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ज्ञानी पुरुष स्वयं पर ही शासन करता है

एक युवा ब्रह्मचारी देश-विदेश में अध्ययन कर अपने देश लौटा तो सबके पास इस बात की शेखी बघारने लगा कि उससे अधिक ज्ञानी-विद्वान और कोई नहीं। उसके पास जो भी व्यक्ति जाता, वह उससे प्रश्न किया करता कि क्या उसने उससे बढक़र कोई विद्वान देखा है? बात भगवान बुद्ध के कानों तक जा पहुंची। इतने वर्षों के ज्ञानार्जन का यह हश्र उनसे सहन नहीं हुआ। उन्होंने इस ब्रह्मचारी से मिलने का निश्चय किया। ब्रह्मचारी ने उन्हें आते देखा तो ...

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चुनावी रंग…

देखो बसंत ऋ तु आयो रे साथ ही चुनावी रंग छायो दे। गिला-शिकवा सब नेता भूले चुनावी रंगों में अब सब खिले वामपंथ, दक्षिण पंथ हुआ पुराना सेवापंथ अब हुआ नवल सुहाना। वादों की बात छोड़ो, करो नित्य नए वादे। सत्ता में आकर सुनाओ, अपनी मजबूरी की वादे। क्या दागी क्या भ्रष्टाचारी भ्रष्ट तंत्र में खोजो अपने जैसा अधिकारी गांधीवाद, लोहियावाद का ढोंग रचाओ इसी की आड़ में, जातिवाद, धर्मवाद बढ़ाओ अन्दर-अन्दर आतंकवाद पनपाओ हम ये ...

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संकल्प की जीत…

एडमिरल रिचर्ड बर्ड जो ठान लेते थे, करके ही मानते थे। उन्होंने 12 वर्ष की उम्र में ही अपनी डायरी में लिख दिया था कि ‘मैंने फैसला कर लिया है, मैं उत्तरी धु्रव पर पहुंचने वाला पहला आदमी बनूंगा।’ वह बचपन में ही एडमिरल पियरी द्वारा उत्तरी ध्रव तक पहुंचने के साहसिक संघर्षों से प्रेरित हो चुके थे। उन्होंने उसी समय से इस रोमांचक अभियान के लिए खुद को तैयार करना शुरू किया और आखिरकार यह करके भी दिखा दिया। उन्हें ठंडे ...

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तुम्हारा क्या हश्र होगा…

हश्र...अमन पसंदो ! तुम अपने मजहब के नाम पर कत्ल करते हो मर्दों को बरहना करते हो औरतों को और मौत के हवाले कर देते हो मासूम बच्चों को क्योंकि तुम मानते हो ऐसा करके तुम्हें जन्नत मिल जाएगी जन्नती शराब मिल जाएगी हूरें मिल जाएंगी... लेकिन- कयामत के दिन मैदाने-हश्र में जब तुम्हें आमाल नामे सौंपे जाएंगे तुम्हारे हर छोटे-बड़े आमाल तुम्हें दिखाए जाएंगे तुम्हारे आमाल में शामिल होंगी उन मर्दों की चीखें जिन्हें तुमने क ...

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कबीर का खूंटा

एक बार एक युवक कबीरदास के पास आया और कहने लगा, ‘मैंने अपनी शिक्षा से पर्याप्त ज्ञान ग्रहण कर लिया है। मैं विवेकशील हूं और अपना अच्छा-बुरा भली-भांति समझता हूं, किंतु फिर भी मेरे माता-पिता मुझे निरंतर सत्संग की सलाह देते रहते हैं। जब मैं इतना ज्ञानवान और विवेकशील हूं, तो मुझे रोज सत्संग की क्या जरूरत है?’ कबीर ने उसके प्रश्न का मौखिक उत्तर न देते हुए एक हथौड़ी उठाई और पास ही जमीन पर गड़े एक खूंटे पर मार दी। क ...

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