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देश के असली नायक कौन?

देहरादून में ही हवलदार राज बहादुर गुरुंग रहते थे। भारत-पाकिस्तान जंग में वीर चक्र का तमगा हासिल किया था। बामुश्किल पांच फुट के दुबले और निहायत सीधे-शरीफ। चन्द्रबनी में परिवार के साथ छोटे से घर में रहते थे। उनकी कहानी अंग में जोश और जज्बा भरने वाली और उनके अप्रतिम शौर्य को प्रदर्शित करने वाली थी। 1971 में उन्होंने अकेले ही खुखरी से पाकिस्तान के 25 लोगों को मार गिराया था। खुद भी शरीर भर में गोलियां खाईं। तकरी ...

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नौकरशाही और मीडिया

इसलिए मौजूदा दौर में पत्रकारों के लिए काम करना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है। उसके लिए आज बढिय़ा खबर लाना और साथ में कम्पनी के लिए पैसा जुटाना अनिवार्य हो गया है। मजबूरी ऐसी हो गई है कि पत्रकार या तो नौकरशाहों को अपने दबाव में लेने के लिए उलटी-सीधी खबरें लिख दे रहे हैं या फिर उनके जनसम्पर्क अधिकारी बन जा रहे हैं। ऐसा ही हाल नौकरशाहों का भी हो गया है... पत्रकार के लिए अगर सबसे मुश्किल काम है तो नौकरशाह के साथ रि ...

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भंडारी, घीसिंग और उत्तराखंड

सिक्किम के योद्धा किस्म के राजनेता नर बहादुर भंडारी, जिन्होंने तकरीबन दो दशक तक बतौर मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल निभाया, दुनिया से चले गए। इनसे कुछ महीने पहले गोरखालैंड आन्दोलन के प्रणेता रहे सुभाष घिसिंग ने मोक्ष हासिल किया। एक की कर्मभूमि सिक्किम रही तो दूसरे की सेना छोडऩे के बाद दार्जीलिंग और आसपास के गोरखाली बाहुल्य वाले इलाके। उत्तराखंड से इन दोनों का क्या सम्बन्ध जो उनको याद किया जाए? दरअसल, दोनों का दे ...

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खतरे में निर्भीक पत्रकारिता

ताज्जुब की बात नहीं है कि एक-दूसरे को फूटी आंख न सुहाने वाले सियासी दल तब एक हो जाते हैं, जब उनको लगता है कि वे बारी-बारी से मीडिया का शिकार हो रहे हैं या फिर पकड़े जा रहे हैं। भई अगर पत्रकारों को कुछ लिखने पर सीधे जेल ही भेज दोगे और मामूली तन्ख्वाह पा रहे लोगों को भी नगद जुर्माने में ठेल दोगे तो हो गई इस देश में पत्रकारिता... पिछले दिनों कर्नाटक विधानसभा ने दो वरिष्ठ पत्रकारों को सजा सुना दी। उनको जेल भेज ...

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नौकरशाही में गुटबाजी रोकिये मुख्यमंत्री जी

एनडी तिवारी जब मुख्यमंत्री थे तो मधुकर गुप्ता मुख्य सचिव थे। तभी तक हालात सामान्य थे। इसके बाद ज्यों ही डॉ. रघुनन्दन सिंह टोलिया मुख्य सचिव बने, अपर मुख्य सचिव एम रामचंद्रन के चलते गुटबाजी शुरू हो गई। उस दौर में रामचंद्रन (बाद में मुख्य सचिव और केंद्र सरकार में शहरी विकास सचिव बने) इस कदर शक्तिशाली हो चुके थे कि आईएएस और आईपीएस अफसरों ने टोलिया का साथ उनके मुख्य सचिव रहते ही छोड़ दिया था। रामचंद्रन उनके आका ...

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