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पाठ्यपुस्तकों, पाठ्यक्रमों के जरिये राजनीतिक हित साधना गलत

यदि हमें यह देखना-समझना हो कि बच्चों का संसार कैसा और कैसे बनाया जा रहा है, तो हम किसी भी स्कूली कक्षा चाहे पहली कक्षा हो या कक्षा आठ में बैठ कर अनुमान लगा सकते हैं। वयस्कों द्वारा निर्माणाधीन बच्चों के संसार को समझने के लिए शिक्षकों की ओर से बरतने वाले निर्देशों, भाषा और उदाहरणों को देखना होगा। कक्षा में स्थानीय भाषा, मानक भाषा, मातृभाषा की अवधारणा, विचार की अवधारणा के साथ शिक्षक कैसे बर्ताव कर रहा है। इसे ...

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डाकू का संकल्प

आर्य मुसाफिर पंडित लेखराम लाहौर के पास एक गांव में आर्य समाज के एक समारोह में प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने वैदिक धर्म और कर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, जो भी शुभ या अशुभ कर्म मनुष्य करता है, उसका फल उसे अवश्य मिलता है। चोरी, हत्या, हिंसा आदि पाप कर्म करने वालों को किए का दंड अवश्य भोगना पड़ता है। कोई भी उसे बचा नहीं सकता।  पंडित जी के प्रभावशाली प्रवचन को सुनने वालों में उस क्षेत्र का कुख्यात अपराधी ड ...

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नागर जी के लिए कथ्य ही मुख्य था,शिल्प नहीं

मृतलाल नागर का जन्म सुसंस्कृत गुजराती परिवार में 17 अगस्त, 1916 ई. को गोकुलपुरा, आगरा, उत्तर प्रदेश में अपनी ननिहाल में हुआ था। इनके पितामह पंडित शिवराम नागर 1895 ई. से लखनऊ आकर बस गए। इनके पिता पंडित राजाराम नागर की मृत्यु के समय नागर 19 वर्ष के थे। अमृतलाल नागर की विधिवत शिक्षा धन की कमी के चलते हाईस्कूल तक ही हुई, किन्तु निरन्तर स्वाध्याय द्वारा इन्होंने साहित्य, इतिहास, पुराण, पुरातत्व, समाजशास्त्र, मनो ...

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गिरिराज

यह है भारत का शुभ्र मुकुट यह है भारत का उच्च भाल, सामने अचल जो खड़ा हुआ हिमगिरि विशाल, गिरिवर विशाल! कितना उज्ज्वल, कितना शीतल कितना सुन्दर इसका स्वरूप? है चूम रहा गगनांगन को इसका उन्नत मस्तक अनूप! है मानसरोवर यहीं कहीं जिसमें मोती चुगते मराल, हैं यहीं कहीं कैलास शिखर जिसमें रहते शंकर $कपाल! युग युग से यह है अचल खड़ा बनकर स्वदेश का शुभ्र छत्र! इसके अंचल में बहती हैं गंगा सजकर नवफूल पत्र! इस जगती में जितने ग ...

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कम्प्यूटर पर कट-पेस्ट की सुविधा ने पुस्तकों की आदत छुड़ायी

आज सारी दुनिया इस बात से चिंतित है कि लोगों की पढऩे-पढ़ाने की आदत छूटती जा रही है। एक समय था जब नई किताब के बाजार में आते ही उसे कैसे भी प्राप्त कर पढऩे की जिज्ञासा होती थी। घर के ड्राइंग रूम और बिस्तर के सिरहाने किताबें अवश्य होती थीं। भले ही ड्राइंग रूम में रखी किताबें स्टेटस सिंबल के रूप में हों पर इतना सर्वमान्य है कि नई किताबों को पढऩे-पढ़ाने और कालजीवी पुस्तकों को सहेज कर रखना गौरव की बात मानी जाती रह ...

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