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पिकासो का सच जानकर हैरान रह गया मित्र

विश्व प्रसिद्ध चित्रकार पिकासो एक बार चित्र बना रहे थे तो एक मित्र उसके पास आए। उन्हें चित्रकारी करते देख मित्र ने उनकी एकाग्रता में व्यवधान नहीं डाला और वापस लौट गए। बाद में जब वह चित्र बाजार में बिकने आया तो उसी मित्र ने उसे खरीद लिया क्योंकि बाजार में पिकासो के नकली चित्र बिक रहे थे और वह चित्र उन्होंने पिकासो को बनाते हुए देखा था। उसने उस चित्र की भारी कीमत चुकाई और उसे घर लेकर आ गए। एक बार वही मित्र उस ...

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डाकू का संकल्प

आर्य मुसाफिर पंडित लेखराम लाहौर के पास एक गांव में आर्य समाज के एक समारोह में प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने वैदिक धर्म और कर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, जो भी शुभ या अशुभ कर्म मनुष्य करता है, उसका फल उसे अवश्य मिलता है। चोरी, हत्या, हिंसा आदि पाप कर्म करने वालों को किए का दंड अवश्य भोगना पड़ता है। कोई भी उसे बचा नहीं सकता।  पंडित जी के प्रभावशाली प्रवचन को सुनने वालों में उस क्षेत्र का कुख्यात अपराधी ड ...

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फिर कर लेने दो प्यार प्रिये…

अब अंतर में अवसाद नहीं चापल्य नहीं उन्माद नहीं सूना-सूना सा जीवन है कुछ शोक नहीं आल्हाद नहीं तव स्वागत हित हिलता रहता अंतरवीणा का तार प्रिये .. इच्छाएं मुझको लूट चुकी आशाएं मुझसे छूट चुकी सुख की सुन्दर-सुन्दर लडिय़ां मेरे हाथों से टूट चुकी खो बैठा अपने हाथों ही मैं अपना कोष अपार प्रिये फिर कर लेने दो प्यार प्रिये .. ...

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गलत तरीके से धन खर्च होने की यह भी वजह

महात्मा अबुल अब्बास खुदा में आस्था रखने वाले व्यक्ति थे। वह टोपियां सिलकर जीवन-यापन करते थे। टोपियों की सिलाई से मिलने वाली आय में से आधा हिस्सा वह किसी जरूरतमंद को दे देते थे और आधी से स्वयं गुजर-बसर करते थे। एक दिन उनके एक धनी शिष्य ने उनसे पूछा, महात्मन! मैं कुछ पैसा दान करना चाहता हूं। यह दान मैं किसे दूं? महात्मा अब्बास ने कहा, जिसे सुपात्र समझो, उसी को दान कर दो।। धनी शिष्य ने एक अंधे भिखारी को सोने क ...

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गिरिराज

यह है भारत का शुभ्र मुकुट यह है भारत का उच्च भाल, सामने अचल जो खड़ा हुआ हिमगिरि विशाल, गिरिवर विशाल! कितना उज्ज्वल, कितना शीतल कितना सुन्दर इसका स्वरूप? है चूम रहा गगनांगन को इसका उन्नत मस्तक अनूप! है मानसरोवर यहीं कहीं जिसमें मोती चुगते मराल, हैं यहीं कहीं कैलास शिखर जिसमें रहते शंकर $कपाल! युग युग से यह है अचल खड़ा बनकर स्वदेश का शुभ्र छत्र! इसके अंचल में बहती हैं गंगा सजकर नवफूल पत्र! इस जगती में जितने ग ...

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