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प्रेमचंद अग्रवाल बने विधानसभा अध्यक्ष

वैश्य समाज को साधने में जुटी बीजेपी अग्रवाल को बीजेपी के बेहद वफादार और कार्यकुशल तथा व्यावहारिक नेताओं में शुमार किया जाता है। यही वजह है कि पार्टी में अंदरूनी गुट कोई भी हावी हो, प्रेमचंद को कभी कोई दिक्कत नहीं हुई। उनके संबंध निशंक, खंडूड़ी, कोश्यारी गुट में से किसी से भी कभी खराब नहीं हुए। हालांकि उनका नाम मंत्री बनने वाले दावेदारों तक में प्रमुखता के साथ कहीं नहीं था। सीएम के बाद एक और अहम कुर्सी दून क ...

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उम्मीदों के इंद्र हैं त्रिवेंद्र

साल 2007 का वह दिन मुझे अच्छी तरह याद है। सुबह-सुबह मेरे मोबाइल की घंटी बजी थी। फोन के स्क्रीन पर नाम चमक रहा था त्रिवेन्द्र सिंह रावत। तब मैं दफ्तर जाने की तैयारी कर रहा था। विधानसभा चुनाव पूरे उफान पर थे। रात दो-ढाई दफ्तर (तब अमर उजाला) में ही बज जाते थे। अगले दिन सुबह 9.30 बजे तक फिर दफ्तर और फिर शरीर और दिमाग थका डालने वाला तनावपूर्व दिन शुरू हो जाता था। त्रिवेंद्र के साथ मेरे संबंध तभी से अच्छे थे, जब ...

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प्रेमचंद अग्रवाल बने विधानसभा अध्यक्ष

वैश्य समाज को साधने में जुटी बीजेपी अग्रवाल को बीजेपी के बेहद वफादार और कार्यकुशल तथा व्यावहारिक नेताओं में शुमार किया जाता है। यही वजह है कि पार्टी में अंदरूनी गुट कोई भी हावी हो, प्रेमचंद को कभी कोई दिक्कत नहीं हुई। उनके संबंध निशंक, खंडूड़ी, कोश्यारी गुट में से किसी से भी कभी खराब नहीं हुए। हालांकि उनका नाम मंत्री बनने वाले दावेदारों तक में प्रमुखता के साथ कहीं नहीं था। सीएम के बाद एक और अहम कुर्सी दून क ...

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उम्मीदों के इंद्र हैं त्रिवेंद्र

साल 2007 का वह दिन मुझे अच्छी तरह याद है। सुबह-सुबह मेरे मोबाइल की घंटी बजी थी। फोन के स्क्रीन पर नाम चमक रहा था त्रिवेन्द्र सिंह रावत। तब मैं दफ्तर जाने की तैयारी कर रहा था। विधानसभा चुनाव पूरे उफान पर थे। रात दो-ढाई दफ्तर (तब अमर उजाला) में ही बज जाते थे। अगले दिन सुबह 9.30 बजे तक फिर दफ्तर और फिर शरीर और दिमाग थका डालने वाला तनावपूर्व दिन शुरू हो जाता था। त्रिवेंद्र के साथ मेरे संबंध तभी से अच्छे थे, जब ...

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मोदी-शाह की रहेगी सीधी नजर

कांग्रेस सरकार की कारस्तानियों को सामने लाना होगा देहरादून। उत्तराखंड में बीजेपी सरकार के लिए राजकाज बहुत आसान नहीं रहने वाला है। लोगों ने जिस कदर वोट बरसा कर बीजेपी को सत्ता सौंपी है, वह जाहिर करता है कि वे किस तरह बीजेपी पर यकीन कर रहे हैं। बीजेपी से भी ज्यादा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर। मोदी के नाम पर ही वोट भी दिए हैं। यही वजह है कि मुख्यमंत्री का चेहरा तक तय न होने के बावजूद इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन ...

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