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चलने लगी त्रिवेंद्र की चाबुक

त्रिवेंद्र से इस तरह के कदम जल्द उठाये जाने की उम्मीद सभी कर रहे थे। कहा जाने लगा था कि रफ्तार के मामले में वह योगी से कहीं पीछे हैं। उन्होंने सबको न सिर्फ चुप कर दिया बल्कि काफी हद तक गलत भी साबित कर दिया कि वह दब्बू या सुस्त मुख्यमंत्री हैं। सच्चाई तो यह है कि उत्तराखंड के इतिहास में एक साथ इतने ज्यादा अफसर कभी निलंबित नहीं हुए, जितने उन्होंने किए। जिन अफसरों पर कार्रवाई की गई उनमें बहुचर्चित अफसर दिनेश प ...

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क्या हिंदू परंपराओं का प्रतीक बनेगा उत्तर प्रदेश!

उत्तर प्रदेश की फिजा बदल गई है। जाहिर है जब निजाम का वजीर बदला है तो माहौल भी बदलेगा ही। अब फिजा में पूरी तरह हिंदुत्व है। गाय की पूज्यनीयता सर्वोपरि है। सरकार लोगों के भीतर गाय प्रेम जगा रही है। प्रदेश में ‘जय श्रीराम’ काउद्घोष भी खूब हो रहा हैं। इससे राम मंदिर के निर्माण को भी बल मिलने लगा है। वहीं रही सही कसर अवैध बूचडख़ाने व मीट की दुकानों को बंद करवा कर पूरा किया जा रहा है। सूबे की सत्ता संभालने के बाद ...

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दरकार आक्रामक मुख्यमंत्री की

जैसा मंत्री होते वक्त थे वैसा त्रिवेंद्र चाहिए सरकार के बिग बॉस की शुरुआत मिश्रित अंदाज में चेतंग गुरुंग देहरादून। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कुर्सी संभालने के तुरंत बाद फैसले लेने शुरू कर दिए हैं, लेकिन इसकी रफ्तार और अंदाज वह नहीं है, जिसके लिए वह पहले जाने जाते रहे हैं या उनसे अपेक्षा की जा रही है। उन्होंने नौकरशाहों में फेरबदल शुरू कर दिया, लेकिन इसमें बहुत दम नहीं दिखा और पहली औपचारिक प्र ...

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आनी ही थी मोदी की सुनामी

बीजेपी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जिस तरह से ऐतिहासिक जीत दर्ज की है उससे राजनीतिक पंडित भी सकते में है। पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी चीफ अमित शाह की जोड़ी ने एक बार फिर कमाल कर दिखाया है। शाह-मोदी ने मिलकर यूपी में जीत का ऐसा रोडमैप तैयार किया, जिसे बाकी राजनीतिक दल भांप न सके और अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी 47 और मायावती की बीएसपी 19 सीटों पर सिमट कर रह गईं। चुनाव परिणाम से पहले तक तरह-तरह की भवि ...

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सरकार के नए महानायक

त्रिवेंद्र राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की पृष्ठभूमि से आते हैं और उन भाजपाइयों में से हैं, जिन्होंने पार्टी के प्रति वफादारी कभी कम नहीं होने दी। साथ ही काम सही हो तो किसी से दब कर या सह कर काम न करने की छवि भी हमेशा कायम रखी। वह न सिर्फ मेहनती हैं बल्कि अपनी बातों को तर्कों से मजबूत करने वाले हैं। 2007 में जब बीजेपी की सरकार थी तो वह अकेले ऐसे मंत्री थे,जो खंडूड़ी और बाद में निशंक मंत्रिमंडल की बैठक में जोर श ...

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