बकौल अमित शाह, यह भाजपा के एजेंडे में तब से है जब वह कोई चुनाव तक नहीं जीता करती थी। लिहाजा दूसरा कार्यकाल शुरू होते ही मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया। यह मोदी सरकार की ऐतिहासिक सफलता है। सही मायनों में अब जाकर जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बना है। नयी व्यवस्था के कारण अब यहां भारत का कोई भी नागरिक नौकरी कर सकता है। जमीन खरीद सकता है और वोटर व उम्मीदवार बनकर चुनाव भी लड़ सकता है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में रह रहे अस्थायी नागरिकों को विधान सभा चुनाव में वोट देने का अधिकार मिल गया है। अब कश्मीर में अल्पसंख्यकों को आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। जम्मू-कश्मीर का अलग झंडा और अलग संविधान भी इतिहास बन चुका है। मोदी सरकार ने अपने इस मास्टर स्ट्रोक के जरिये एक तीर से कई निशाने साधे हैं। अपने ही राज्य में दोयम दर्जे की जिंदगी जी रहे वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजी 70 साल से अधिक समय बाद गुलामी की जंजीरों से आजाद हो गए हैं। अब इन्हें राज्य की नागरिकता मिल सकेगी। विधानसभा तथा पंचायत व निकाय चुनाव में वे अपनी भागीदारी निभा सकेंगे। 1947 में विस्थापन के बाद से ही लगातार रिफ्यूजियों की ओर से अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी जाती रही है। पूर्ववर्ती कांग्रेस तथा अन्य दलों की सरकार में इनके लिए कोई सहूलियत नहीं मिली, लेकिन 2014 में जब मोदी की सरकार पहली बार बनी तो इनके लिए साढ़े पांच लाख रुपये मुआवजे का ऐलान किया गया। रिफ्यूजियों को पहचान प्रमाणपत्र जारी किया। वहीं इस पूरे प्रकरण के खत्म हो जाने के बाद पीएम मोदी ने देश के नाम संबोधन दिया। उनके संबोधन से साफ है कि वे विरोधियों के सामने सियासत की एक बड़ी लकीर खींच गए हैं। मोदी ने इस भाषण के जरिए कश्मीरी अवाम और विश्व समुदाय दोनों को साधने की कोशिश की। वह अपने भाषण में लोकतंत्र को मजबूत करने, नई राजनीतिक पीढ़ी तैयार करने और विकास पर जोर देते रहे। मोदी का यह फार्मूला नया नहीं है। मोदी का यह फार्मूला विरोधियों पर हमेशा भारी पड़ता रहा है। दरअसल, पीएम मोदी जाति और संप्रदायवादी राजनीति के समानांतर शक्ति, समानता और विकास को रखते हैं। इस तरह वे पहले से बनी लकीरों के समानान्तर बड़ी लकीर खींच देते हैं और सफल हो जाते हैं। पिछले लोक सभा चुनाव में पीएम मोदी ने अपनी इसी रणनीति से जाति और संप्रदायवादी राजनीति को ध्वस्त कर दिया था। मसलन, उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन के बावजूद भाजपा यहां इसी रणनीति पर चलकर सफलता का परचम फहराने में सफल रही। यहां परिवारवाद, जातिवाद और संप्रदाय विशेष के तुष्टिकरण की नीति के खिलाफ इसका इस्तेमाल करके भाजपा ने अपने पाले में बहुमत जुटा लिया। यही हाल बिहार में लालू प्रसाद की जाति आधारित राजनीति की हुई। उनका एमवाई समीकरण ध्वस्त हो गया। अब मोदी इसी सियासत से कश्मीर को अपने पाले में करने की तैयारी कर रहे हैं। दूसरी ओर भाजपा के इस दांव ने कांग्रेस को हाशिए पर ढकेल दिया है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अनुच्छेद 370 का विरोध किया। हालांकि इस मामले में कांग्रेस दो धड़ों में विभक्त हो गई। कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने मोदी सरकार के फैसले का स्वागत किया है। सपा और भाजपा की सहयोगी जदयू इसका विरोध कर एक बार फिर जनता का मूड समझने में विफल रही। मोदी-शाह की जोड़ी के इस मास्टर स्ट्रोक ने न केवल विपक्ष को चारों खाने चित कर दिया है बल्कि चुनावी राज्यों हरियाणा, झारखंड और महाराष्टï्र के लिए मजबूत जमीन तैयार कर दी है। इन तीनों ही राज्यों में इस साल के अंत तक विधान सभा चुनाव होने हैं। तीनों राज्यों में भाजपा की सरकार है। जाहिर है, इस फैसले के बाद यहां स्थानीय नेतृत्व का मुद्दा गौण हो जाएगा और भाजपा को यहां बढ़त मिलनी तय है। वहीं भाजपा ने इस दांव से 2024 में होने वाले लोक सभा की जमीन भी अभी से हमसार कर दी है। पिछले बार भी राष्टï्रवाद के नाम पर भाजपा ने चुनाव जीता था और दोबारा बहुमत से सरकार बनाने में सफल रही। जाहिर है, भाजपा आगामी लोक सभा चुनाव में भी इस मुद्दे को भुनाने में पीछे नहीं रहेगी और इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि इसका फायदा भाजपा को मिलेगा।

 

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