You Are Here: Home » MAIN SLIDE » बिछ गई ‘बाइस’ की बिसात

बिछ गई ‘बाइस’ की बिसात

  • सपा और बसपा के वोट बैंक पर नजर , उप चुनाव की परीक्षा देने की तैयारी
  • सीएम योगी ने मंत्रीमण्डल विस्तार से साधे क्षेत्रीय और जातीय समीकरण
  • सहयोगी अपना दल को किया किनारे सुभासपा की भरपाई को भी चला दाव
  • 2022 में होने वाले विधान सभा चुनाव के लिए तैयार की महाराथियों की फौज

 

Sanjay Sharma @WeekandTimes

महीनों की माथापच्ची के बाद आखिरकार सीएम योगी ने मिशन 2022 की बिसात बिछा दी। अपने पहले मंत्रिमंडल विस्तार में उन्होंने जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को बखूबी साधने की कोशिश की। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के भाजपा से अलग होने के बाद हुए नुकसान की भरपाई अनिल राजभर को आगे करके की। सहयोगी अपना दल को भी किनारे कर दिया गया। तमाम दबावों के बावजूद अपना दल से किसी को भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गई। जिन क्षेत्रों को अभी तक प्रतिनिधित्व नहीं मिला था, उनको भी हिस्सेदारी दी गई। इसके अलावा सपा-बसपा के वोट बैंक में भी सेंध लगाने की पूरी कोशिश की गई। कुल मिलाकर सीएम योगी ने विधान सभा चुनाव की तैयारी के लिए अभी से महारथियों की फौज तैयार कर दी है और इन योद्धाओं की परीक्षा उपचुनाव में होनी है।

…सीएम योगी आदित्यनाथ को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार 2017 में ही करना था लेकिन यह कई बार टला। इस बार योगी ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह समेत पार्टी के केंद्रीय और राज्य के नेताओं के साथ घंटों के विमर्श, मंत्रियों के कार्य प्रदर्शन की रिपोर्टों की समीक्षा, लोक सभा चुनावों में मंत्रियों के क्षेत्रों में भाजपा का प्रदर्शन आदि को सामने रखते हुए नये योद्धाओं की फौज तैयार की। साथ ही जातीय और क्षेत्रीय समीकरण को भी दुरुस्त किया। जिन 23 मंत्रियों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली है, उनमें 6 ब्राह्मïण, 4 क्षत्रिय, 3 वैश्य, 10 दलित और पिछड़ा वर्ग के नेता शामिल हैं। इसके साथ अब योगी सरकार में कुल मंत्रियों की संख्या 56 हो गई है। ब्राह्मïण समुदाय से आने वाले नए मंत्रियों में नीलकंठ तिवारी, सतीश द्विवेदी, चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय, आनंद स्वरूप शुक्ला, अनिल शर्मा और रामनरेश अग्निहोत्री शामिल हैं। अनुसूचित जाति की विधायक कमल रानी वरुण को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। श्री राम चौहान और गिर्राज सिंह धर्मेश अनुसूचित जाति का प्रतिनिधित्व करते हैं। मंत्री रविंद्र जायसवाल, कपिल देव अग्रवाल और महेश गुप्ता वैश्य समुदाय से हैं। अनिल राजभर और नीलिमा कटियार पिछड़े वर्ग से आते हैं, जबकि धर्मेश जाटव समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं और उदयभान सिंह जाट विधायक हैं। वहीं क्षेत्रीय समीकरणों का भी पूरा ख्याल रखा गया। आगरा, बुंदेलखंड, मुजफ्फरनगर, बस्ती और कानपुर को प्रतिनिधित्व दिया गया। मुजफ्फरनगर से कपिल देव अग्रवाल, चरथावल से विजय कश्यप, बुलंदशहर से अनिल शर्मा, आगरा छावनी से धर्मेश, फतेहपुर से चौधरी उदयभान सिंह और मैनपुरी से रामनरेश अग्निहोत्री को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। चित्रकूट से चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय को शामिल किया गया है। नीलिमा कटियार और कमल रानी वरुण को कानपुर और सतीश द्विवेदी को बस्ती और रविंद्र जायसवाल को शामिल किया गया। भाजपा की सहयोगी अपना दल (एस) को तगड़ा झटका मिला है। अपना दल (एस) के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मान रहे थे कि मंत्रिमंडल का विस्तार होने पर एमएलसी आशीष पटेल को मंत्री बनाया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गुर्जर समुदाय को साधने के लिए योगी सरकार ने बिजनौर के एमएलसी अशोक कटारिया को राज्यमंत्री बनाया है। वहीं ओम प्रकाश राजभर के भाजपा से अलग होने के बाद राजभर समुदाय को साधने के लिए सीएम योगी ने अनिल राजभर का कद बढ़ा दिया है। उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। दरअसल, सरोकारों पर ध्यान और जातीय गणित पर काम करके भाजपा जीतती रही है और योगी के मंत्रिमंडल विस्तार में यह एक बार फिर दिखाई पड़ा। कुछ मंत्रियों के इस्तीफे लेकर भाजपा व सरकार की साफ-सुथरी छवि और साख का संदेश देने की भी कोशिश की गई है। इन समीकरणों की वजहें भी हैं। अगले वर्ष पंचायतों के चुनाव होने हैं। उसके तत्काल बाद विधान परिषद के स्थानीय प्राधिकारी कोटे की सीट के चुनाव शुरू होंगे और फिर विधान सभा चुनाव का बिगुल बज जाएगा। भाजपा को भले ही गठबंधन सहित प्रदेश में लोक सभा की 80 में 64 सीटें मिली हों, लेकिन पार्टी 2022 को लेकर पूरी तरह सतर्क है। जीएस धर्मेश को शामिल करके पश्चिमी यूपी में भीम आर्मी के चंद्रशेखर जैसे नेताओं की काट की कोशिश की गई है। बदायूं से महेश गुप्त और मैनपुरी से रामनरेश अग्निहोत्री को मंत्री बनाकर यादव परिवार के गढ़ में न सिर्फ भाजपा की पैठ को और बढ़ाने का इंतजाम किया है बल्कि बदायूं और कन्नौज जैसी संसदीय सीटों को भाजपा की झोली में डालने का इनाम भी दिया गया है। दूसरी ओर पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी से दो स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री बनाकर और एक कैबिनेट मंत्री बनाकर सरोकारों को महत्व देने का संदेश देने का भी काम किया गया है। संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, बलिया, मिर्जापुर जैसे इलाकों से भी अगड़े , पिछड़े और अनुसूचित जाति के चेहरों को लेकर जाति समीकरणों को मजबूती दी गई है।

 

All Rights Reserved to Weekand Times . Website Developed by Prabhat Media Creations.