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राष्ट्रगान आप पर थोपा नहीं जा रहा, इसका सम्मान करना जरूरी

भारत को जब स्वतंत्रता प्राप्त हुई उसी वक्त से कई चीजों को राष्ट्र द्वारा चिन्हित कर दिया गया था। ऐसी ही एक चीज है जो राष्ट्र के सम्मान के प्रतीक के रूप में पहचानी जाती है। वह है जन गण मन जिसे भारत के राष्ट्रगान का दर्जा प्राप्त है। रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा लिखित यह राष्ट्रगान बंगाली भाषा में लिखा गया है जिसका बाद में हिंदी अनुवाद हुआ और उसे भारत के राष्ट्रगान का दर्जा दिया गया। आज यह 52 सेकेंड का राष्ट्रगान ...

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फातिमा भुट्टों: दर्द की फौलादी विरासत

फातिमा के पापा जब एक आमसभा से लौट रहे थे, पुलिस ने उन्हें मुठभेड़ में मार दिया। पंद्रह साल की नाजुक उम्र में फातिमा के लिए हादसा किसी आसमानी कहर से कम नहीं था। सबसे ज्यादा दु:ख तो इस बात का था कि जब उनके पिता को यातनाएं देकर मारा गया, उस वक्त उनकी सगी बुआ बेनजीर भुटï्टो पाकिस्तान की प्रधानमंत्री थीं। फातिमा ने अपने दर्द को सहलाके अपने अंदर पनप रहे लेखक को अपनी सांसों से सींचा। फिर अपनी गूंगी खामोशियों से पह ...

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संवेदनाओं के प्रगतिशील रचनाकार रांगेय राघव

जिस समय रांगेय राघव अपनी रचनाएं लिख रहे थे उस दौर में उन्होंने कभी यह नहीं सोचा था कि उन्हें किसी अंचल विशेष से जोडक़र देखा जायेगा। बाद में आलोचकों और समीक्षकों ने उन्हें आंचलिकता के सांचे में रख दिया। हीन्दी साहित्य में रांगेय राघव एक ऐसे लोकप्रिय रचनाकार रहे जिन्होंने प्रगतिशील नजरिए के बावजूद अपनी रचनाओं में मानवीय संवेदनाओं और प्रेम को बखूबी शामिल किया और हमेशा जिजीविषा भरे चरित्रों को महत्व दिया। आलोचको ...

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गुजराती हिमाचली उत्सव

पहाड़ों पे लू चलती सुनी ना होगी सर्दी समन्दर किनारे ना सही होगी जाड़े में होरी खिलती देखी ना होगी बुढ़ापे में जवानी आई सोची ना होगी होरी आ गई जाड़े में नेता घूम रहे गली में वोट मांग रहे झोली में खिजाब लगा रहे बालों में देवर बन फिर रहे भाभी के आगे गिड़गिडा़ रहे धूल में लोट लगा रहे वीर बन छाती फाड़ रहे रूप देख लो तुम मेरा भूलना मत मेरा मोहरा सेवा का सीख रहा ककहरा हूं तो हूं विकास का चेहरा फरमाइश भारी पड़ रही ...

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महान वैज्ञानिक ही नहीं चित्रकार और संगीतज्ञ भी थे डॉ. भाभा

भारत में परमाणु शक्ति का विकास करने वाले महान वैज्ञानिक डॉ. होमी जहांगीर भाभा का जन्म 30 अक्टूबर 1909 को मुम्बई के एक पारसी परिवार में हुआ था। वे न सिर्फ एक महान वैज्ञानिक थे अपितु चित्रकार और संगीतज्ञ भी थे। उनके पिता जे.एच. भाभा तत्कालीन बम्बई के प्रसिद्ध वकील थे। बाद में वे टाटा के प्रतिष्ठान में एक उच्च पद पर नियुक्त हुए। बचपन से ही डॉ. भाभा का सम्पर्क प्रतिभाशाली व्यक्तियों से हुआ। उन्होंने 15 वर्ष की ...

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